डीपीसी कार्यालय से लेकर जिला पंचायत व कलेक्ट्रेट तक घोटाले की गूंज
शीलकुमार यादव बदरवास - बदरवास विकास खण्ड बदरवास के सरकारी स्कूलों में राज्य शिक्षा केन्द्र से एस.एम.सी. के खातों में विद्यालयों के मैनेजमेंट एवं बच्चों के शैक्षणिक स्तर को सुधारने हेतू शाला कन्टनजेंसी राशि जारी की गई थी। जिसे व्यय करने का अधिकार शाला के प्रधान शिक्षक एवं एक अन्य शिक्षक को था। लेकिन बी.आर.सी. कार्यालय बदरवास के अधिकारियों एवं कर्मचारियों द्वारा शिक्षकों से ओ.टी.पी. पूछकर शाला कंटनजेंसी राशि का चिन्हित फर्मों को भुगतान कर राशि को खुर्द बुर्द कर दिया गया। लाखों में हुये इस कंटनजेंसी घोटाले में डी.पी.सी कार्यालय से लेकर जिला पंचायत तथा जिलाधीश कार्यालय तक गूंज पहुँचने के बाद भी आरोपी कार्यवाही की जद से अभी तक बाहर हैं। एक दिन शिक्षक के अनुपस्थित रहने या समय से विद्यालय न पहुँचने पर या मोबाईल पर विद्यालय में होने की पुष्टी न कराने पर तत्काल कार्यवाही करने वाले शिक्षा विभाग के इस लाखों के घोटालें में बी.आर.सी.सी कार्यालय के अधिकारियों एवं कर्मचारियों पर दो बार नोटिस देने शिक्षकों द्वारा स्पष्ट लिखित दोषी कर्मचारियों के नाम उजागर करने के बाद भी कार्यवाही न करने पर विभाग की कार्यप्रणाली पर प्रश्न चिन्ह लग गया है।
फरवरी माह में प्रकाश में आए इस कंटनजेंसी घोटाले से प्रभावित शिक्षकों ने यथासमय अपने लिखित आवेदन डीपीसी को प्रस्तुत कर इस घोटाले से अवगत करा दिया था। वरिष्ट कार्यालय द्वारा इस प्रकरण में चार सदस्यीय जॉच दल गठित किया गया। जिसके द्वारा जाँच पूर्ण कर अपना प्रतिवेदन प्रस्तुत करने के बाद पुनः कलेक्ट्रेट कार्यालय द्वारा बदरवास बीआरसीसी सहित बारह शिक्षकों को इस संबंध में अपने कथन पुनः डीपीसी कार्यालय में प्रस्तुत करने के आदेश जारी किये गये पालन स्वरूप शिक्षकों द्वारा भ्रष्टाचार को उजागर करते हुए अपने कथन डीपीसी को पुनः प्रस्तुत कर दिये गये। चार सदस्यीय समिति के जॉच प्रतिवेदन देने व पुनः शिक्षकों के कथन लेने के बाद कलेक्ट्रट कार्यालय द्वारा इस कंटनजेंशी घोटाले को संज्ञान में लेते हुए 25 अप्रैल को स्वंय जिलाधीश के समक्ष उपस्थित होकर कथन प्रस्तुत करने हेतू बी. आर. सी. सी बदरवास, लेखापाल, भृत्य सहित नो शिक्षकों को आदेशित किया गया। परंतु घोटाले की जाँच के बाद बार बार संबंधितों के कथन लेने व दो बार कलेक्ट्रेट कार्यालय के पत्र देने के बाद दोषियों पर कार्यवाही न होने से कर्मचारी जगत अंचभित है।
इतने लम्बे समय में दोषियों द्वारा शिक्षकों को कथन परिवर्तित करने हेतू दबाव बनाया जाना स्वभाविक है। इस पूरे घोटाले में प्रयोग में लाये गये मोबाईल नम्बर व ईमेल आईडी भी नस्तीबद्ध है। एक शिक्षकीय शालाओं में भुगतान न करने के आदेश होने के बाद भी भुगतान किया जाना भ्रष्टाचार उजागर करने के साथ साथ इस पूरे प्रकरण में दोषियों पर कार्यवाही न होने से डीपीसी कार्यालय, जाँच दल, जिला पंचायत, कलेक्ट्रेट तक की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं। इतने बड़े घोटाले में साईवर क्राईम के पुख्ता सबूत होने के बाद भी घोटाले को दवाये जाने व दोषियों पर कार्यवाही न होने से प्रभावित शिक्षक भयवीत हैं। पूरा प्रकरण कर्मचारियों व प्रशासनिक स्तर से लोकतंत्र में अच्छा संदेश नहीं दे रहा है।
क्या कहते है अधिकारी
हमने बिभाग द्रारा नोटिस भी दिए थे और प्रस्ताव बनाकर कलेक्टर साहव के भेज दिया है अब कलेक्टर साहव के यहा फ़ाइल है बिलम्ब क्यों हो रहा है वही बता पाएंगे - अशोक त्रिपाठी डी.पी.सी जिला शिवपुरी।
क्या कहते है अधिकारी
मेरे पास कोई पेंडिंग फ़ाइल नही है इनका बिभागीय मामला है मैं फ़ाइल दिखवा लेता हूँ उचित कार्यवाही की जाएगी - रविन्द्र कुमार चौधरी कलेक्टर जिला शिवपुरी।