अनूठी पहल: भगिनी धर्म से राष्ट्र धर्म निभाया छात्राओं ने, सरहद पर तैनात सैनिक भाइयों की कलाइयां सूनी न रहें, इसलिए छात्राओं ने भेजीं राखियां - Badarwas


शिक्षकों की प्रेरणा से कन्या हायर सेकंडरी स्कूल की छात्राओं ने हाथों से तैयार किए रक्षासूत्र

बदरवास -  रक्षाबंधन भाई-बहन के पवित्र प्रेम और विश्वास का पर्व है। इसी भावना को राष्ट्रप्रेम से जोड़ते हुए बदरवास के शासकीय कन्या हायर सेकंडरी स्कूल की छात्राओं ने शिक्षकों की प्रेरणा से देश की सीमाओं पर तैनात सैनिक भाइयों के लिए अपने हाथों से राखियां,रक्षासूत्र तैयार कर उन्हें भेजे हैं और उनकी कुशलता,सुरक्षा और प्रसन्नता की कामना की है। छात्राओं का उद्देश्य था कि रक्षाबंधन के अवसर पर जब देशभर में बहनें अपने भाइयों की कलाई पर राखी बांध रही हों, तब देश की सुरक्षा में घर-परिवार से दूर तैनात सैनिक भाइयों की कलाइयां भी सूनी न रहें।छात्राओं ने सैनिक भाइयों के प्रति स्नेह,सम्मान की भावना जगाते राष्ट्र धर्म निभाने की अनूठी पहल की है।इस कार्य से छात्राएं काफी प्रसन्न और प्रफुल्लित हैं। छात्राओं द्वारा फौजी भाइयों को भेजी जाने वाली इन रक्षासूत्र राखियों को विद्यालय प्रबंधन ने भारतीय सेना मुख्यालय को भेज दिया है जिससे समय से ये राखियां सीमा पर तैनात देश के पहरेदारों की कलाइयों पर सुशोभित हो सकें।

शिक्षक गोविन्द अवस्थी ने छात्राओं को भगिनी धर्म से राष्ट्र धर्म के लिए किया प्रेरित

कन्या हायर सेकंडरी स्कूल बदरवास के शिक्षक गोविन्द अवस्थी ने छात्राओं को सैनिक भाइयों के प्रति भगिनी धर्म निभाने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने छात्राओं से कहा कि देश की सीमाओं की रक्षा करने वाले जवान अपने परिवार से दूर रहकर राष्ट्र के प्रति अपना कर्तव्य निभाते हैं। ऐसे में आप जैसी बहनों द्वारा उनके लिए राखी भेजना सैनिकों के प्रति सम्मान, स्नेह और कृतज्ञता व्यक्त करने का भावपूर्ण माध्यम है। राष्ट्र रक्षा में रात दिन सरहद पर डटे फौजी भाई हमारे देश की अमूल्य पूंजी हैं और उनके सुरक्षित रहने की कामना के साथ देश के सभी बहिनों को रक्षासूत्र भेजकर राष्ट्रप्रेम और भ्रातृ प्रेम का अनुपम संदेश देना चाहिए। शिक्षक अवस्थी की इस प्रेरणा को छात्राओं ने उत्साहपूर्वक स्वीकार किया और छात्राओं ने अपने हाथों से आकर्षक राखियां और रक्षासूत्र तैयार किए। इस दौरान उनके मन में सैनिक भाइयों के प्रति सम्मान और आत्मीयता का भाव रहा।

छात्राओं का कहना था कि रक्षाबंधन केवल अपने परिवार के भाई-बहनों तक सीमित पर्व नहीं है। देश की रक्षा में तैनात सैनिक भी देश की बेटियों के भाई हैं। वे अपने परिवार से दूर रहकर देशवासियों की सुरक्षा का दायित्व निभाते हैं। इसलिए उनके लिए राखी भेजना उनके त्याग और समर्पण के प्रति सम्मान व्यक्त करने का छोटा-सा प्रयास है।छात्राओं द्वारा तैयार प्रत्येक रक्षासूत्र में बहन का स्नेह, सैनिकों के प्रति सम्मान और देश के प्रति कृतज्ञता का भाव जुड़ा रहा। 

छात्राओं ने कामना की कि ये राखियां जब सैनिक भाइयों तक पहुंचें तो उन्हें अपने घर-परिवार और बहनों का स्नेह महसूस हो। बदरवास के कन्या हायर सेकंडरी स्कूल की छात्राओं की यह अनोखी और राष्ट्र धर्म से जुड़ी पहल समाज में राष्ट्रप्रेम की सकारात्मक भावना को भी मजबूत करती है। शिक्षकों की प्रेरणा से छात्राओं ने यह संदेश दिया कि देश की सीमा पर तैनात जवान भले ही अपने घर से दूर हों, लेकिन देश की बहनों का स्नेह और सम्मान हमेशा उनके साथ है।छात्राओं ने रक्षाबंधन के पारंपरिक भाव को राष्ट्रीय संदर्भ से जोड़ दिया। 

विद्यालय के प्राचार्य चंद्रवीरसिंह सेंगर ने छात्राओं के इस कार्य के लिए उनकी सराहना करते हुए कहा कि सैनिकों के प्रति सम्मान और राष्ट्रभक्ति की भावना विद्यार्थियों के व्यक्तित्व निर्माण का महत्वपूर्ण हिस्सा है और उनकी संवेदनशीलता,संस्कार और राष्ट्रधर्म की भावना को दर्शाता है। शिक्षक कपिल परिहार ने कहा कि देश की सीमाओं पर तैनात सैनिक हमारे लिए सुरक्षा कवच हैं। उनके प्रति सम्मान व्यक्त करने के लिए उठाया गया हर छोटा कदम महत्वपूर्ण है। शिक्षक चंद्रभान श्रीवास्तव और ममता श्रीवास्तव ने छात्राओं से सदैव ही ऐसे राष्ट्रभक्ति और सामाजिक सद्भाव से जुड़े कार्यों में संलग्न होने के लिए प्रेरित किया।छात्राओं की इस पहल से निश्चित तौर पर फौजी भाई प्रफुल्लित होंगे। 

 इस अवसर पर बसंती मिंज,उदय सिंह,डॉ ममता यादव,विनीता कुशवाह,शशि गुप्ता,कनक कुशवाह,महेंद्र कुशवाह,हरवीर यादव,दलवीरसिंह, निर्मला शर्मा,रोहित चौरसिया,हितेन्द्र कुशवाह, शालिनी श्रीवास्तव,नावेद अली, बलराम परिहार सहित सैकड़ों छात्राएं उपस्थित रहीं।
 
ये बोले छात्राओं को प्रेरित करने वाले शिक्षक 

हमने छात्राओं को भगिनी धर्म से राष्ट्र धर्म को जोड़ने और देशभक्ति व राष्ट्र सेवा की भावना विकसित करने हेतु सीमा पर तैनात फौजी भाइयों को राखियां भेजने हेतु प्रेरित किया। फलस्वरूप छात्राओं ने आगे बढ़कर सैनिक भाइयों की कुशलता की कामना करते हुए स्नेहिल राखियां भेजकर उनके प्रति सम्मान और कृतज्ञता जताते हुए अपना भगिनी धर्म निभाने का काम किया। 


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