उर्वरक एवं बीज दुकानों पर अनियमितताएं मिलने पर एक दुकान सील और दो को थमाया नोटिस - Shivpuri

कलेक्टर वर्मा के निर्देश पर उप संचालक कृषि और कोलारस अमले द्वारा लुकवासा क्षेत्र में की गई औचक निरीक्षण कार्रवाई

शिवपुरी - कलेक्टर एवं जिला मजिस्ट्रेट अर्पित वर्मा के निर्देशानुसार रबी मौसम को दृष्टिगत रखते हुए उर्वरक एवं बीज प्रतिष्ठानों की निगरानी और जांच के लिए कृषि विभाग द्वारा लगातार सख्त कदम उठाए जा रहे हैं। इसी क्रम में आज गुरूवार को उप संचालक कृषि मुनेश कुमार शाक्य एवं वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी विकासखंड कोलारस के संयुक्त दल द्वारा लुकवासा क्षेत्र में कीटनाशक एवं खाद बीज दुकानों का औचक निरीक्षण किया गया। निरीक्षण के दौरान गंभीर अनियमितताएं पाए जाने पर कृषि विभाग द्वारा एक प्रतिष्ठान को सील कर दिया गया है तथा दो अन्य प्रतिष्ठानों को कारण बताओ सूचना पत्र जारी किए गए हैं।

निरीक्षण दल द्वारा लुकवासा और आसपास के क्षेत्र में आदान विक्रेताओं के प्रतिष्ठानों की भौतिक जांच की गई। इस दौरान प्रोप्राइटर श्रीराम रघुवंशी, विकासखंड लुकवासा के प्रतिष्ठान मैसर्स श्रीराम कृषि सेवा केंद्र पर स्टॉक एवं दस्तावेजों में अनियमितताएं पाए जाने पर तत्काल प्रभाव से उक्त प्रतिष्ठान को सील कर दिया गया है। इसके अतिरिक्त मैसर्स महाराज कृषि सेवा केंद्र (प्रो. आशीष शर्मा) और मैसर्स विवेक बीज भंडार (लुकवासा) के प्रतिष्ठानों पर भी अनियमितताएं मिलने पर उप संचालक कृषि द्वारा संबंधितों को कारण बताओ सूचना पत्र जारी किए गए हैं।

वर्ष 2026-27 के रबी मौसम को ध्यान में रखते हुए विभाग द्वारा उर्वरक एवं बीज की उपलब्धता और वितरण व्यवस्था पर कड़ी नजर रखी जा रही है। वर्तमान में किसानों द्वारा रबी सीजन के लिए उर्वरकों का उठाव किया जा रहा है। कृषि विभाग ने जिले के किसानों को सलाह दी है कि रबी फसलों की बोनी के समय डीएपी के स्थान पर वैकल्पिक उर्वरक एनपीके का उपयोग करें। चूंकि डीएपी से केवल नत्रजन एवं फास्फोरस मिलता है, वहीं एनपीके मिश्रित उर्वरक (जैसे ग्रेड 12ः32ः16, 16ः16ः16, 20ः20ः0ः13, 10ः26ः26, 14ः35ः14 आदि) के उपयोग से फसलों को नत्रजन, फास्फोरस, पोटाश एवं सल्फर जैसे सभी मुख्य पोषक तत्वों की आपूर्ति होती है। इससे फसलों की बेहतर पैदावार, गुणवत्तापूर्ण उपज, उत्पादकता में वृद्धि और मृदा स्वास्थ्य बेहतर होता है।

कृषि विभाग द्वारा किसानों से यह भी अपील की गई है कि वे रबी मौसम में सिंचाई जल की सीमित उपलब्धता को देखते हुए कम पानी एवं रक्षक/सुरक्षात्मक सिंचाई वाली पद्धतियों को अपनाएं। किसानों को कम अवधि वाली फसलों तथा स्थानीय परिस्थितियों के अनुकूल किस्मों (जैसे चना, मसूर, सरसों और अलसी आदि) की बुवाई करने की सलाह दी गई है। इस संबंध में विस्तृत मार्गदर्शन के लिए किसान भाई विभागीय मैदानी अमले या कृषि विज्ञान केंद्र से संपर्क कर सकते हैं।

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