किसानों का आंदोलन कहीं केन्द्र सरकार की विदाई का आंदोलन न बन जाये, कोलारस में किसानों के आंदोलन में सभी ने दिया समर्थन

किसानों का आंदोलन कहीं केन्द्र सरकार की विदाई का आंदोलन न बन जाये, कोलारस में किसानों के आंदोलन में सभी ने दिया समर्थन 

रोहित माहुने-रोहित वैष्णव कोलारस - मंगलवार को किसान संगठनों के द्वारा देशव्यापी भारत बंद रखा जिसका असर कहीं कम तो कहीं अधिक दिखाई दिया। शिवपुरी जिले में विपक्षी दल कांग्रेस ज्ञापन तक दिखाई दी तो वहीं किसानों ने भारत बंद के समर्थन में शिवपुरी से लेकर जिले की सभी तहसीलों में रेली निकालकर किसानों को केन्द्र सरकार की मनमानियों के बारे में बताया तथा मोदी सरकार के विरोध में किसानों ने जमकर नारेवाजी की किसानों के भारत बंद के समर्थन में जहां सभी विपक्षी दलों ने अपना समर्थन दिया उसी क्रम में जिला मुख्यालय शिवपुरी में कांग्रेसियों ने ज्ञापन सौंपा तो कोलारस के पड़ोरा चैराहे पर किसानों ने फोरलाईन हाईवें को जाम किया पुलिस के पहुंचने पर हाईवें के जाम को खोला गया। शिवपुरी की तरह कोलारस बदरवास सहित जिले की अन्य तहसीलों में कांग्रेसियों द्वारा किसानों के समर्थन में प्रशासनिक अधिकारियों को ज्ञापन सौपें गये। मंगलवार को भारत बंद के समर्थन में कोलारस किसान एवं  सिख समाज के लोगो ने जबरदस्त प्रदर्शन किया कोलारस नगर में किसानों ने मोदी सरकार के विरोध में नारे लगाते हुये नगर के प्रमुख मार्गो में रेली निकाली तथा पड़ोरा चैराहे पर कुछ समय के लिये हाईवे जाम भी किया। किसानों द्वारा मंगलवार को मंड़ी में उपज न लाने के कारण मंड़ियों से लेकर बाजार भी बंद रहे।

किसानों का आंदोलन कहीं भाजपा सरकार की विदाई का आंदोलन न बन जाये 

देश में वहुमत के साथ दूसरी बार मोदी सरकार वनी है। दूसरी बार मोदी सरकार बनने के बाद जिस तरह सहयोगी दल अलग हो रहे है और सरकार की योजनाओ से जनता की जगह व्यक्तिगत लोगो को लाभ पहुंच रहा है। जिसको लेकर जनता सब समझ रही है। वह समय का इंतजार कर रही है। समय का मतलब साफ है। लोकसभा के चुनावों में भाजपा से टूटे दल एवं किसानों से लेकर कई वर्गो की नाराजगी केन्द्र सरकार के लिये आने वाले चुनावों में बड़ी चुनौती पेश कर सकते है। केन्द्र सरकार द्वारा लाये गये कृषि कानून के बाद उसके ही सहयोगी दल अकाली दल से लेेकर देश भर के किसान केन्द्र की मोदी सरकार से नाराज हो गये वहीं महाराट्र में मुख्यमंत्री पद को लेकर भाजपा का सहयोगी दल अलग हो गया। इतना ही नहीं संचार के क्षेत्र में वीएसएनएल को खत्म कर प्राईवेट मोबाईल कम्पनियों को बड़ावा दिया गया। इसी तरह रेल्वे के क्षेत्र में निजी करण तथा शासकीय मंड़ियों के स्थान पर निजी मंड़ियों को आमंत्रण, लाॅक डाउन के दौरान लुटे पिटे मध्यम वर्ग एवं छोटे व्यवसाईयों को राहत देने की जगह सभी क्षेत्रों में  महंगाई का तोफा केन्द्र सरकार द्वारा दिया गया। जबकि 20 लाख करोड़ घोषणा केन्द्र सरकार द्वारा कोरोना से पिटे लोगो को राहत देने के नाम पर घोषणा की गई थी। किन्तु मध्यम वर्ग से लेकर छोटे व्यापारियों को 20 रूपये भी नहीं दिये गये । इन सबसे लगता है। कि पूर्व से मुश्लिम समाज, हरिजन आदिवास समाज के साथ किसान आंदोलन के बाद सिख समाज तथा महंगाई से त्रस्त मध्यम वर्ग यदि केन्द्र सरकार के विरोध में खड़े हो गये तो आने वाले लोकसभा के चुनाव में केन्द्र की मोदी सरकार की विदाई यह सब मिलकर कर सकते है। 



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