2010 से पहले नियुक्त शिक्षकों को टीईटी से मुक्त करने की मांग, शिक्षक संयुक्त मोर्चा ने सिंधिया को सौंपा ज्ञापन - Badarwas

 

बदरवास - वर्ष 2010 से पहले तत्कालीन प्रचलित नियमों के तहत नियुक्त किए गए शिक्षकों को शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) की अनिवार्यता से मुक्त करने की मांग को लेकर शिक्षक संयुक्त मोर्चा ने केंद्रीय संचार एवं पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया को बदरवास में ज्ञापन सौंपकर शिक्षकों की सेवा सुरक्षा से जुड़े इस महत्वपूर्ण मुद्दे पर हस्तक्षेप की मांग की है।


विधानसभा का विशेष सत्र बुलाने की मांग


सिंधिया के गत दिवस बदरवास आगमन के दौरान प्रांतीय शिक्षक संघ के प्रदेश वरिष्ठ उपाध्यक्ष गोविन्द अवस्थी के नेतृत्व में यह ज्ञापन सौंपा गया।


ज्ञापन में कहा गया है कि आरटीई एक्ट वर्ष 2010 में लागू हुआ, जबकि इससे पूर्व नियुक्त शिक्षकों की नियुक्तियां उस समय लागू नियमों एवं निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार हुई थीं नियुक्ति के समय टीईटी अनिवार्य योग्यता नहीं थी ऐसे में वर्षों की सेवा के बाद इन शिक्षकों पर टीईटी की अनिवार्यता लागू होने से उनके बीच असुरक्षा और भविष्य को लेकर चिंता का माहौल है।


अवस्थी ने बताया कि वर्ष 2010 से पूर्व नियुक्त अनेक शिक्षक 15 से 20 वर्ष से अधिक समय से पूरी निष्ठा, समर्पण और जिम्मेदारी के साथ शिक्षा व्यवस्था में सेवाएं दे रहे हैं। इन शिक्षकों ने विद्यार्थियों के भविष्य निर्माण के साथ ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों में शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

ज्ञापन में तमिलनाडु की तर्ज पर मध्यप्रदेश में भी वर्ष 2010 से पूर्व नियुक्त शिक्षकों को टीईटी की अनिवार्यता से राहत देने की मांग की गई। साथ ही इस विषय पर मध्यप्रदेश विधानसभा का विशेष सत्र बुलाकर आवश्यक विधायी अथवा नीतिगत निर्णय लेने का आग्रह किया गया।

शिक्षक संयुक्त मोर्चा ने कहा कि यह मामला केवल परीक्षा से जुड़ा नहीं, बल्कि हजारों शिक्षकों की सेवा सुरक्षा, सम्मान और भविष्य से संबंधित है। शिक्षक संयुक्त मोर्चा ने केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया से मांग की है कि वह प्रदेश और केंद्र सरकार से इस मामले में संवेदनशील एवं न्यायपूर्ण दृष्टिकोण अपनाते हुए शीघ्र सकारात्मक निर्णय लेने में मदद करने की अपेक्षा जताई है ज्ञापन सौंपने वालों में कुलदीप ग्वाल, कपिल परिहार सहित अन्य शिक्षक सम्मिलित रहे।

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