अवैध स्कूलों पर कार्रवाई की दरकार, कोलारस से लेकर ग्रामीण अंचलों में दुकानों, मकानो, तलघरो में चल रही है शिक्षा की दुकान


दीपक बत्स कोलारस- कोलारस से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा के सत्यानाश की सबसे बड़ी वजह शिक्षा महकमा ही बना हुआ है कोलारस नगर में शिक्षा की दुकान सजाए बैठे शिक्षा माफिया तथा कथित स्कूल संचालकों के निजी स्कूलों की जमीनी हकीकत यह है कि नगर के अधिकांश निजी स्कूल खुद सुविधाओं के मोहताज हैं निजी स्कूलों में ना तो खेल मैदान मौजूद है ना ही पीने के लिए शुद्ध पानी की व्यवस्था है बच्चों को शिक्षा देने के लिए बीटीआईं के प्रशिक्षित शिक्षकों की कमी ना ही बच्चों को बैठने के लिए पर्याप्त जगह एवं गरीब वर्ग के छात्रों को छात्रवृत्ति की सुविधा बच्चों के लिए मेडिकल सुविधा आदि ने निजी स्कूलों की अवस्थाओं का जनाजा निकाल दिया है एक और प्राइवेट स्कूलों में बच्चों से प्रयोग शाला शुल्क वसूला जाता है परंतु प्रयोगशाला इन स्कूलों में दूर-दूर तक दिखाई नहीं देती है शिक्षा महकमे की कथित निजी स्कूल संचालकों से पैसा व्यवस्था के चलतेे शिक्षा की दुकानों का संचालन बदसूरत जारी बना हुआ है परंतु निजी स्कूलों की सच्चाई शिक्षा अधिनियम के स्कूल संचालकों ने अभिभावकों के साथ बच्चों के लिए उच्च शिक्षा व शानदार व्यवस्था का वास्ता देकर छलावा किया है जबकि सच्चाई तो यह है कि यह निजी स्कूल खुद सुविधाओं से मोहताजबने हुए हैं इन स्कूलों में पर्याप्त व्यवस्था ना होने के कारण एक छोटी सी दुकान में मासूम बच्चों को जानवरों की तरह भर दिया जाता है एबी रोड जगतपुर कॉलेज रोड कब्रिस्तान रोड, एप्रोच रोड एवं सदर बाजार स्टेशन रोड जेल रोड, राई रोड ,पावर हाउस के पास मानीपुरा आदि इलाकों में चार किराए की दुकानों में संचालित कथित निजी स्कूल संचालकों द्वारा बालकों से एक मोटी रकम फीस के रूप में वसूल की जाती है लेकिन सुविधाओं के नाम पर एक दुकान में 2 कक्षाएं चलती देखी जा सकती हैं यह निजी स्कूल खुद 4 किराए की दुकानों में 4 शिक्षकों के साथ भगवान भरोसे संचालित हो रहे हैं सुविधाओं से मोहताज भीड़ भाड़ वाले इलाकों में संचालित निजी स्कूलों के बच्चों को आय दिन सड़क दुर्घटनाओं का शिकार होते आसानी से देखा जा सकता है शिक्षा महकमे के अधिकारियों की आंखों पर चश्मा चढ़ा होने के कारण कथित निजी स्कूल संचालकों द्वारा खुलकर शिक्षा के व्यवसायीकरण का खेल खेला जा रहा है जानते समझते हुए भी शिक्षा विभाग के आला अधिकारी इन कथित निजी स्कूल संचालकों पर कार्यवाही करने की जहमत नहीं उठा पा रहे शिक्षा महकमे के नुमाइंदों को नगर में संचालित शिक्षा की दुकानों में हो रहे छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ होने की परवाह नहीं है कथित स्कूल संचालक शिक्षा अधिनियम के नियमों के विपरीत स्कूलों का संचालन करने पर सावरिया निशान लगा रहे हैं विभागीय अधिकारी एवं शिक्षा माफियाओं की सांठ गांठ का लाभ विद्यालय संचालक उठा रहे हैँ


