कोलारस-नगर के वार्ड-1,जगतपुर में निवासरत अध्यापक सुरेन्द्र सिंह लोधी ने अपने पिता की प्रथम पुण्यतिथि पर स्मृति स्वरूप 108 वृक्षों का रोपण कर पर्यावरण संरक्षण की नई मिसाल पेश की उनके पिता स्व.श्री रामप्रसाद लोधी जिला सहकारी केन्द्रीय बैंक में सेवारत रहकर सुपरवाइजर पद से रिटायर्ड हुए थे और विगत वर्ष श्रावण मास के इसी दिन उनका निधन हो गया था। उन्हें आध्यात्म और प्रकृति से गहरा लगाव था सेवानिवृत्ति के बाद उन्होंने अपना अधिकांश समय ईश्वर आराधना और वृक्षों के रोपण, देखरेख में बताया था। इसलिए पुत्र धर्मनिभाते हुए उन्हें सच्ची श्रद्धांजलि के रूप में पीपल, बरगद, पाकर, नीम, बिल्व, आंवला, कचनार, अमलतास, हारसिंगार(पारिजात),सहजन इत्यादि धार्मिक-आध्यात्मिक व औषधीय महत्व के 108 दीर्घजीवी वृक्षों का रोपण किया। हिंदू धर्म ग्रंथों में वृक्षों को देवतुल्य और पूजनीय बताया गया है और इनका रोपण महापुण्यदायक बताया गया है ! परोपकार से ब?ा धर्म नहीं... और वृक्ष से ब?ा परोपकारी नहीं ये सैंकडों वर्षों तक वायुमण्डल को शुद्ध करके प्राणवायु तो प्रदान करते ही हैं ,अपनी ज?ों से वर्षा जल को भू-गर्भ में पहुँचाकर जल से परिपूर्ण करते हैं सहजन और आंवलाजैसे पोषक तत्वों से परिपूर्ण वृक्ष पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ कुपोषण को खत्म करने में सहायक हो सकते हैं मानव का अस्तित्व प्रकृति पर टिका है, इसलिए प्रकृति के संरक्षण में हर मानव की भूमिका होनी चाहिए
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