कोलारस, बदरवास अंचल में पहली बार दिखा बंद का व्यापक असर



कोलारस- परगने के अंतर्गत आने वाली कोलारस, बदरवास, रन्नौद तहसील क्षेत्रों के अलावा खतौरा, लुकवासा, खरई सहित तहसील क्षेत्र के अन्य ग्रामीण इलाकों में भारत बंद के क्रम में बाजार यानि कि प्रतिष्ठान बंद होने का व्यापक असर लोगों ने पहली बार इतने व्यापक पैमाने पर देखा बाजार से लेकर पेट्रोल पम्प, स्कूलों से लेकर बसें यहां तक कि शराब कि दुकानें तक भारत बंद के चलते गुरूवार को सुबह से लेकर देर शाम तक बंद रहीं भारत बंद का आव्हान एससी एसटी एक्ट को कठोर बनाने के विरोध में सवर्ण समाज द्वारा किया गया जिसमें पिछडी एवं अल्प संख्यक जातियों के लोगों ने भी भारत बंद के आंदोलन में भाग लिया लोग अपने प्रतिष्ठानों को अपनी स्वेच्छा से बंद करते हुये दिखाई दिये क्योकि उनको लगा कि एससी एसटी कानून के कठोर होने से एससी एसटी एवं अन्य वर्गाे के बीच होने वाले मामूली कहा सुनी के विवाद भी अब शासकीय धन राशि के कारण पुलिस थानों तक पहुंचेगें अथवा मामूली से विवाद अब एक्ट के कठोर होने से बडा रूप लेगें इसी को अपने आप पर सक्त कानून मानते हुये लोगों ने भारत बंद के क्रम में कोलारस परगने के बाजार बंद में स्वेच्छा से गुरूवार को दिनभर शांति पूर्वक बंद में भाग लिया लुकवासा में बाईक  सवारों पर एससी वर्ग के लोगों द्वारा पथराव, बदरवास में बाईक सवारों को पुलिस द्वारा समझाइश एवं कोलारस में विरोध स्वरूप तीन स्थानों पर टायर जलाने के मामलों को छोडकर अंचल में बाजार बंद शांति पूर्वक रहा गुरूवार को केवल शासकीय कार्यालय खाना पूर्ति के लिए खुले हुये नजर आये शेष समूचे क्षेत्र में गुरूवार को सन्नाटा पसरा नजर आया बाजार बंद को लेकर भाजपा नेता परेशान तो दूसरी ओर कांग्रेस के नेता जनता के आंदोलन पर अपने आप को फायदे में समझकर खुश दिखाई दिये यदि केन्द्र सरकार द्वारा एससी एसटी कानून में समय रहते संशोधन नहीं किया तो इसका खामियाजा केन्द्र की सरकार ही नहीं बल्कि प्रदेश एवं क्षेत्र के भाजपा नेताओं को आगामी चुनावों में भुगतना पड सकता है क्योकि भाजपा का मुख्य बोट बैंक सवर्ण एवं पिछडे समाज के लोग माने जाते हैं और यदि इसी वोट बैंक को केन्द्र की सरकार एक कानून के रूप में दूरी बना लेती है या यह समाज का बोट बैंक केन्द्र सरकार से नाराज हो जाता है तो भाजपा की मूल पूंजी कम होते ही केन्द्र ही नहीं बल्कि प्रदेश की सरकार पर भी इसका असर पडना तय है। कुल मिलाकर 6 सितम्बर के भारत बंद के आंदोलन से यह सिद्घ हो गया है, कि लोगो में एससी एसटी एक्ट के संशोधन से नाराजगी है जिसके चलते लोग बिना किसी दबाव के बाजार बंद करते हुये दिखाई दिये ।

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