कोलारस नगर परिषद चुनाव में ब्राह्र्राण-बनिया-कलार के बीच हो सकता है चुनावी संग्राम, कुशवाह प्रत्याशी न होने की दशा में कुशवाह, धाकड़ समाज हो सकता निर्णायक भूमिका में
हरीश भार्गव-रोहित वैष्णव कोलारस - कोलारस नगर परिषद के अध्यक्ष पद का आरक्षण सम्पन्न होने के साथ ही विधानसभा मुख्याल कोलारस में अध्यक्ष पद के चुनाव को लेकर चर्चायें इन दिनों जोरो पर है। लोग भाजपा से टिकिट लाने वाले को ज्यादा महत्व दे रहे है। जबकि चुनावी गणित यह है। कि कांग्रेस एवं बसपा का प्रत्याशी तय होने के बाद तस्वीर साफ होगी कि मुकावला दो कोणीय हैं या त्रिकोणीय वर्तमान में भाजपा से टिकिट मांगने वालों की सूची लम्बी है।
यदि भाजपा का पर्वेेक्षक आ जायें। तो टिकिट मांगने वालों की लाईन कंट्राॅल की तरह भी लग सकती है। कांग्रेस एवं बसपा अभी मौन साधे हुये है। कांग्रेस को उम्मीद है। कि भाजपा की लम्बी सूची में से जो अस्तुष्ट टिकिट न मिलने की स्थिति में निकलकर बाहर आयेंगे उनको साधा जायें। कांग्रेस की तरह यही हाल कुछ बसपा का है। भले ही लोग भाजपा प्रत्याशी को जीत का भाव अधिक दे रहे है। किन्तु हमारा मानना है। कि तीनों पार्टियों के टिकिट तय होने के बाद तस्वीर साफ होगी। लोगो का मानना है।
कि कोलारस नगर परिषद के चुनाव में इस बार ब्राह्राण, बनिया, कलार, उम्मीदवारों के बीच टिकिट से लेकर मतदान तक कड़ा मुकावला देखने को मिल सकता है। कोलारस नगर परिषद के चुनाव में यदि इन तीनों समाजों के प्रत्याशियों के बीच कड़ा मुकावला होता है। तो ऐसी स्थिति में कुशवाह, धाकड़, दलित समाज का वोट निर्णायक भूमिका में आ जायेंगा। इन तीनों समाजों मेें से प्रत्याशी न होने तथा दो समाजों के वोट स्वयं के समाज के अलावा पार्टी का वोट जिस प्रत्याशी के खाते में चला जायेंगा।
वह जीत की रेश में आगे निकल सकता है। वर्तमान में कोलारस नगर परिषद से जो पांच नाम पांच जातियों से निकलकर सामने आये उनमें बंदना-विपिन खैमरिया, सविता-धर्मेन्द्र जैन, निशा-रविन्द्र शिवहरे, गोमती-रामजीलाल धाकड़, ममता - मंगल कुशवाह के नाम कोलारस नगर परिषद अध्यक्ष के लिये भाजपा से प्रमुख दावेदारों के रूप में निकलकर सामने आये थे। इनमें से एक को भाजपा अपना उम्मीदवार बना सकती है। तो दूसरे दावेदार कांग्रेस एवं बसपा से भी चुनाव मैंदान में दिखाई दे सकते है। इन तीनों दलों के अलावा कई निर्दलीय उम्मीदवार भी चुनाव मैंदान में दिखाई दे सकते है।
किन्तु कोलारस में बहुसंख्यक ब्राह्राण, बनिया, कुशवाह, दलित समाज का वोट 50 प्रतिशत से भी अधिक माना जाता है। कोलारस में ब्राह्राण, बनिया का वोट विपरीत जाता रहा है और यह कहानी दोनो समाज के प्रत्याशी हो अथवा न होने पर भी यही कहानी रहेंगी। जिसका लाभ अभी तक तीसरे उम्मीदवार को मिलता रहा है। कहीं इस बार भी पुरानी कहानी यही समाज उम्मीदवार उतार कर अथवा वोट बांटकर पुनः दोहराने की स्थिति में दिखाई दे रहे है।



Jai sri ram
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