पहली घटना: अंजलि और उसके बेटे की मौत, बड़ी बेटी की सूझबूझ से बचीं तीन मासूम बहनें
बैराड़ थाना क्षेत्र के गूंगरगांव में बुधवार दोपहर को 35 वर्षीय अंजलि (जो आठ महीने की गर्भवती थी) ने अपने छह साल के बेटे प्रशांत के साथ एक कुएं में छलांग लगा दी। करीब डेढ़ महीने पहले ही अंजलि के पति धर्मवीर सिंह रावत की एक सड़क हादसे में मौत हो गई थी। पति के अचानक दुनिया से चले जाने के बाद से ही अंजलि गहरे मानसिक तनाव और सदमे में थी, जिसके चलते उसने यह खौफनाक कदम उठाया।
इस दर्दनाक हादसे के वक्त अंजलि के साथ उसकी तीन अन्य बेटियां भी थीं। जब अंजलि ने बेटे के साथ कुएं में छलांग लगाई, तो उसकी सबसे बड़ी बेटी 10 वर्षीय मोनिका ने गजब की सूझबूझ और समझदारी का परिचय देते हुए खुद को और अपनी दोनों छोटी बहनों को सुरक्षित बचा लिया। इसके बाद डरी-सहमी मोनिका ने घर दौड़कर तुरंत परिजनों को घटना की जानकारी दी।
सूचना मिलते ही परिजन दौड़े-दौड़े खेत और कुएं के पास पहुंचे और अंजलि व उसके बेटे प्रशांत को बाहर निकाला, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी और दोनों की सांसें थम चुकी थीं। अंजलि और उसके गर्भ में पल रहे आठ महीने के मासूम बच्चे की भी मौत हो गई। पुलिस ने मां-बेटे के शवों को कब्जे में लेकर शिवपुरी जिला अस्पताल की मॉर्च्युरी में रखवाया, जहाँ गुरुवार को मेडिकल पैनल की देखरेख में पोस्टमार्टम कराया गया।
दूसरी घटना: कोलारस के सेसई सड़क में छोटी बहन की मौत का सदमा सहन न कर सकी बड़ी बहन सीता, तीन बच्चों के साथ दी जान
जिले के कोलारस पुलिस थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले ग्राम सेसई सड़क में अभी इस हादसे का दुख थमा भी नहीं था कि कुछ ही घंटों के भीतर परिवार पर एक और बड़ा पहाड़ टूट पड़ा। अंजलि की सगी बड़ी बहन 40 वर्षीय सीता रावत (जो कोलारस थाना क्षेत्र के सेसोई गांव की रहने वाली थीं) अपनी छोटी बहन की मौत का सदमा बर्दाश्त नहीं कर पाईं। दोनों बहनों के बीच आपसी लगाव और प्यार इतना गहरा था कि सीता अपनी बहन की मौत के गम में अंदर से पूरी तरह टूट चुकी थीं।
बुधवार शाम को सीता अपने तीन बच्चों—राखी (14), प्रियंका (11) और श्लोक (6)—के साथ खोंकर गांव स्थित खेत पर गईं थीं। काफी देर शाम तक (करीब छह बजे तक) जब सीता और उनके बच्चे वापस नहीं लौटे, तो परिजनों ने तलाश शुरू की। खेत की तरफ पहुंचने पर उन्हें कुएं के पास चप्पलों के जोड़े दिखाई दिए। जब उन्होंने कुएं के अंदर झांककर देखा, तो एक बच्चे का शव पानी में तैरता हुआ नजर आया और तुरंत स्थानीय पुलिस को सूचना दी गई।
रात 11 बजे तक निकाले गए चारों शव
सूचना मिलते ही कोलारस थाना पुलिस मौके पर पहुँची और राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया। कड़ी मशक्कत के बाद बुधवार रात करीब 11 बजे तक सीता और उसके तीनों बच्चों के शव कुएं से बाहर निकाल लिए गए। सीता के जेठ हाकम सिंह का कहना है कि दोनों बहनों में बहुत गहरी बॉन्डिंग थी और वे अक्सर फोन पर लंबी बातें किया करती थीं। फिलहाल पुलिस दोनों ही मामलों को लेकर अलग-अलग एंगल से गहराई से जांच-पड़ताल कर रही है ताकि मौत की असल वजहों से पूरी तरह पर्दा उठाया जा सके।
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