राज्य की महिलाओं के लिए 1.27 लाख करोड़ का प्रावधान, ‘लाडली बहना’ की राशि बढ़ी, शहरों के विकास के लिए 'द्वारकानगर योजना' का एलान - Bhopal



मध्य प्रदेश सरकार ने वर्ष 2026–27 के लिए 4 लाख 38 हजार 317 करोड़ रुपये का बजट पेश किया है इसमें नारी कल्याण संबंधी विभिन्न योजनाओं के लिए 1 लाख 27 हजार 555 करोड़ रुपये का प्रावधान प्रस्तावित है बजट में महिला सशक्तीकरण, सामाजिक सुरक्षा और आर्थिक भागीदारी को प्रमुख आधार के रूप में रेखांकित किया गया है।


महिला सशक्तीकरण की नीतियां और भागीदारी - 

सरकार का कहना है कि महिला स्व-सहायता समूहों, शासकीय सेवा और जन-प्रतिनिधित्व में महिलाओं की बढ़ती भूमिका सशक्तीकरण की दिशा में संकेत देती है। टोल नाके और पेट्रोल पंप जैसे पुरुष प्रधान व्यवसायों में प्रतिनिधित्व, खेती-किसानी, पुलिस व अर्धसैनिक बलों में भागीदारी तथा साहसिक खेलों में प्रदर्शन को भी इसी क्रम में रखा गया है।


लाडली लक्ष्मी योजना 2.0 का विस्तार

बालिकाओं के जन्म से शिक्षा और विवाह तक समर्थन के उद्देश्य से वर्ष 2007 में शुरू की गई लाडली लक्ष्मी योजना को वर्ष 2022-23 से “लाडली लक्ष्मी योजना 2.0” के रूप में लागू किया गया है। इस योजना के अंतर्गत अब तक 52 लाख 29 हजार बालिकाओं को लाभान्वित किया गया है, जबकि 14 लाख 12 हजार बालिकाओं को छात्रवृत्ति प्रदान की गई है इसके लिए 1 हजार 801 करोड़ रुपये का प्रावधान प्रस्तावित है।

 

लाडली बहना योजना में बढ़ी मासिक सहायता

नारी स्वाभिमान और स्व-निर्भरता से जुड़ी लाडली बहना योजना में वर्तमान में लगभग 1 करोड़ 25 लाख महिलाएं पंजीकृत हैं लाडली बहनों को प्रतिमाह दी जाने वाली राशि 1 हजार 250 रुपये से बढ़ाकर 1 हजार 500 रुपये कर दी गई है इस योजना के लिए 23 हजार 882 करोड़ रुपये का प्रावधान प्रस्तावित है, जो बजट में महिलाओं के लिए प्रत्यक्ष नकद सहायता के रूप में महत्वपूर्ण हिस्सा दर्शाता है।

 

मातृत्व, आवास और उद्यमिता

प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना के तहत प्रारंभ से अब तक 51 लाख 76 हजार हितग्राहियों का पंजीयन किया गया है वित्तीय वर्ष 2025-26 में 210 करोड़ रुपये का भुगतान किया जा चुका है और वर्ष 2026–27 के लिए 386 करोड़ रुपये का प्रावधान प्रस्तावित है।

 

कामकाजी महिलाओं के लिए उज्जैन, धार, रायसेन, भिंड, सिंगरौली, देवास, नर्मदापुरम और झाबुआ जिलों में “सखी-निवास” निर्माणाधीन हैं मुख्यमंत्री उद्यमशक्ति योजना के अंतर्गत अब तक 41 हजार 767 स्वसहायता समूहों और 4 हजार 165 महिला उद्यमियों को लाभान्वित किया गया है।


मध्य प्रदेश की मोहन यादव सरकार ने बुधवार को अपना तीसरा बजट पेश किया। इस बजट में सरकार ने प्रदेश में शहरों के डेलवपमेंट को लेकर कई बड़े एलान किया है। बजट पेश करते हुए राज्य के वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा ने कहा कि राज्य सरकार अधोसंरचना, औद्योगिक निवेश, हरित विकास और सुरक्षा के अनुकूल वातावरण के कारण नगरीकरण की गति बढ़ रही है। इसी को ध्यान में रखते हुए मध्य प्रदेश सरकार नगरों के सुनियोजित और समेकित विकास के लिए सक्रिय कदम उठा रही है।


प्रदेश के बड़े शहरों को प्रदूषण मुक्त करने को लेकर बड़ा एलान 

प्रदेश के बड़े शहरों भोपाल और इंदौर में बहुप्रतीक्षित मेट्रो रेल का संचालन शुरू हो चुका है। प्रदूषण मुक्त यातायात के उद्देश्य से पी.एम. ई-बस सेवा के अंतर्गत कुल 972 इलेक्ट्रिक बसों की स्वीकृति दी गई है। वर्तमान में भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, जबलपुर, सागर और उज्जैन में 472 ई-बसें सेवा में हैं।


मध्य प्रदेश सरकार ने ई-वाहन नीति-2025 को लागू किया

वित्त मंत्री ने बजट के दौरान बताया कि हरित विकास को प्रोत्साहित करने के लिए मध्यप्रदेश ई-वाहन नीति-2025 को लागू किया गया है। साथ ही, भोपाल और इंदौर के लिए मेट्रोपॉलिटन रीजन डेव्हलपमेंट अथॉरिटी की अधिसूचना जारी कर दी गई है, जिससे मेट्रोपॉलिटन रीजन में निवेश और रोजगार के अवसर बढ़ेंगे।


इंटीग्रेटेड टाउनशिप नीति-2025 मप्र में लागू 

नगरीय और हरित विकास को ध्यान में रखते हुए इंटीग्रेटेड टाउनशिप नीति-2025 को भी लागू किया गया है। प्रदेश प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) में अग्रणी है। अब तक 8 लाख 77 हजार आवास बन चुके हैं और अगले 5 वर्षों में 10 लाख नए आवासों के निर्माण का लक्ष्य रखा गया है। शहरी पथ विक्रेताओं के लिए पी.एम. स्वनिधि योजना के तहत 1 लाख 79 हजार विक्रेताओं को 408 करोड़ रुपये का व्याज मुक्त ऋण प्रदान किया गया है।


'द्वारकानगर योजना' के लिए पैसे का एलान

 गरीय निकायों में वार्ड स्तर पर विकास को गति देने के लिए 'द्वारकानगर योजना' के अंतर्गत आगामी 3 वर्षों में 5 हजार करोड़ रुपये का निवेश प्रस्तावित है। इसके अंतर्गत: आवास हेतु: 2,316 करोड़ रुपये, नगरों की सड़क मरम्मत हेतु: 349 करोड़ रुपये, अमृत 2.0 के तहत: 3,467 करोड़ रुपये और नगरीय निकायों को मूलभूत सेवाओं हेतु एकमुश्त 1,057 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। 


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