कोलारस - कोलारस परगने की जीवन दायनी कहलाने वाली सिंध माता नदी जोकि काफी लम्बे समय से रेत माफियाओं का गढ़ वन चुकी है यहां वारिश के कुछ दिनों को छोड़कर रेत माफिया हमेंशा रेत निकालने में जुटे हुये है कोलारस परगने में करीब 8-12 स्थानों से दिन रात अवैध रूप से रेत का उत्खनन जारी है पचावली पर बने नये पुल से खड़ा होकर देखा जा सकता है कि रेत माफियाओं को प्रशासन का कोई भय नहीं है रेत माफिया दिन रात अवैध रूप से रेत का उत्खनन कर अपने आप को माला माल तथा सिंध माता नदी का अस्थित्व खत्म करने में दिन रात जुटे हुये है।
कोलारस एवं बदरवास से होकर गुजरने वाली सिंध माता नदी में वारिश के बाद नदी में पानी भरा रहे और किसानों को फसल के साथ - साथ पीने के पानी की समस्या पैदा न हो इसके लिये उपचुनाव के दौरान कोलारस के पूर्व विधायक वीरेन्द्र रघुवंशी ने उपचुनाव के दौरान हुई स्टॉप डेम सीरिज पर कार्य प्रारम्भ कराने के लिये भागीरथी प्रयास किया और कोलारस बदरवास सीमा क्षेत्र में सिंध नदी पर स्टॉप डेम की सीरिज के तहत कार्य पूर्ण होने के बाद सर्दी एवं गर्मियों में डेम के गेट बंद हो जाने के बाद पानी देखा जाने लगा और क्षेत्र के हजारों किसानों को सिंध नदी में पानी भरा रहने से लाखों हेक्टर कृषि भूमि में पानी देने के लिये 12 महीना उपलब्ध होने लगा जिसके चलते फसल कटने के उपरांत किसान टमाटर, सिमला मिर्च, गन्ना एवं अन्य सब्जियां भी किसान स्टॉप डेम बनने तथा गेट बंद होने के बाद करने लगे थे किन्तु बीते कुछ वर्षो से रेत माफिया इतने हावी हो चुके है कि सिंचाई विभाग स्टॉप डेमों के गेट लगाने की हिम्मत तक नहीं जुटा पा रहा है और प्रशासन के सभी तंत्र अवैध रूप से चल रहे रेत के कारोबार पर रोक लगाने में चारो खाने चित नजर आ रहे है।
गेट बंद करना भूला संसाधन विभाग
जल संसाधन विभाग बारिश के मौसम से कुछ समय पूर्व स्टॉप डैम के गेटों को खोल देता है और बारिश का मौसम समाप्त हाेते ही इन गेटों को बंद कर दिया जाता है. ताकि न तो गेट और ना स्टॉप डैम को नुकसान हो और साल भर नदी में पानी बना रहे. इस बार बारिश का मौसम बीते हुए लंबा समय गुजर चुका है, परंतु अभी तक जल संसाधन विभाग ने स्टाप डेम के गेट नहीं लगाए हैं. इस कारण सिंध नदी का पानी तेजी से बह कर मड़ीखेड़ा डेम में पहुंच रहा है।
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