बांग्लादेशी घुसपैठिया मामला: STF जांच में खुलासा— सिर्फ 96 घंटे में बने थे फर्जी दस्तावेज, मुख्य षड्यंत्रकारी गिरफ्तार



बांग्लादेशी नागरिकों को अवैध रूप से भारतीय नागरिकता और पासपोर्ट दिलाने वाले बड़े फर्जीवाड़े में स्पेशल टास्क फोर्स (STF) की जांच में कई चौकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। इस संगठित गिरोह के मुख्य षड्यंत्रकारी सम्यक बोधि भंते उर्फ गुलाबराय गौतम को गिरफ्तार कर लिया गया है, जो गिरोह के सरगना रियाल चौधरी से दान के रूप में कमीशन वसूलता था। जांच के अनुसार, आरोपी ने अपने प्रभाव का दुरुपयोग कर डबरा क्षेत्र में अवैध रूप से प्रवेश करने वाले छह घुसपैठियों के लिए दस्तावेज तैयार करवाए थे।

मात्र 96 घंटे के भीतर जारी हुए प्रमाण-पत्र

STF की जांच में यह बात प्रमुखता से सामने आई है कि प्रशासनिक सुस्ती और मिलीभगत के चलते केवल 96 घंटों के भीतर विदेशी नागरिकों के नाम पर आधार, मूल निवासी और जन्म प्रमाण-पत्र जैसे महत्वपूर्ण दस्तावेज धड़ल्ले से जारी कर दिए गए। गिरोह ने इस पूरी साजिश को अंजाम देने के लिए कोरोना काल और लॉकडाउन की अवधि को चुना था, ताकि प्रशासनिक निगरानी कम रहे।

बौद्ध विहार का इस्तेमाल और गवाही का खेल

गिरफ्तार आरोपी सम्यक बोधि भंते करीब पांच साल तक आंबेडकर पार्क स्थित बौद्ध विहार का प्रमुख रहा है। इसी दौरान रियाल चौधरी अपने साथियों के साथ वहां पहुंचा था। स्थानीय निवासियों के अनुसार, बौद्ध विहार में अज्ञात लोग आकर रुकते थे, जिनकी भाषा ग्रामीण समझ नहीं पाते थे और प्रशासन के पास उनकी कोई जानकारी नहीं थी।

जांच में खुलासा हुआ है कि आरोपी और उसके शिष्य गयाप्रसाद ने प्रशासन को लिखित गवाही दी थी कि ये सभी छह लोग स्थानीय निवासी हैं। इसी झूठी गवाही के आधार पर प्रशासन ने बिना किसी जमीनी जांच-पड़ताल के दस्तावेज जारी कर दिए।

बैंक खातों और संपर्कों की गहन छानबीन जारी

फर्जीवाड़ा उजागर होने के बाद लगभग 70 बांग्लादेशी नागरिकों के पासपोर्ट बनने की बात सामने आ चुकी है। गिरफ्तारी के बाद आरोपी अब सारा दोष सरगना रियाल चौधरी पर मढ़ रहा है, लेकिन STF उसकी भूमिका को पुख्ता करने के लिए उसके बैंक खातों, वित्तीय लेन-देन और अन्य संदिग्ध संपर्कों की गहराई से जांच कर रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि इस अवैध नेटवर्क में और कौन-कौन लोग शामिल हैं।


बांग्लादेशी नागरिकों को अवैध रूप से भारतीय नागरिकता और पासपोर्ट दिलाने वाले बड़े फर्जीवाड़े में स्पेशल टास्क फोर्स (STF) ने एक और बड़ा खुलासा किया है। इस संगठित गिरोह के मुख्य षड्यंत्रकारी सम्यक बोधि भंते उर्फ गुलाबराय गौतम को गिरफ्तार किया गया है, जो गिरोह के सरगना रियाल चौधरी से दान के रूप में कमीशन वसूलता था। जांच में सामने आया है कि आरोपी ने अपने प्रभाव का दुरुपयोग कर डबरा क्षेत्र से अवैध रूप से प्रवेश करने वाले छह घुसपैठियों के लिए फर्जी दस्तावेज तैयार करवाए थे।


