यूजीसी से नाराज चल रहे लोगो ने केन्‍द्र एवं प्रदेश सरकार के खिलाफ नारे लगाने के साथ दिया ज्ञापन - Shivpuri


शिवपुरी - मंगलवार को शिवपुरी कलेक्ट्रेट पर लगे नारे: मोहन यादव जाएगा, जाकर भैंस चराएगा, मोदी तेरी तानाशाही नहीं चलेगी - नहीं चलेगी आदि नारो के साथ यूजीसी के खिलाफ सवर्ण समाज के लोगों ने रेली निकालकर कलेक्ट्रेट के गेट पर किया प्रदर्शन साथ ही शिवपुरी कलेक्‍टर को ज्ञापन सौंंपा।

इन पर कई मायनों में विचार किया जाना चाहिए, जैसे जेएनयू में अक्सर मोदी तेरी कब्र खोदेगी इंसा अल्लाह? तो कभी तिलक तराजू और तलवार पर ढपली गेंग तैयार रहती है? तो कभी योगी जी पर संसद में व्यंग्य कसा गया बाबा हो तो बाबा गिरी करो क्यों नेता बन गये आदि जिस पर योगी जी ने भारी संसद में रोये थे? तो सबका अपना अपना पूर्वजों द्वारा कार्य रहा है तो इस तरह से मलिनता सिद्ध करती है न राज शाही है न लोक शाही है, ये हिटलर शाही है।
ब्राह्मण भारत छोड़ो यूरेशिया जाओ? आखिर ये क्या माहौल बनाया जा रहा है या सांकेतिक सूक्ष्म रूप से पर्दे के पीछे से यह कराने का आयोजन है आज देश का दुश्मन, सवर्ण अचानक कैसे हो गया? और ये सवर्ण समाज को भी शोभा नहीं देता कि हम संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति के बारे में ऐसा नारा लगाए ये लड़ाई हक की है जिसको माननीय सुप्रीम कोर्ट ने अपनी निगरानी में ले रखा है।

कुछ तथ्य ये भी आये कि मध्यप्रदेश में यूजीसी के ताजा नियम को लागू करने का आदेश मिला है अब ये कितना सत्य है और ऐसा क्यों हुआ तो क्या मान लिया जाए अगर ऐसा हुआ है तो क्या प्रदेश सरकार भी सुप्रीम कोर्ट को चुनौती दे रही है या खुद ही सुप्रीम है?

शिवपुरी सहित देश भर में चल रहा यूजीसी का विरोध प्रदर्शन

मंगलवार को शिवपुरी के सवर्ण समाज ने हाथों में तख्तियाँ लेकर कलेक्ट्रेट के गेट पर विरोध प्रदर्शन करते हुए नारे भी लगाए। जिनमें मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव को वापस जाकर भैंस चराने का सुझाव दिया, तो वहीं देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को तानाशाही न करने की नसीहत दी।

ज्ञात रहे कि जब हमारा देश गुलाम था, तब अंग्रेजों की एक नीति बहुत चर्चित थी: फूट डालो-राज्य करो। अंग्रेजों से देश को आजाद हुए 78 साल हो गए, लेकिन उनकी नीति अभी भी काम कर रही है। बड़ा सवाल यह है कि इस नीति को पहले अंग्रेजों ने चलाकर देश पर राज्य किया, और अब हमारे देश के नेता भी अघोषित अंग्रेज बन कर देश को जातियों के बांटकर आपस में ही एक-दूसरें का दुश्मन बना दिया। जिन समाज के लोग कल तक प्रेम और भाईचारे के साथ रहते थे, वो आज एक-दूसरें को कमजोर और नीचा दिखाकर आपस में कटुता को बढ़ा रहे हैं। लोगों को भी अपने बच्चों का भविष्य नजर आ रहा है, जिसमें कई बड़ी परेशानियों का उन्हें सामना करना पड़ सकता है। यही वजह है कि वो इस कानून को वापस लेने के लिए विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं।

महत्वपूर्ण बात यह है कि इस तरह के विरोध प्रदर्शन में जुटे लोग उन मूल मुद्दों पर बात ही नहीं कर पा रहे, जिससे आमजन का जीना दुश्वार हो गया है महंगाई अपने सबसे अधिक सूचकांक पर है, बेरोजगारी ने युवाओं का भविष्य चौपट कर दिया है, तथा रुपया लगातार नीचे गिरने से देश की आर्थिक मंदी स्पष्ट नजर आ रही है। सेना में स्थाई भर्ती की जगह 4 साल के अग्निवीर बनाने के लिए भर्ती की उम्र कम करके हजारों युवाओं को ओवर एज कर दिया। देश में आज भी अंग्रेजों की नीति काम कर रही है।

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