दो ट्रेनें आने पर बढ़ जाता है हादसे का खतरा, महिलाएं, बुजुर्ग,बच्चे और मरीज होते हैं सबसे ज्यादा प्रभावित - Badarwas



बदरवास स्टेशन पर दूसरा प्लेटफॉर्म और फुट ओवर ब्रिज नहीं होने से पटरियां पार करने को मजबूर हैं यात्री 

बदरवास - बदरवास रेलवे स्टेशन पर दूसरा प्लेटफार्म और फुट ओवर ब्रिज न होने से यात्रियों की सुरक्षा भगवान भरोसे है। दो ट्रेनें एक साथ आ जाने से यात्रियों को बहुत परेशानी झेलकर खतरा उठते हुए रेलवे ट्रैक पार करना पड़ता है।सामाजिक संस्था रेलवे सुविधा संघर्ष समिति कई वर्षों से बदरवास रेलवे स्टेशन पर दूसरा प्लेटफार्म और फुट ओवर ब्रिज बनाने की मांग लगातार कर रही है फिर भी यात्री सुविधा से जुड़ी इस महत्वपूर्ण मांग को नजर अंदाज किया जा रहा है।

सामाजिक संस्था रेलवे सुविधा संघर्ष समिति के गोविन्द अवस्थी ने बताया कि रेलवे देशभर में यात्रियों की सुविधाओं को प्राथमिकता में लेकर चलता है लेकिन बदरवास रेलवे स्टेशन पर यात्रियों से जुड़ी सुविधाएं नहीं दी जा रही हैं।स्टेशन पर एक ही प्लेटफार्म होने से जब दो ट्रेन एक साथ आ जाती हैं तो दूसरी ट्रेन को मुख्य लाइन पर खड़ा कर दिया जाता है अधिक ऊंचाई से उतरना और ऊंचाई से ट्रेन में चढ़ना बड़ा खतरनाक हो जाता है।यात्रियों को गिट्टियों पर उतरकर ट्रेन में और ट्रेन से उतरकर प्लेटफार्म पर जाने में बहुत परेशानी आती है।एक तरफ जहां विभाग पैदल पटरी पार करना दंडनीय अपराध बताता है, वहीं बदरवास में यात्री दूसरी तरफ खड़ी ट्रेन में बिना पटरी पार करके जा ही नहीं सकते हैं। बदरवास स्टेशन पर यात्रियों के सामने विडंबना यह है कि दूसरे ट्रैक तक पहुंचने के लिए न फुट ओवरब्रिज है और न दूसरा प्लेटफॉर्म। ऐसे में यात्री नियम तोड़ने नहीं, बल्कि मजबूरी में पटरियां पार करने को विवश हैं। रात के समय यात्रियों को पटरियों को पार करने में और अधिक समस्या से जूझना पड़ता है। आए दिन यात्री दूसरा प्लेटफार्म और फुट ओवर ब्रिज न होने से परेशान हो रहे हैं।

 दो ट्रेनों की क्रॉसिंग होने पर आए दिन परेशान हो रहे यात्री 
बदरवास रेलवे स्टेशन पर आए दिन एक ही समय पर दो ट्रेनों के आने से क्रॉसिंग होती है।ऐसा ही मामला गत दिवस हुआ जब भोपाल-ग्वालियर इंटरसिटी एक्सप्रेस और भिंड-रतलाम एक्सप्रेस लगभग एक साथ स्टेशन पर पहुंच गईं। भोपाल इंटरसिटी को बिना प्लेटफार्म वाली लाइन पर खड़ा कर दिया गया। उसी समय भिंड–रतलाम एक्सप्रेस  के आने का समय हो गया जिसे प्लेटफॉर्म नंबर एक पर ले लिया गया।भोपाल इंटरसिटी ट्रेन तक पहुंचने और ट्रेन से प्लेटफार्म तक जाने में यात्रियों को ट्रेन से उतरकर गिट्टियों पर उतरना पड़ा और फिर रेलवे ट्रैक पार कर दूसरी ओर जाना पड़ा। रात के समय ट्रैक पार करना यात्रियों के लिए और भी अधिक खतरनाक साबित हो जाता है।

महिलाओं, बुजुर्गों और मरीजों को होती है सबसे ज्यादा परेशानी  

बदरवास स्टेशन पर दूसरा प्लेटफॉर्म नहीं होने के कारण यात्रियों को ऊंचे प्लेटफॉर्म से तथा ट्रेन से सीधे गिट्टियों पर उतरना पड़ता है। इसके बाद सामान लेकर पटरियां पार करनी पड़ती हैं। यह स्थिति सबसे अधिक महिलाओं, बुजुर्गों, दिव्यांगों, बच्चों और मरीजों के लिए परेशानी का कारण बन रही है।कई बार बुजुर्ग और महिलाएं गिट्टियों पर उतरते समय गिरते-गिरते बचते हैं। भारी सामान लेकर ट्रैक पार करना भी किसी चुनौती से कम नहीं है।
यात्रियों का सवाल है कि जब सुरक्षित रास्ता ही उपलब्ध नहीं है, तो रेलवे उनकी सुरक्षा की जिम्मेदारी कब निभाएगा। यात्रियों और रेलवे सुविधा संघर्ष समिति ने मांग की है कि बदरवास रेलवे स्टेशन पर दूसरा प्लेटफॉर्म और फुट ओवरब्रिज स्वीकृत कर निर्माण कार्य शुरू किया जाए, ताकि यात्रियों को सुरक्षित आवागमन की सुविधा मिल सके और भविष्य में किसी संभावित दुर्घटना से बचा जा सके।

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