मध्य प्रदेश में सत्ता परिवर्तन को अभी चार माह का समय ही बीता है किन्तु सरकार बदलने के साथ ही मंत्री मण्डल में शामिल ब्राह्मण विधायको की संख्या जहां पूर्व की सरकार में एक दर्जन के आस-पास हुआ करती थी आज वही संख्या घट कर एक तक पहुंच गई है। कुल मिला कर सत्ता परिर्वतन का सबसे ज्यादा असर कहे या दुसप्रभाव बुद्घी के ज्ञाता माने जाने बाले ब्राहा्रण विधायको पर पडा है। इसका सबसे बडा कारण निकल कर जो सामने आया है उसके अनुसार कांग्रेस सरकार में शामिल 28 कैविनेट मंत्रियो में जिन विधायको को मंत्री मण्डल में शामिल किया गया है वह मुख्यमंत्री कमलनाथ, पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह, कांग्रेस महासचिव ज्योतिरादित्य सिंधिया की सिफारिश पर 28 विधायको को कांग्रेस की सरकार में मंत्री मण्डल में स्थान दिया गया। जिनमें ब्राह्मण समाज से मात्र एक विधायक को मंत्री मण्डल में स्थान दिया गया जबकि कांग्रेस से जीतने बाले ब्र्राहा्रण विधायको की संख्या एक दर्जन के आस-पास होने के बाद भी मंत्री मण्डल में ब्राह्मण विधायको की सिफारिश करने बाला मजबूत कांग्रेस नेता न होने के कारण कांग्रेस की सरकार में ब्राहा्रण मंत्रियो की संख्या पूर्व की भाजपा सरकार की तुलना में एक दर्जन से घट कर एक मंत्री तक आ पहुंची है।
सत्यव्रत चतुर्वेदी, सुरेश पचौरी, मुकेश नायक की कमजोरी से मंत्री मण्डल में घटी ब्राहा्रण मंत्रियो की संख्या
मध्य प्रदेश में कांग्रेस के तीन दिग्गज ब्राहा्रण नेता माने जाते है जिनकी पकड कमजोर होने अथवा चुनाव हार जाने के कारण यह नेता मंत्री मण्डल में न तो स्वयं शािमल हो पाये और न ही अपने लोगो को मंत्री मण्डल में शािमल भी नही करा पाये। सबसे पहले बात करते है सत्यव्रत चतुर्वेदी की पूर्व सांसद रह चुके है पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के साथ भी काम कर चुके है किन्तु इस बार विधानसभा के चुनाव में अपने पुत्र को कांग्रेस से टिकिट दिलाने में नाकामयाब होने के बाद दूसरे दल से पुत्र को चुनाव लडाने के बाद स्वयं एवं पुत्र दोनो को कांग्रेस से वाहर का रास्ता दिखा दिया गया। जिसके चलते चतुर्वेदी कांग्रेस से दूर कर दिये गये। उनके समर्थको को भी मंत्री मण्डल में स्थान नही दिया गया। कांग्रेस के दूसरे ब्राहा्रण नेता सुरेश पचौरी जो कि कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष एवं केन्द्र की सरकार में मंत्री रह चुके है इस बार विधायक का चुनाव हारने के बाद कांग्रेस के लोगो ने उनके समर्थको को भी मंत्री मण्डल में स्थान देने लायक तक नही समझा।
तीसरे कांग्रेस के नेता पूर्व मंत्री मुकेश नायक का नाम आता है जो कि पूर्व मंत्री रह चुके है इस बार विधानसभा का चुनाव हारने का डंश नायक के साथ-साथ इनके समर्थको को भी झेलना पडा है नायक के चुनाव हारने के बाद नायक एवं उनके समर्थको को मंत्री मण्डल से लेकर संगठन में कहीं भी स्थान नही दिया गया।
ब्राह्राण विधायको के पास सिफारिश की कमी के कारण नही मिला मंत्री मण्डल में स्थान
मध्य प्रदेश में कांग्रेस की सरकार को बने हुये करीब चार माह बीत चुके है मंत्री मण्डल में शािमल 28 विधायको में मात्र एक ब्राहा्रण विधायक को शामिल किया गया है। जबकि चुनाव जीत कर आये करीब एक दर्जन ब्राह्मण विधायको को न तो मंत्री मण्डल में स्थान मिला और न ही प्रदेश से लेकर राष्टï्रीय स्तर के संगठन में ब्राहा्रण विधायको को शामिल न करने के पीछे जो कारण निकल कर सामने आये है। उसमें सबसे बडा कारण यह निकला है कि प्रदेश के मंत्री मण्डल में ब्राह्मण विधायको की संख्या घटने का सबसे बडा कारण ब्राहा्रण विधायको के पास सिफारिश करने बाले नेता नही थे जो ब्राहा्रण नेता चुनाव मैदान में अपनी किस्मत आजमा रहे थे वह चुनाव हार जाने के कारण न तो स्वयं मंत्री बन पाये और न ही अपने समर्थको को मंत्री मण्डल में स्थान दिला पाये कुल मिला कर ब्राहा्रण विधायको को सिफारिश यानि कि ब्राहा्रण नेता का जैक न होने का खामियाजा बर्तमान कांग्रेस की सरकार में मंत्री नही बनने के रूप में भुगतना पडा है।
विधायक का चुनाव हारे हुये ब्राहा्रण नेताओ को लोकसभा का टिकिट नही जबकि दूसरे हारे हुये विधायको को कांग्रेस ने दिया लोकसभा का टिकिट
मध्य प्रदेश में विधानसभा के चुनाव सम्पन्न हुये करीब चार माह बीत चुके है लोकसभा चुनाव के लिए प्रदेश में कुछ स्थानो पर मतदान हो चुका है तो कुछ पर होना जारी है। कुल मिला कर ब्राहा्रण समाज के लोगो को यह बात समझने की आवश्यकता है कि ब्राहा्रण समाज के जो दिग्गज नेता विधानसभा का चुनाव हारे थे उन्हे लोकसभा का टिकिट कांग्रेस पार्टी द्वारा नही दिया गया। जबकि दूसरे समाज के विधायक का चुनाव हारने बाले नेताओ को लोकसभा का टिकिट देकर चुनाव मैदान में उतारा गया। यह ब्राहा्रण नेताओ के साथ सौतेला व्यवहार है यह स्पष्टï दिखाई देता है इसके मध्य प्रदेश में करीब आधा दर्जन उदाहरण सभी के सामने मौजूद है कि किस प्रकार ब्राहा्रण नेताओ के साथ सिफारश एवं समाजिक नेता का जैक न होने के कारण पहले विधानसभा का चुनाव उसके बाद मंत्री मण्डल तथा अंत में लोकसभा के टिकिट में ब्राहा्रणो को प्रदेश की राजनीति से एक एक कर वाहर का रास्ता दिखाया गया। ब्राहा्रण नेताओ को लोकसभा चुनाव केे बाद एक सार्वजनिक बैठक कर आगे की रणनीति तथा लोकसभा के लिए शेष सीटो पर जारी मतदान से पूर्व एक जुट होकर एक कठोर निर्णय लेने की आवश्यकता है।
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