ट्रॉली पर सवार होकर दुल्हन लेने पहुंचा दूल्हा

ट्रॉली पर पहुंचा दुल्हा (सांकेतिक फोटो)बाढ़ से जूझ रहे अमीरनगर गांव में मुस्लिम समाज की बारात आई तो गांव के बाहर बाढ़ में फंस गई। गांव के हिन्दू समाज के लोगों ने आनन-फानन में बारात को बाढ़ से पार लगाने अपने ट्रैक्टर-ट्रॉली भेज दीं। क्योलड़िया निवासी अतीक अहमद का निकाह अमीरनगर के रईसुद्दीन की बेटी रिजवाना से तय हुआ था। मंगलवार को बारात गाड़ियों में सवार होकर अमीरनगर जा रही थी। गांव को देवहा नदी की धार से चारों ओर से घिरा देखा तो बारातियों के होश उड़ गए। बाराती पीलीभीत की ओर से घूमकर आए, गांव से करीब पांच किलोमीटर दूर गाजीपुर में अपने वाहन खड़े किए और किसी तरह गांव तक पहुंचे मगर बात नहीं बनी। बारातियों और गांव के बीच नदी की तेज धार थी। पूरा गांव ही नदी ने चारों ओर से घेर रखा था। मायूस बाराती वापस ही लौटने वाले थे इसी बीच गांव के हिन्दू समाज में बारातियों की मुश्किल का पता चला तो रामसेवक और हरेंद्र कुमार अपने ट्रैक्टर और ट्रॉली लेकर आ गए। उनके सथ तमाम अन्य ग्रामीण भी सहायता को आए और सभी बारातियों को ट्रॉली पर बिठाकर पहले गांव लाए और निकाह के बाद उनकी खातिरदारी के बाद खुशी-खुशी दूल्हा-दुल्हन समेत बारात को फिर से बाढ़ से निकालकर सुरक्षित उनके वाहनों तक पहुंचाया। एक ओर जहां खजुरिया-उमरिया में दो पक्ष एक दूसरे के दुश्मन बने पड़े हैं तो दूसरी ओर अमीरनगर गांव के लोग कहते हैं कि बेटी चाहे हिन्दू की हो या मुसलमान की, वह पूरे गांव की ही बेटी होती है। बारात में आए बाराती भी इस तरह से पूरे गांव के मेहमान हुए। ऐसा सौहार्द और एकता का परिचय जो अमीरनगर ने दिया है वह पूरे समाज के लिए प्रेरणादायी है। रामसेवक, हरेंद्र कुमार और रईसुद्दीन समेत तमाम हिन्दू-मुस्लिम समाज के लोगों का कहना है कि भले ही उनके धर्म अलग हैं, पूजा पद्धतियां अलग हैं मगर वे एक-दूसरे के सुख-दुख में साथ देते हैं। तमाम जगहों से धार्मिक उन्माद की खबरें आती हैं तो उन्हें धक्का लगता है। काश अमीरनगर से पूरा समाज कुछ सीख ले सके।

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