कोलारस-वर्षा ऋतु पूर्व में चार माह तक के लिए मानी जाती थी किन्तु पर्यावरण के साथ हुये खिलवाड के बाद वर्षा ऋतु चार माह की जगह चालीस दिन से भी कम समय के लिए सिमट गई। पर्यावरण यानि कि वृक्षो के कट जाने से कहीं अधिक वारिश तो कहीं सूखे की स्थिति विगत तीन दसको से देखने को मिल रही है। इन सब के लिए कोई और नही बल्कि हम सभी जिम्मेदार है जिन्होने अपने लाभ के लिए प्रक्रतिक के रूप में वन काटे तथा अबैध उत्खनन करके नदियो को वर्वाद किया। जिसके कारण प्रत्येक वर्ष सूखा तो कभी अधिक वारिश के कारण बाड के हालात पैदा हो रहे है। श्रावण मास वर्षा के लिए मुख्य माह माना जाता है जिसका समापन बहन भाई के रक्षा का पर्व रक्षा बंधन के साथ सम्पन्न हो चुका है। इसके साथ ही भादो मांस के प्रथम दिन पडने बाले भाई चारे के पर्व भुजरिया पर्व का समापन भी शुक्रवार को हो चुका है। शिवपुरी जिले एवं कोलारस के आस-पास अभी पचास प्रतिशत के आस-पास वारिश हुई है। पर्याप्त वारिश के लिए भादो मांस से हम लोगो को उम्मीद है जबकि वारिश का मुख्य माह श्रावण मास बीत चुका है।
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