नाराज मूल भाजपा कार्यकर्ता नगर निकाय चुनावों में टिकिट तक करेंगे इंतजार के बाद लेंगे बड़ा फैसला
शिवपुरी - शिवपुरी जिले में इस समय भाजपा दो खैमों में बटी हुई दिखाई दे रही है भाजपा के मूल कार्यकर्ता विधानसभा चुनावों में कोलारस एवं पोहरी में टिकिट न मिलने से लेकर वर्तमान में भाजपा के जिला, मंडल, जिला कार्यकारिणी सभी विन्दुओं में मूल भाजपा कार्यकर्ताओं की उपेक्षा से अंदर ही अंदर नाराज चल रहे है जिले की पांच विधानसभा सीटों के करीब एक सैंकड़ा से भी अधिक भाजपा के मूल कार्यकर्ता उपेक्षा के चलते नाराज दिखाई दे रहे है जिसके चलते भाजपा के करीब दो दर्जन से भी अधिक कार्यकर्ताओं ने गोपनीय बैठक का आयोजन किया जिसमें भाजपा के अगड़े एवं पिछडे़ वर्ग के भाजपा कार्यकर्ता बैठक में शामिल हुये उन्होंने बैठक में चर्चा के दौरान निर्णय लिया की अगले वर्ष नगर निकाय एवं पंचायत के चुनाव होना है तथा 2028 में विधानसभा के चुनाव होना है जिस प्रकार भाजपा के मूल कार्यकर्ताओं की उपेक्षाऐं अभी तक होती रही है यदि यह सिलसिला आगे भी जारी रहा तो नगर निकाय एवं पंचायत के चुनावों में भाजपा कार्यकर्ता विभिषण की भूमिका में भाजपा के ही कार्यकर्ताओं के खिलाफ खुलकर बगावत करेंगे और यदि इसी तरह नगर निकाय के अध्यक्षों के चुनावों में मूल कार्यकर्ताओं को टिकिट से दूर रखा गया तो भाजपा का एक बड़ा धड़ा जिले में बड़े रूप में कांग्रेस के खैमे में जा सकता है।
नगर निकाय के चुनावों तक भाजपाई रहेगे मौन -
जिले की दो विधानसभा सीटों से लेकर भाजपा के जिला अध्यक्ष पद तथा नव नियुक्त जिला कार्यकारिणी में भाजपा के मूल कार्यकर्ताओं से दूरी बनाने से भाजपा के जिले भर के करीब एक सैंकड़ा से भी अधिक कार्यकर्ता नाराज दिखाई दे रहे है जिसका लेकर भाजपा के कई कार्यकर्ताओं ने गोपनीय बैठक भी आयोजित की बैठक के दौरान भाजपा के टिकिट के दावेदार करीब 3-4 नेता भी बैठक में शामिल हुये उन्होंने भी बैठक के दौरान लगातार मूल कार्यकर्ताओं की उपेक्षा की आवाज को उठाया और बैठक के दौरान कुछ कार्यकर्ताओं ने कहा कि अगले वर्ष 2027 में नगर निकाय के चुनाव होना है यदि इसी तरह मूल कार्यकर्ताओं की उपेक्षा होती रही तो हमें चुनावों के दौरान एक जुट रहकर अपनी आवाज संगठन तक पहुंचाने की आवश्यकता है और यदि उसके बाद भी उपेक्षा का सिलसिला जारी रहा तो नगर निकाय एवं पंचायत चुनाव के बाद भाजपा के टिकिट के दावेदार एवं अन्य सैंकड़ों की संख्या में भाजपा के मूल कार्यकर्ता कांग्रेस का दामन भी थाम सकते है।
