लोकसभा चुनाव में मिली हार पर मंथन में यह कारण भी आयेगे सामने


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इन वजहो पर ध्यान दिया होता तो आज सवा लाख की जीत मिलती सिंधिया को 
हरीश भार्गव-शीलकुमार यादव-- गुना लोकसभा क्षेत्र का परिणाम आने के बाद पूर्व सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया लोकसभा चुनाव में मिली हार के कारणो पर कार्यकर्ताओ के साथ बैठक करके मंथन करेगे कि वह कौन से कारण रहे जिनकी बदौलत गुना लोकसभा क्षेत्र की जनता ने पहली बार महल के उम्मीदवार को चुनाव हराया जबकि मध्य प्रदेश में ही कांग्रेस के प्रत्याशी नकुल नाथ जीतने में कामयाब हुये वहीं गुना लोकसभा क्षेत्र में अपने ही पूर्व चेले के हाथो सिंधिया को मिली सवा लाख की हार के बाद जहां स्वयं सिंधिया टेंशन में है तो वहीं कार्यकर्ता सिंधिया के सामने किस मुंह से जाये यह परेशानी कांग्रेस के पदाधिकारी एवं कार्यकर्ताओ के ऊपर भी है। परिणाम आने के करीब 17 दिन बाद कई कार्यक्रम निरस्त करने के बाद सिंधिया गुना लोकसभा क्षेत्र में कार्यकर्ताओ से हार के कारणो पर मंथन करने सोमवार को आ रहे है। पूर्व सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया को लोकसभा चुनाव में कडी टक्कर मिलने तथा चुनाव में कई कमियो को हमारी बैव साईट द्वारा अनेको बार सिंधिया एवं उनके समर्थको को अवगत कराया गया यहां तक की सिंधिया को स्वयं भी उन खबरो की जानकारी मिलने के बाद भी जीत के घोडे पर अपने आप को सवार देख रहे ज्योतिरादित्य सिंधिया को राष्टï्र बाद एवं मोदी की लेहर तथा कांग्रेस के यादवी कार्यकर्ताओ का अपने समाज की ओर झुकाव सहित ऐसे अनेक कारण बने जिनके कारण सिंधिया को सवा लाख मतो से मिलने बाली जीत हार में तब्दील हो गई। 


इनके कारण सिंधिया को पहली बार झेलनी पडी शिकस्त
गुना लोकसभा का परिणाम आये हुये दो सप्ताह से अधिक समय बीत चुका है किन्तु अपने ही गढ में पहली बार शिकस्त झेल चुके सिंधिया कई दौरे रदद करने के बाद अंतत: सोमवार को उदास मन लेकर कार्यकर्ताओ से हार के कारणो पर चर्चा करने आ रहे है। कांग्रेस एवं भाजपा कार्यकर्ताओ से लेकर आम लोगो से लोक सभा चुनाव के परिणाम आने के बाद से लगातार सिंधिया को मिली सवा लाख की हार पर जब लोगो से राय ली तो लोगो की राय में सिंधिया को मिली हार के मुख्य कारण कुछ इस प्रकार निकल कर सामने आये। 
1- मध्य प्रदेश के सभी किसानो को ऋण माफी के फार्म भरवाने के बाद ऋण माफ न होना, बिजली की समस्या लोकसभा चुनाव के पूर्व से अचानक पैदा होना, दलालो द्वारा पैसे लेकर लगातार स्थानांतारण कराना।
2- विधानसभा के 
 चुनावो में विधायक के बरावर हैसियत रखने बाले कार्यकर्ताओ को टिकिट न देना नये लोगो को विधानसभा चुनाव में टिकिट देना, अपनी पकड दिखाने के लिए विधानसभा चुनाव में कई दिग्गजो को शिकस्त देने के कारण सभी विरोधियो ने एक जुट होकर लिया बदला। 
3- केन्द्र सरकार द्वारा गरीब सवर्णो को 10 प्रतिशत आरक्षण देने के बाद प्रदेश में विलम्ब से लागू करना तथा पिछडा वर्ग को आरक्षण में ज्यादा प्रतिशत देने के कारण सवर्ण समाज में नाराजगी।
4- लोकसभा चुनाव के दौरान स्थानीय कार्यकर्ताओ के ऊपर विश्वास न करते हुये वाहरी कार्यकर्ताओ, विधायको, मंत्रीयो को भेजने के कारण स्थानीय कार्यकर्ताओ का मौन साधना भी हार का एक कारण।
5- विधानसभा एवं जिला पंचायत के चुनवो में बगावत करने बाले कार्यकर्ताओ पर कार्यवाही न होने से लोकसभा चुनाव में बडी कांग्रेस में बागीयो की संख्या।
6- कांग्रेस के यादवी नेता दिखाने में सिंधिया के साथ जबकि रिश्तेदारी के चलते आस-पास की पोलिंग भाजपा को जिताने का किया कार्य बना कांग्रेस की हार का सबसे बडा कारण।
7- बसपा प्रत्याशी का समर्थन कांग्रेस को लेना पडा भारी बसपा के लोगो ने नाराज होकर दिया कांग्रेस की जगह भाजपा को समर्थन।
8- प्रभारी मंत्रियो द्वारा जिलो में लोकसभा चुनाव से पूर्व अपने चहेतो को मुख्य पदो पर लाने से आम लोगो में फैला आक्रोश।
9-ब्राहा्रण समाज के नेताओ को संगठन, विधानसभा के टिकिट, मंत्री मण्डल में समाज के लोगो की सिफारिश न करने के कारण जन्म से महाराज कहलाने बाले ब्राहा्रणो की नाराजगी सर्वाधिक गुना, शिवुपरी, अशोकनगर सहित कोलारस में दी दिखाई। 
10- ब्राहा्रण, अग्रवाल, रघुवंशी के साथ यादव एवं किरार समाज की कांग्रेस द्वारा उपेक्षा के कारण बना नया गठजोड रहा सिंधिया को सवा लाख की जीत में हार का एक प्रमुख कारण। 


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