मुंबई- बात जब एक्टिंग जगत के राम की आती है तो सबसे पहले जहन में अरुण गोविल का नाम आता है। रामानंद सागर की 'रामायण' में राम का रोल प्ले कर फेमस हुए अरुण गोविल(60) इन दिनों एक्टिंग से दूर हैं। आखिरी बार उन्हें भोजपुरी फिल्म 'बाबुल प्यारे' में देखा गया है। 12 जनवरी 1960 को मेरठ में जन्मे अरुण ने इंडियन एक्ट्रेस श्रीलेखा से शादी की। दोनों के 2 बच्चे एक बेटा अमल गोविल और बेटी सोनिका गोविल भी हैं। अमर की शादी हो चुकी हैं वहीं सोनिका पढ़ाई पूरी कर जॉब कर रही हैं।
यहां जॉब कर रही हैं सोनिका - सोनिका 2016 से मुंबई में 'माइंड शेयर' कंपनी में बतौर प्लानिंग एग्जीक्यूटिव जॉब कर रही हैं। - इससे पहले वे 'GroupM', 'Maxus' जैसी कंपनी में जॉब कर चुकी हैं। साथ ही वे पहले पार्ट टाइम असिस्टेंट मी़डिया मार्केटिंग मैनेजर की जॉब भी कर चुकी हैं। - वहीं बात अगर उनकी एजुकेशन की करें तो उन्होंने 'University of Westminster' से मार्केटिंग कम्युनिकेशन में अपनी पोस्ट ग्रैजुएशन की डिग्री पूरी की है। - बता दें, सोनिका ट्विटर काफी एक्टिव हैं वे अक्सर अपनी एक्टिविटीज यहां शेयर करती हैं।
सेट पर आशीर्वाद लेने पहुंच जाते थे लोग अरुण राम के रोल से इतने फेमस हो गए थे कि कई बाल लोग शूटिंग के दौरान उनसे आशीर्वाद लेने सेट पर ही पहुंच जाते थे। ये बात खुद उन्होंने अपने एक इंटरव्यू में बताई थी। यही नहीं लोग टीवी पर शो शुरू होते ही फूलों की माला चढ़ाते थे। अगरबत्ती और धूपबत्ती लगाकर हाथ जोड़ बैठ जाते थे। उन्हें रामायण के बाद कभी कोई अच्छा काम ही नहीं मिला। लोगों ने राम से ज्यादा कुछ भी सोचने से इनकार कर दिया। इसी का परिणाम हुआ कि उनकी एक्टिंग का करियर ही खत्म हो गया। अब वे न तो टीवी पर और न ही फिल्म में नजर आते हैं। हालांकि कभी-कभी प्रोडक्शन का काम करते हैं। दरअसल उन्होंने 'रामायण' में लक्ष्मण का रोल करने वाले सुनील लाहिड़ी के साथ मिलकर अपनी प्रोडक्शन कंपनी शुरू की। जो दूरदर्शन चैनल के लिए कार्यक्रम बनाती है।
बिजनेसमैन भाई के पास काम सीखने आए थे अरुण स्कूल के दिनों में अरुण कई नाटकों में पार्टिसिपेट करते थे। लेकिन उन्होंने कभी एक्टर बनने का नहीं सोचा था। बात जब करियर की आई तो वे शात मेरठ से मुंबई अपने बिजनेसमैन भाई के साथ कुछ काम सीखने आए थे। 1977 में वो पहला मौका आया जब उन्होंने फिल्म 'पहेली' से अपना एक्टिंग करियर शुरू किया। इसी के बाद उनकी मुलाकात रामानंद सागर से हुई और उन्होंने 'विक्रम और बेताल' शो में उन्हें राजा विक्रमादित्य का रोल दिया। जब रामानंद सागर ने रामायण बनाने का विचार किया तो उन्होंने सबसे पहले अरुण का चेहरा याद आया। इसी वजह से अरुण को शो में राम बनने का मौका मिला। हालांकि इससे लिए कैरेक्टर के लिए उन्हें काफी मेहनत करनी पड़ी। इस शो के लिए उन्होंने स्मोकिंग भी छोड़ी थी और इस किरदार को जीना शुरू कर दिया था।