
मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को चिट्ठी लिखी है. जिसमें दिग्विजय सिंह ने प्रधानमंत्री मोदी से भारतीय जनता पार्टी के विधायक आकाश विजयवर्गीय और भोपाल से पार्टी की सांसद साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर पर कार्रवाई होने के बारे में पूछा है. उन्होंने ने इस मामले में पीएम मोदी की कथनी और करनी में फर्क होने की बात कही है.
पत्र में प्रधानमंत्री की सार्वजनिक रूप से साध्वी प्रज्ञा के बयान की निंदा और आकाश विजयवर्गी की हरकत पर हैरानी जताने की बात का जिक्र करते हुए वरिष्ठ कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने कहा कि क्या यह मान लिया जाए कि आपकी कथनी और करनी में फर्क है? आकाश विजयवर्गी मामले में दिग्विजय सिंह ने उन तमाम बड़े नेताओं (जिसमें केंद्रीय मंत्री भी शामिल हैं) के नाम गिनाए जिन्होंने विधायक का समर्थन किया था.
कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने पूछा कि इन मामलों में प्रकट की गई आपकी चिंता हाथी के बाहरी दिखने वाले दांतों की तरह है. उन्होंने चिट्ठी की कॉपी गृह मंत्री अमित शाह और बीजेपी के कार्यकारी अध्यक्ष जेपी नड्डा को भी भेजी है. गौरतलब है कि प्रधानमंत्री ने संसदीय दल की बैठक में आकाश विजयवर्गी मामले में हैरानी जताते हुए कहा था कि उनका समर्थन करने वाले लोगों को पार्टी से निष्कासित करना चाहिए.
निगमकर्मी पिटाई मामला
इंदौर में नगर निगम का दल गंजी कंपाउंड क्षेत्र में एक जर्जर मकान को गिराने पहुंचा था. इसकी सूचना मिलने पर विधायक आकाश विजयवर्गीय मौके पर पहुंचे, जहां उनकी नगर निगम के कर्मचारियों से बहस हो गई. तभी आकाश विजयवर्गीय क्रिकेट का बल्ला लेकर नगर निगम के अधिकारियों से भिड़ गए. विजयवर्गीय ने बल्ले से अफसरों की पिटाई भी की. इसके मामले में उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया और जेल भी जाना पड़ा. वो बाद में इस मामले में जमानत पर रिहा हुए. इसके बाद उनका बीजेपी दफ्तर में जोरदार स्वागत हुआ था.
गौरतलब है कि प्रधानमंत्री ने संसदीय दल की बैठक में आकाश विजयवर्गी मामले में हैरानी जताते हुए कहा था कि उनका समर्थन करने वाले लोगों को पार्टी से निष्कासित करना चाहिए. दिल्ली में बीजेपी संसदीय दल की बैठक में विधायक आकाश विजयवर्गीय पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सख्ती दिखाई थी. बिना नाम लिए पीएम मोदी ने कहा था कि किसी का भी बेटा हो, उसकी ये हरकत बर्दाश्त नहीं की जाएगी. जिन लोगों ने स्वागत किया है, उन्हें पार्टी में रहना का हक नहीं है. सभी को पार्टी से निकाल देना चाहिए.
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