कोलारस परगने में इन दस विभागों से अधिकारी करते करोडों की काली कमाई


कोलारस-बदरवास - कोलारस परगने के प्रमुख दस विभागों पर हम नजर डाले तो यहां बैठे विभाग प्रमुख जनता से लेकर काला कारोबार करने वालों से प्रतिमाह करोडो की अवैध बसूली करके मालामाल होते चले जा रहे है। जनता वेचारी अधिकारियों से लेकर जनप्रतिनिधियों के मुंह ताकते रह जाती है जनप्रतिनिधि चुनाव में खर्च धन राशि को निकालने से लेकर अपने चहेते लोगों को खुश करने के चकर में आम लोगो को भूल जाते है। इसी का लाभ उठाते हुये अधिकारी जनता से लेकर काला कारोबार करने वालो से अपना घर घरने तथा वरिष्ठ अधिकारियों को खुश करने से लेकर पोस्टिंग करने में लाखों रूपया खर्च करने में भी यह अधिकारी पीछे नहीं रहते। लोकायुक्त पुलिस द्वारा निरंतर कार्यवाही न करने तथा जनप्रतिनिधियों के द्वारा चुनावी खर्च निकालने में व्यस्त होने के कारण अधिकारी काली कमाई करने में पीछे नहीं है। हमने कोलारस परगने के जिन दस विभागों पर नजर डाली उनमें हालात बहुत ज्यादा खराब दिखाई दिये अधिकारी अधिनस्थ बाबूयों से लेकर दलालो से माध्यम से जनता एवं अवैध कारोबार करने वालो से जमकर बसूली करते हुये दिखाई दिये । कई विभागों की रिकॉडिंग लोगों के पास उपलब्ध होने के बाबजूद भी लोकायुक्त पुलिस द्वारा बार-बार फरीयादी को तारीकों पर बुलाने के कारण पीडित लोग लोकायुक्त की कार्यवाही से बचते है।

1- जनपद पंचायत-एनआरजी विभाग कोलारस,बदरवास - कोलारस एवं बदरवास जनपद पंचायत पर निगाह डाली जाये तो यहां हालात सबसे ज्यादा खराब दिखाई दिये यहां सचिव से लेकर सीईओ के नाम पर 50 प्रतिशत का खुला कारोबार चलता है किन्तु सभी को पर्याप्त कमीशन मिलने के कारण सब के मुंह पर ताला पडा है। 
2- कृषि उपज मंडियां- कोलारस परगने के अंतर्गत तीन बडी मंडिया शामिल है। जिनमें कोलारस, बदरवास, लुकवासा इन मंडियों में किसी भी समय जाकर देखा जाये तो मंडियों के अंदर एवं व्यापारियों के गोदामों पर खुलेआम टैक्स चोरी का खेल जारी है। कोलारस मेंं मोहरा रोड, एवी रोड, लुकवासा मंडी टैक्स चोरी का मुख केन्द्र है। इसके अलावा मंडियों के अंदर विलों को पास करने से लेकर अपने चहेतों के फर्जी विलों का भुगतान आम बात है। 
3- उचित मूल्य वितरण व्यवस्था- कोलारस परगने मेंं उचित मूल्य की करीब डेड सैंकडा दुकाने संचालित होती है। उचित मूल्य की वितरण व्यवस्था - लीड से लेकर उचित मूल्य की दुकान पर अधिकारियों की मिली भगत से काला कारोबार खेला जाता है। यहां प्रतिमाह कमीशन के खेल में अधिकारी सब कुछ  खेल जाते है।  

