हरीश भार्गव-शील कुमार यादव- कांग्रेस के ऊर्जावान नेता पूर्व सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया को कांग्रेस का प्रदेश अध्यक्ष बनाये जाने को लेकर चर्चाओ का बाजार विगत कई माह से जोर पकडे हुये था। जिसको लेकर कांग्रेस के शीर्ष नेत्रत्व से मिली हरी झण्डी के बाद यह तय हो गया है कि मध्य प्रदेश में कांग्रेस की राजनीति में मचा भूचाल अब धीरे-धीरे कम हो रहा है और वहुत जल्द कांग्रेस का शीर्ष नेत्रत्व मध्य प्रदेश में प्रदेश अध्यक्ष की घोषणा कर देगा। कांग्रेस के राष्टï्रीय एवं प्रदेश स्तर के नेताओ का मानना है कि कांग्रेस में अध्यक्ष पद के कई दावेदार होने के साथ-साथ प्रदेश में पूर्ण बहुमत की सरकार न होने के कारण प्रदेश अध्यक्ष की घोषणा में बिलम्ब अवश्य हुआ है किन्तु कांग्रेस के राष्टï्रीय महा सचिव ज्योतिरादित्य सिंधिया के राहुल गांधी एवं प्रियंका गांधी से राजनैतिक संबंधो का लाभ सिंधिया को मिलना तय है। और मध्य प्रदेश में कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष को लेकर चल रहे कई महिनो से चर्चाओ के बाजार पर कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष की घोषणा होने के साथ ही विराम लग जायेगा। कांग्रेस के शीर्ष नेत्रत्व को डर था कि कहीं प्रदेश अध्यक्ष की घोषणा से कांग्रेस में गुटवाजी या विखराब के चलते मध्य प्रदेश में 15 वर्ष बाद लोटी कांग्रेस की सरकार खतरे में न पड जाये इसको लेकर कांग्रेस का शीर्ष नेत्रत्व मध्य प्रदेश से लेकर राजस्थान में फूंक-फंूक कर कदम रख रहा है। कि कांग्रेस का संगठन में बदलाव के चलते कर्नाटक की तरह मध्य प्रदेश एवं राजस्थान की सरकारे न गिर जाये। इसी के चलते मध्य प्रदेश में कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष की घोषणा में विलम्ब अवश्य हुआ है किन्तु नाम पहले से ही कांग्रेस द्वारा तय कर लिये थे।
राज्यो के चुनाव तक मध्य प्रदेश में बनी रहेगी कांग्रेस की सरकार
मध्य प्रदेश में कांग्रेस की सरकार पूर्ण बहुमत में नही है सहयोगियो की दम पर मध्य प्रदेश एवं राजस्थान में कांग्रेस की सरकार चल रही है। लोकसभा चुनाव का परिणाम आने के बाद ऐसा लग रहा था कि कर्नाटक की तरह मध्य प्रदेश एवं राजस्थान में भी कांग्रेस की जगह भाजपा की सरकार बन सकती है। किन्तु हरियाणा सहित देश के कई राज्यो में विधानसभा के चुनाव होना है और भाजपा के खिलाफ देश में माहौल खराब न हो इसके चलते मध्य प्रदेश एवं राजस्थान की कांग्रेस सरकारो को राज्यो के विधानसभा चुनाव तक अभय मिलता हुआ दिखाई दे रहा है। जिस प्रकार लोकसभा के चुनावो के चलते कर्नाटक की सरकार को लोकसभा के परिणाम आने तक गिराया नही गया उसका सबसे बडा कारण यह था कि देश में केन्द्र सरकार यानि कि भाजपा के विरोध में माहौल पैदा न हो। कर्नाटक की तरह मध्य प्रदेश एवं राजस्थान में भी कांग्रेस की सरकारे खतरे में दिखाई दे रही है। जिसको लेकर चर्चाओ का बाजार गर्माया हुआ है। किन्तु कर्नाटक की ही तरह देश में भाजपा के खिलाफ माहौल पैदा न हो इसको लेकर मध्य प्रदेश एवं राजस्थान की सरकारो को देश के कई राज्यो के विधानसभा चुनाव के परिणाम आने तक संजीवनी मिलती हुई दिखाई दे रही है।