जन कल्याणकारी योजनाओ के लाभ से बंछित हे आदिवासी, सरकार की योजनाओ को पाने के लिए आज भी भटक रहे है आदिवासी

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दीपक बत्स कोलारस-सरकार जहां आदिवासियो के वोट पाने केे लिए हर संभव कोशिश करती है और सरकार चाहे किसी भी पार्टी की बने वह आदिवासियो पर अधिक जोर देती है कोलारस अनुविभाग के अंतर्गत आने बाले अधिकांश आदिवासी वाहुल गांवो में आदिवासियो की दशा आज भी बंदहाल स्थिति में है केन्द्र से लेकर प्रदेश सरकार जहां आदिवासियो के लिए जन कल्याणकारी योजनाओ को संचालित कर रहे है परन्तु शासन के कर्मचारियो की मनमानी के चलते आदिवासियो को लाभ नही मिल पा रहा है इस समय प्रदेश में कांग्रेस की सरकार है और चुनाव के समय पार्टी द्वारा और अधिक योजनायें बना कर लाभ देने की बात कही थी परन्तु जो योजनायें पहले से संचालित थी उनका  भी लाभ कहीं से कहीं तक आदिवासियो को नही मिल पा रहा है। जैसे गर्भवती महिलाओ को बच्चा होने पर मिलने बाली राशि पिछली सरकार द्वारा प्रति माह आदिवासियो के खाते में एक हजार रूपये डालने बाली योजना सहित प्रधानमंत्री आवास योजना का तक लाभ आदिवासियो को नही मिल पा रहा है। कोलारस के अंतर्गत आने बाली ग्राम पंचायत गुढा, राजगढ, बसाई, अटरूनी, पचावली, लेवा, राई, गणेशखेडा, टीला, भडौता सहित अनेक ग्राम पंचायतो में आदिवासी निवासरत है परन्तु यहां पर पदस्थ सचिवो से लेकर रोजगार सहायको की भ्रष्ट नीतियो के चलते आदिवासी आज भी आवास योजना के तहत मिलने बाली कुटीर के लिए दर-दर भटक रहे है। अधिकांश पंचायतो में तों आदिवासियो से सचिवो एवं रोजगार सहायको ने खुलेआम कुटीर देने के नाम पर रूपये बसूल कर रखे है। अनेक आदिवासी काम के अभाव में पलायन तक कर चुके है आदिवासियो का कहना है कि सरकार की योजनाओ का लाभ हम लोगो को नसीब नही हो पा रहा है और हम मजदूरी करने के बाद अपने परिवार का भरण पोषण कर पा रहे है। ग्राम पंचायतो में सरपंच से लेकर सचिवो, रोजगार सहायको के रिश्तेदारो को कुटीरे पहले मिली परन्तु आदिवासी आज भी कुटीर के लिए भटकते हुये दिखाई दे रहे है। अधिकांश दवंग लोग आदिवासियो के कागज लगा कर सरकार की अनेक योजनाओ का लाभ तक ले रहे है जबकि शासकीय विभागो में आदिवासियो के लिए लाखो रूपये का बजट सरकार उपलब्ध कराती है परन्तु फर्जी कागजी कार्यवाही कर आलाधिकारी बजट पूरा का पूरा हजम करने में जुटे हुये है। 

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