गोवर्धन पूजा का अर्थ है सभी मनुष्य गौ सेवा करे ..बृजभूषण


राहुल शर्मा लुकवासा- कोलारस- प्रत्येक मनुष्य को गौ माता की सेवा अवश्य करना चाहिए क्योंकि गौमाता परमात्मा के द्वारा दिया गया एक अनुपम वरदान है जिसके द्वारा मनुष्य अपने जीवन को सुखमय बना सकता है  गौ मां का गोबर मनुष्य के अनेकों रोगों को मिटा सकता है गोमूत्र लाखों विकारो को मिटा सकता है एवं गौ माता की सेवा स्वर्ग एवं मुक्ति को देने वाली है हमारे ग्रंथों में आता है एक गौमाता की पूंछ पकडक़र ही हमारे पितर बैतरणी नदी को पार करते हैं और जब हमारा अंत समय आता है तो हम भी गौ दान करके हमारे जीवन को सुधारते हैं गौमाता का महत्व हमारे जीवन में इतना है कि जितना गुण गाया जाए उतना ही कम है यह प्रवचन लुकवासा के समीप ग्राम आनंदपुर में चल रही भागवत कथा के दौरान ? नम: शिवाय मिशन के आचार्य बृज भूषण महाराज ने गोवर्धन पूजा के दौरान दिए और उन्होंने बताया कि भगवान श्री कृष्ण ने गोवर्धन की पूजा कराई उन्होंने गौ माता को बढ़ाने का संदेश दिया गो का मतलब है गौ माता वर्धन यानी कि बडाना भगवान ने बताया कि सभी गौ माता की रक्षा करें आचार्य जी ने भगवान श्री कृष्ण की बाल लीलाओं का बहुत ही सुंदर चरित्र सुनाया और कहा कि भगवान भक्तों के बस में हो कर के प्रकट होते हैं और बाल लीला करके अपने भक्तों को आनंद प्रदान करते हैं आचार्य ने बताया कि भगवान रक्षा के लिए भी अवतार लेते हैं और इसलिए श्री कृष्ण ने कभी भी गौ माता का त्याग नहीं किया और अपना नाम भी उन्होंने गोपाल रखवा लिया इसलिए सभी मनुष्य का कर्तव्य की गौ की सेवा करें एवं अपने जीवन का कल्याण करें गौ माता परमात्मा का दिया हुआ वरदान है शास्त्रों में आता है गंगा सबके पाप दूर करती है परंतु गंगा के पाप कौन धोता है हमारे पुराणों में आता है कि माता के चरणों में इतनी शक्ति है कि जब गौ माता के चरण गंगा मां के भीतर जाते हैं तो गौ माता गंगा मां के पापो को धो  देती है यजमान द्वारा भगवान गोवर्धन को छप्पन भोग लगाए गए एवं कथा में पधारे भक्तों ने  प्रसाद पाया 
मनुष्य को शिक्षा देने के लिए भगवान आते हैं :बृजभूषण
 ग्राम अनांदपुर में चल रही श्रीमत भागवत कथा
बदरवास बदरवास जब जब मनुष्य अपने धर्म से पतित हो जाता है एवं मन माना आचरण करने लगता है और धर्म का त्याग करके अधर्म के रास्ते पर चलने लगता है तो भगवान मनुष्य को सही रास्ते पर लाने के लिए एवं धर्म कर्म का ज्ञान देने के लिए आते हैं और जो मनुष्य शास्त्रों का त्याग करके पुराणो का त्याग करके एवं अपने मानव धर्म को भूल कर के राक्षसों जैसा आचरण करने लगता है तो परमात्मा को नाना रूपों में आकर के उसको सत मार्ग पर लाते हैं और दुष्टों का नाश करते हैं यह प्रवचन लुकवासा के समीप ग्राम आनंदपुर में चल रही भागवत कथा मै कृष्ण जन्म उत्सव के दौरान ओम नम: मिशन शिवपुरी के आचार्य बृजभूषण महाराज ने कहे और उन्होंने बताया कि मनुष्य को अपने जीवन में सदैव प्रसन्न रहना चाहिए कि जो मनुष्य अपने जीवन में प्रसन्न रहता है वही अपने जीवन का आनंद ले सकता है जो मनुष्य  चिंता में डूबे हैं अन्य आशाओं में जी रहे हैं ऐसे मनुष्य का जीवन व्यर्थ ही चला जाता है और एक कामना की पूर्ति हो नहीं पाती तब तक दूसरी रखने लग जाते है इस प्रकार मनुष्य की इच्छा पूर्ति कभी नहीं हो सकती और उसका जीवन कभी सुखी नहीं हो सकता है तो व्यक्ति को भगवान की शरण में आए भागवत गीता जी सुने राम कथा सुने एवं सत्संग करके अपने जीवन को आनंदमय बनाएं भगवान का एक ही उद्देश्य है सदा प्रसन्न रहें और सब को प्रसन्न रखें इस कथा का आयोजन  27 अप्रैल तक रहेगा


एक टिप्पणी भेजें

और नया पुराने

संपर्क फ़ॉर्म