विधानसभा चुनाव जीतकर मंत्री बनने की इच्छा रखते हैं,सांसद

नई दिल्ली- बीजेपी प्रदेश में चौथी बार सरकार बनाती है या नहीं यह तो भविष्य बतायेगा, लेकिन सरकार बनी तो मंत्रिमंडल का स्वरुप कैसा होगा सियासी गलियारों में इस बात की चर्चा अभी से जोर पकड़ने लगी है और सभी नेताओं की महत्वाकांक्षाएं सामने आने लगी हैं। प्रदेश के आधा दर्जन से ज्यादा भाजपा सांसद इस बार विधानसभा का चुनाव लड़ना चाहते हैं। दरअसल, इन सभी सांसदों को केंद्र की राजनीति में शायद वो जगह नहीं मिल सकी जिसकी उम्मीद ये रखते हैं, यही वजह है कि ये सभी विधानसभा चुनाव लड़कर प्रदेश की राजनीति में अपना रसूख कायम रखना चाहते हैं. ऐसा इसलिये भी कि बीजेपी ने इस तरह के उदाहरण भी पेश किये हैं। 2013 के विधानसभा चुनाव में पार्टी ने तीन सांसदों को विधानसभा का टिकट दिया था. चुनाव के बाद इनमें से भूपेंद्र सिंह और यशोधरा राजे सिंधिया को मंत्री बनाया गया थाअबकी चुनावों में पार्टी के पूर्व प्रदेशाध्यक्ष नंदकुमार सिंह चौहान, मुरैना सांसद अनूप मिश्रा, मनोहर लाल उंटवाल, प्रहलाद पटेल जैसे नेता विधानसभा चुनाव में भाग्य आजमाना चाहते है। इसी प्रकार पार्टी प्रदेशाध्यक्ष राकेश सिंह और मंडला सांसद फग्गन सिंह कुलस्ते को भी विधानसभा का टिकट दे सकती है। पार्टी इनके नामों को चुनावों में भुनाना चाहती है और मौजूद मुख्यमंत्री का विकल्प इन दोनों के चेहरों में देख रही है।संभवतः इन सभी सांसदों को लगता है कि दिल्ली जाने की वजह से इनका राज्य की राजनीति में प्रभाव कम होता जा रहा है. दूसरी वजह यह भी है कि लोकसभा चुनाव इन सभी सांसदों ने आराम से जीता था, लेकिन अब परिस्थितियां बदली नजर आ रही हैं. ऐसे में यह सभी सांसद लोकसभा के बजाय विधानसभा चुनाव लड़ना ज्यादा मुनासिब समझ रहे हैं. गौरतलब है कि प्रदेश में इनका नाम भी बड़ा है। जबकि अगर सरकार बनती है तो यह मंत्री पद की दावेदारी भी कर सकते हैं। 

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