गुप-चुप तरीके से चल रहा है सटटा का कारोबार कोलारस में
कोलारस-सटटा एक ऐसी बीमारी है जिसमें सटटा लगाने बाले लोग इसकी जकड में आ जाते है इस सटटे के रटटे में अधिकतर युवा यहां तक की अधिकांश कर्मचारी शिक्षक तक लपेटे में दिखाई दे रहे है। कोलारस में अनेक स्थानो पर सटटे का कारोबार चोरी छुपे चल रहा है और यहां पर सटटा लगाने बाले सटोरिये लुकवासा से लेकर व्यावरा तक अपनी पकड बनाये हुये है और यह कारोबार मोवाईल के जरिये किया जा रहा है। नगर में अनेक स्थानो पर सटटे का कारोबार चोरी छुपे चल रहा है विधानसभा चुनाव परिणाम के बाद देहरदा सडक से एक प्रसिद्घ सटोरिये को पुलिस ने उठाया था तब ऐसा लगा था कि अब शायद इस कारोबार पर अंकुश लग जाये परन्तु इसके बाबजूद भी सटटे के कारोबार पर प्रतिबंध नही लगा। कोलारस के लोग आज भी लुकवासा में अपना सटटे का अंक लगाने जाते है। सटटे की लत से पीडित अनेक लोग वर्वादी की कगार पर पहुंच चुके है। कोलारस में तो अधिकांश शासकीय कर्मचारी से लेकर शिक्षक तक इस कारोबार में लिप्त है और एक के अस्सी के चक्कर में अपनी जमा पूंजी को बर्बाद कर चुके है। यदि वर्षो से सटटा लगा रहे युवको की ओर देखा जाये तो इनको लाभ की वजाय हानि इस काम में हुई है।
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