4 - नगर परिषदें- कोलारस परगने में दो नगर परिषदें मौजूद है जिनमें कोलारस एवं बदरवास इन दोनों स्थानों पर जाकर देखा जाये तो यहां ठेकेदारों के द्वारा अधिकारी 50-50 का खुला खेल खेलते है। सकडों से लेकर, कुटीरे, शौचालय, फर्जी कर्मचारियों से लेकर डीजल के नाम पर अधिकारियों द्वारा कमीशन का खुला खेल खेला जा रहा है। 
5- खनिज के नाम पर अधिकारियों की बसूली- कोलारस परगने के ग्राम बामौर में क्रेसर व्यापारियों द्वारा आवंटित भूमि से कई गुना अधिक राजस्व, वन विभाग एवं दूसरे गरीब लोगों की भूमि को खोदकर के्रसर का अवैध कारोबार खुलेआम जारी है। इस अवैध कारोबार के बदले में प्रशासन को होने वाली करोडों की कमाई से यह कारोबार खुलेआम जारी है। 
6 - आबकारी विभाग - कोलारस में आबकारी विभाग केवल और केवल बसूली कार्यालय बनकर रह गया है। यहां पदस्थ अधिकारी केवल और केवल बसूली करने आते है। उन्हें यहां चलने वाले नशे का अवैध कारोबार दिखाई ही नहीं देता जिसके चलते कोलारस परगने में अवैध रूप से गांजा, अफीम, डोंडा फक्की से लेकर जहरीली अवैध शराब का खुला कारोबार आबकारी विभाग के संरक्षण में चल रहा है। लोग अधिक नशा करने के कारण दुर्घटना एवं बीमारियों का शिकार हो रहे है और आबकारी विभाग के अधिकारी बसूल करने में व्यस्त है। 
7 - प्रधानमंत्री सडकें - केन्द्र सरकार की सबसे महत्वपूर्ण योजना गांवों को सडकों से जोडने के लिये प्रधानमंत्री ग्रामीण सडक परियोजना विभाग वनाया जिसका काम गांवों में बेहतर सडकों के निर्माण की जिम्मेदारी सौपी गई किन्तु इस विभाग द्वारा ठेकेदारों से सांठगांठ करके प्रधानमंत्री सडको की गुणवत्ता इतनी खराब कर दी की प्रधानमंत्री सडक गारंटी पीरेड भी पूरा नहीं कर पातीं मुरम एवं गिटटी की मात्रा कम होने तथा गिटटी के उपर डस्ट के साथ डम्वर का लेप कर देने के कारण दस वर्ष चलने वाली प्रधानमंत्री ग्रामीण सडक दस माह में भी कमीशन खोरी के चलते दम तोड देती है।
8- परिबाहन चैक पोस्ट बने बसूली के अडडे - कोलारस परगने के अंतर्गत आने वाले खरई चैक पोस्ट की हम बात करें तो प्रदेश सरकार द्वारा परिवाहन चैक पोस्ट बीते कुछ माह पूर्व ही प्रारंभ किया गया जिसका उददेश मध्य प्रदेश की सीमा में आने वाले लोडिंग वाहनों तथा प्रदेश से राजस्थान में जाने वाले वाहनों के दस्तावेज जांच करने के साथ-साथ ओवर लोड वाहनों से टैक्स नियम अनुसार बसूली करना किन्तु यहां हालात विपरीत है। प्राईवेट लोगो द्वारा खरई वेैरियर पर कागजो की जांच तथा ओवर लोड वाहनों से अधिक टैक्स बता कर उनसे अवैध बसूली करके वाहनों को चोर रास्ते से कार्या होकर निकाला जा रहा है। परिवाहन, राजस्व, पुलिस  सभी को सब कुछ पता होने के बाद भी हिस्सेदारी के चलते सब मौन साधे हुये है।
9- राजस्व न्यायालय बने बसूली केन्द्र - कोलारस परगने की हम बात करें तो कोलारस परगने के अंतर्गत दो तहसील तथा दो उप तहसील कार्यरत है। जहां किसी भी समय जाकर देखा जाये तो जमीनी मामलो के विवादों से लेकर किसी प्रकार की फायलों को आने बाडने तथा उनका निराकरण करने के नाम पर बाबू एवं दलालो द्वारा जनता के साथ सब्जी मंडी की तरह मोल भाव किया जाता है। कुल मिलाकर प्रदेश सरकार द्वारा लोगों को जमीनी मामलो से लेकर लोगो की आम समस्याओं को निपटाने के लिये राजस्व न्यायालय का गठन किया गया वही न्यायालय आज लोगो के साथ सब्जी मंडी की तरह मोल भाव करते हुये नजर आ रहे है। वरिष्ठ अधिकारियों को सब कुछ पता होने के बाद भी सब आखिर मौन क्यों साधे हुये है। मामला बटोनी का नजर आता है।
10 - पीएचई विभाग - कोलारस परगने के अंतर्गत आने वाले कोलारस एवं बदरवास तहसील क्षेत्र की हम बात करें तो दोनों तहसील क्षेत्रों में शासन की योजना के तहत कई दर्जन गांवों में नल जल योजना के तहत पानी की टंकी एवं नलकूप उत्खन्न करके कई ग्रामीण क्षेत्रों में नल जन योजना के तहत करोडों रूपया शासन द्वारा दिया गया किन्तु धरातल पर देखा जायें तो कुछ स्थानों को छोडकर शेष अधिकांश गांवों में नलजल योजना पूर्णता: ठप्प पडी हुई है। इसके अलावा नलजल योजना के पाईप से लेकर मोटरे पीएचई विभाग के सब इंजिनियर द्वारा बाजारों में बेच दी गई ।  ग्रामीण क्षेत्रों में नलकूप उत्खन्न में कम घहराई करके दोगुनी घहराई के बिल लगाकर दो गुना भुगतान तथा अधिक पाईप नलकूप में डालने के नाम पर बाजार में वेचने के कारण 75 प्रतिशत हेैन्डपम्प दम तोड चुके है। कुल मिलाकर पीएचई विभाग के सब इंजिनियरों की मिली भगत से गांव के लोग वूंद-वूंद पानी को मोहताज है।

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