एक मान्यता के सहारे चल रह ेदो-दो विद्यालय
 कोलारस से लेकर ग्रामीण अंचलों खरई, रन्नोद, लुकवासा ,मोहरा, राजगढ़, डेहरवारा, लेवा मकरारा, मोहराई मैं प्राइवेट विद्यालय 1 मान्यता के सहारे 2-2 विद्यालय  चलाए जा रहे हैं कोलारस नगर में ही कॉलेज रोड ,मानीपुरा सदर बाजार मैं एक मान्यता के सहारे े 2-2 विद्यालय संचालित हो रहे हैं जो कि नियमों के विरुद्ध है अधिकांश विद्यालयों में ऑटो मारुति वैन तक बच्चों को लाने ले जाने का कार्य कर रही है परिवहन विभाग से लेकर प्रशासन जब भी जांच पड़ताल करता है तो ले देकर वाहनोको छोड़ देता कई बार स्कूली बाहनोके साथ दुर्घटना घटित हो चुकी हैं घटना हो जाने के बाद एक-दो दिन पाबंदी लग जाती है परंतु इसके बाद मारुति वैन ऑटो में बच्चों को लाने ले जाने का कार्य  शुरू हो जाता है
 शिक्षा अधिनियम के तहत संचालित नहीं हो रहे विद्यालय
कोलारस नगर से लेकर ग्रामीण अंचलों में संचालित दर्जन भर निजी स्कूलों का संचालन शिक्षा अधिनियम के तहत नहीं होता है स्कूलो की मान्यता जांच की जद में है यदि शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा दुकानों बाजारों में संचालित निजी स्कूलों का निरीक्षण किया जाए तो अनेक स्कूलों की मानता खतरे में पडने के साथ ही अन्य निजी स्कूल पर ताला लग सकता है कोलारस में ही एक विद्यालय एक मान्यता से 2-2 जगह संचालित हो रहे हैं जो शासन के नियमों के विपरीत है दर्जनभर निजी स्कूलों में अंग्रेजी माध्यम से शिक्षा देने वाले प्रशिक्षित शिक्षकों के ना होने के कारण स्टाफ के नाम पर चपरासी व स्कूल मालिक बच्चों को शिक्षा दे रहे हैं कथित निजी स्कूल संचालकों ने शासन के नियम कायदों को ताक पर रखकर जमकर शिक्षा अधिनियम की धज्जियां उड़ा डाली है मनमानी फीस वसूली से मान्यता संबंधित नियमों का खुलकर मजाक बना डाला शिक्षा माफियाओं की मनमानी के चलते अभिभावकों को इन्हीं स्कूलों में से अपनी बच्चों के नाम कटवाने के लिए बाध्य होना पड़ रहा है नगर में निजी स्कूल संचालकों की मनमानी चरम पर है शिक्षा का व्यापार करने वाले स्कूल संचालकों द्वारा किराए की दुकानों में स्कूलों का संचालन अनेक वर्षों से किया जा रहा है


सर्व शिक्षा अभियान के तहत 5 से 14 वर्ष तक के सभी बच्चों को उनकी उम्र के हिसाब से निजी स्कूलों में  पर्याप्त कक्षाओं का टोटा
यदि शिक्षा विभाग द्वारा कोलारस नगर के निजी स्कूलों के निरीक्षण में मनमानी नहीं दिखाई जाए तो अनेक स्कूल बंद होने की कगार पर पहुंच सकते हैं स्कूल संचालक किराए की दुकानों में शिक्षा का व्यापार एवं छात्रों से लेकर अभिभावकों का शोषण करने से नहीं चूक रहे निजी स्कूलों में जब चाहे शिक्षकों को रखा जाता है जब चाहे हटा दिया जाता है नगर में संचालित यह निजी स्कूल शासन के नियमों पर पूरी तरह से खरे नहीं उतर पा रहे हैं ऐसे विद्यालय शासन के नियमों के विपरीत संचालित हो रहे निजी स्कूलों पर शिक्षा विभाग द्वारा कार्यवाही नहीं करने के चलते दुकान संचालकों की मनमानी चरम पर पहुंच गई है ऐसा नहीं है कि निजी स्कूल संचालकों द्वारा दिखाई जा रही अनियमितताओं की जानकारी शिक्षा विभाग के अधिकारियों को नहीं है लेकिन स्कूल संचालकों शिक्षा विभाग की अव्यवस्था की और व्यवस्था के बीच अध्ययनरत छात्राओं को शिक्षा ग्रहणकरनी पड़ रही है 
इनका कहना है
 कोलारस नगर से लेेकर ग्रामीण अंचल में प्राइवेट विद्यालय संचालकों की मनमानी अनेक दिनों से चल रही है विद्यालय संचालकोने जूते मोजे कोर्स यहां तक की किताबों तक की दुकानें फिक्स कर रखी है जहां पर उनको मनमाना कमीशन मिल जाता है दुकान संचालकों द्वारा अभिभावकों को लूटा जारहा है शिक्षा विभाग को ऐसे निजी विद्यालयों की मनमानी पर अंकुश लगाना चाहिए
हरीशंकर धाकड
सरपंच तेन्दुआ



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