कोरोना काल और लॉकडाउन का उठाया फायदा

विशेष कार्य बल (STF) की जांच के अनुसार, यह पूरा षड्यंत्र कोरोना काल और लॉकडाउन के दौरान रचा गया था। मास्टरमाइंड रियाल चौधरी ने इस अवैध धंधे के लिए लॉकडाउन की अवधि को चुना, ताकि प्रशासनिक सुस्ती का फायदा उठाया जा सके। इस दौरान केवल 96 घंटों के भीतर विदेशी नागरिकों को भारतीय नागरिकता से जुड़े महत्वपूर्ण और गोपनीय दस्तावेज जारी करवा दिए गए।


बौद्ध विहार का इस्तेमाल कर रची गई साजिश

गिरफ्तार आरोपी सम्यक बोधि भंते करीब पांच साल तक आंबेडकर पार्क स्थित बौद्ध विहार का प्रमुख रहा है। इसी दौरान रियाल चौधरी अपने साथियों के साथ वहां पहुंचा था। स्थानीय निवासियों के अनुसार, कुछ समय पहले बौद्ध विहार में अनजान लोग आकर रुके थे, जिनकी भाषा ग्रामीण समझ नहीं पाते थे और प्रशासन के पास भी इनकी कोई जानकारी नहीं थी।


आरोपी सम्यक बोधि भंते और उसके शिष्य गयाप्रसाद ने प्रशासन को लिखित गवाही दी थी कि ये सभी लोग स्थानीय निवासी हैं। इसके आधार पर प्रशासन ने बिना किसी ठोस जांच-पड़ताल के आधार कार्ड, मूल निवासी प्रमाण-पत्र और जन्म प्रमाण-पत्र जारी कर दिए। हालांकि, अब गिरफ्तारी के बाद आरोपी सारा ठीकरा सरगना रियाल चौधरी पर मढ़ रहा है, जबकि STF उसकी संपत्तियों और बैंक खातों की गहन जांच कर रही है। इस बड़े फर्जीवाड़े के उजागर होने के बाद लगभग 70 बांग्लादेशी नागरिकों के पासपोर्ट बनने की बात सामने आ रही है।


पासपोर्ट व्यवस्था को किया गया सख्त

इस हाई-प्रोफाइल फर्जीवाड़े के सामने आने के बाद विदेश मंत्रालय ने सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक कड़ा कर दिया है। विदेश मंत्रालय के सहायक अधीक्षक कमल पाल के अनुसार, पासपोर्ट सेवा केंद्रों पर कर्मचारियों की निगरानी बढ़ा दी गई है। 


अब नए नियमों के तहत:-

  • कर्मचारियों को बायोमीट्रिक उपस्थिति दर्ज करने के बाद ही पोर्टल पर लॉगिन की अनुमति मिलेगी।

  • यदि पोर्टल पर तीन मिनट तक कोई गतिविधि नहीं होती है, तो प्रणाली स्वचालित (ऑटोमैटिक) रूप से बंद हो जाएगी।

  • अब प्रत्येक आवेदन की जांच तीन बार की जाएगी और चौथी बार जांच कराने के लिए अतिरिक्त शुल्क देना होगा।

  • सत्यापन प्रक्रिया को तेज और पारदर्शी बनाने के लिए प्रणाली में विशेष अधिकारियों और संबंधित थाना प्रभारियों के आधिकारिक संपर्क नंबर भी दर्ज कर दिए गए हैं।

फिलहाल सुरक्षा एजेंसियां इस गिरोह से जुड़े अन्य संदिग्धों और स्थानीय मददगारों की शिनाख्त करने में जुटी हैं।

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