चुनाव खत्म होते ही बाजार में दुकानों पर खाद खत्म, गोदामों पर ब्लैक में खाद की विक्री जारी, कृषि विभाग के अधिकारी दीपावली के नाम पर बसूली कर साध चुके है मौन - Kolaras



कोलारस - चुनाव खत्म होते है भाजपा एवं कांग्रेस के नेता जीत हार का गणित जोड़ने में लगे हुये है दूसरी तरफ अन्नदाता किसान अल्प वर्षा के साथ-साथ विजली की कटौती एवं खाद को लेकर परेशान है शासकीय गोदामों पर खाद समय पर उपलब्ध नहीं हो पा रहा है खाद की काला बाजारी करने वाले व्यापारी दुकानों पर खाद की शून्य स्थिति यानि की खाद न होने की जानकारी देकर गुप्त गोदामों से यूरिया एवं डीएपी खाद 100/-रू से लेकर 250/-रू प्रति कट्टा ब्लैक में वेच रहे है इस तरह के एक नहीं अनेक उदाहरण किसानों के रूप में उपलब्ध है किन्तु प्रशासन मतगणना में व्यस्त है और नेता जीत हार के आंकड़े में लगे हुये है खाद की काला बाजारी रोकने वाला कृषि विभाग दीपावली के समय जिला अधिकारियों के नाम पर प्रति खाद की दुकान से बसूली कर मौन साधे हुये है इस बात की भी प्रमाणित जानकारी खाद विक्रय करने वाले दुकानदारों ने बताई है।

जिसे सरकार अन्नदाता के नाम से पुकारती है उसकी स्थिति वर्तमान समय में क्या है किसी से छिपी नहीं है किसान के सामने विजली, खाद, दबा की समस्या से किसान जूझ रहा है उसके ऊपर से वारिश कम होने के कारण नलकूपों में पानी की समस्या तथा बिजली न मिलने से किसान परेशान है किसानों को गोदामों पर पर्याप्त मात्रा में न मिलने के कारण बाजार से लेना पड़ रहा है बाजार में डीएपी एवं यूरिया खाद दुकानदारों द्वारा उपलब्ध न होने की बात किसानों से लेकर सरकारी आंकड़ों में दी जा रही है किन्तु काला बाजारी के रूप में व्यापारियों को जब  निर्धारित दर से 100-250रू. प्रति कट्टा की राशि मिलती है तो किसानों को गुप्त गोदामों से उक्त डीएपी एवं यूरिया खाद दे दिया जाता है। 

अन्नदाता किसान के साथ खुलेआम लूट हो रही है वह भी बाजारों में जहां कृषि विभाग की मिली भगत से कालाबाजारी करके खाद तथा नकली दबाओं का खुला खेल कोलारस के एवी रोड़ से लेकर मानीपुरा एवं लुकवासा से लेकर बदरवास तथा खतौरा से लेकर रन्नौद तक खेला जा रहा है अन्नदाता किसान को उत्तम किस्म का ना तो बीज उपलब्ध हो सका है और न ही दबा उसके ऊपर से डीएपी खाद का कट्टा 1360 के स्थान पर 1500 से लेकर 1600 तक में बेचा जा रहा है इसी तरह यूरिया वारिक खाद के नाम पर 275 की जगह 350 से 400 के बीच बेचा जा रहा है अन्नदाता मेहगी दर पर खाद से लेकर नकली दबाऐं खरीदने पर मजबूर है।


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