कोलारस - बिगत दिवस महा रानी अवन्तीबाई छात्रावास में परम पूज्य स्वामी ब्रहा्रनन्द जी की जयंती मनाई गई । एवं इस अवसर पर ध्यान योग कराया गया और वरिष्ठों का किया सम्मान। कार्यक्रम का संचालन करते हुये इन्द्रजीत लोधी ने स्वामी जी के जीवन वृत पर प्रकाश डाला और कहा संत प्रवर शिक्षा के सागर स्वतंत्रता सेनानी समाज सुधारक जिला हमीरपुर ग्राम वरहैरा उ.प्र. में स्वामी जी का जन्म 4 दिसम्बर 1894 को हुआ बचपन में आप का नाम शिवदयाल रखा गया आप कुशाग्र वुद्घी के थे स्वामी जी के बचपन में ही किसी संत ने कहा था की ऐ वालक वहुत बडा संत बनेगा। प्रारंभिक शिक्षा ग्राम वरहैरा में हुई । मात्र 9 वर्ष की आयु में ग्राम आमूंद की राधाबाई के साथ आप का विवाह हुआ । स्वामी जी व्यायाम एवं कुश्ती के शौकीन थे जैसे-जैसे बो बडे होने लगे उनके मन में लोक कल्याण की भावना जागने लगी मात्र 24 वर्ष की उम्र में आप ग्राम के वृत ब्राहा्रण मातादीन पुजारी के साथ सन्यास गृहण करने निकल पडे कानपुर के सरसैया घाट पर मुंडन कराकर आप हरिद्वार निकल गये। हरिद्वार में हरकी पौढी पर स्नान कर सन्यास धारण किया और अपना नामकरण स्वयं किया तथा गैरूआ वस्त्र धारण कर स्वामी ब्रहा्रनन्द उसी वक्त उन्होंने गंगा की सौगंध लेकर प्रण किया कि वह जीवन में कभी भी स्त्री गमन नहंी करेगे एवं पैसे को हाथ से नहीं छुयेगे। सन्यास के बाद कैलाश मानसरौवर से रामेश्वरम एवं कश्मीर से कन्याकुमारी तक की यात्राये की एवं इसी बीज गीता जी का ज्ञान पाया एवं पंजाव में ज्ञान की पाठशाला खुलवाई गौवथ वंदी के लिये आंदौलन चलाये राजस्थान के बीकानेर में जलबंदी के लिये भारी तालाव खुदवाये । भारत भ्रमण के समय स्वामी जी उत्राखण्ड, नासिक, रामेश्वर, पुस्कर, सुदामापुरी, आदि मंदिरों के मंडलेश्वम के संपाक में आये। तब उन्हें तत्कालीन राष्टï्रपति राजेन्द्र प्रसाद की उपस्थिति में अखिल भारतीय साधू समिति की कार्यकारण के सदस्य बने । भटिन्डा पंजाव में स्वामी जी की भैंट गांधी जी से हुई । सन्् 1921 में गांधी जी के सम्पर्क में आकर स्वामी जी स्वतंत्रता आंदोलन में कुद पडे 1928 में स्वामी जी के प्रयासों से गांधी जी राठ पधारे। सन् 1930 में नमक आंदोलन में स्वामी जी ने गांधी के साथ भाग लिया और इसी कारण आप 2 वर्ष तक जेल में रहे जेल से निकलने के बाद आप सामालिक एकता एवं शिक्षा के प्रसार में जुट गये। एक बार आप गौ हत्या बंद करने हेतु संसद पहुंये तो दरवार ने रोक दिया और कहा संसद में अंदर प्रवेश करने के लिये यहां का सदस्य बनना पडता है। तब स्वामी जी ने अपने क्षेत्र से सांसदी का चुनाव लडा 1967 से 1977 तक आप संसद सदस्य रहे । राठ क्षेत्र में शिक्षा का अभाव देखते हुये आपने सन् 1938 में राठ में महाविद्यालय की नीव रखी जो 1960 तक बनकर तैयार हुई वर्तमान में राठ में आठ कॉलेज एवं स्कूल संचालित है। जिसमें एक संस्किृत महाविद्यालय भी है। 13 सितम्बर 1984 को स्वामी जी पंच तत्व में विलीन हो गये । सम्पूर्ण समाज आपके द्वारा किये गये महानतम कार्यों एवं आपका योगदान का हमेशा ऋणी रहेगा। इस अवसर पर पहलवानसिंह लोधी जी ने समाजिक एकता एवं शिक्षा पर प्रकाश डाला, सुरेन्द्र सिंह लोधी ने स्वामी जी द्वारा शिक्षा के क्षेत्र में किये गये कार्यो पर प्रकाश डाला एवं कहा की हमे उनके पद चिन्हों पर चल कर भवी पीढी को शिक्षा की ओर अग्रसर करना चाहिये । एवं महेन्द्र सिंह लोधी ने कहा कि हमे समय-समय पर स्थानिय स्तर पर कैरियर काउंसलिंग जैसे कार्यक्रमों का आयोजन भी करना चाहिये जिससे छात्र-छात्राये अपने मार्ग को चुन सकें। इस अबसर पर अखिल भारतीय लोधी महासभा की पूरी टीम जगन्नाथसिंह, भारतेन्द्र सिंह लोधी, सुरेन्द्र सिंह लोधी, दीपक लोधी, कौषलेन्द्र लोधी, देवेन्द्र लोधी, पवन लोधी, वीरेन्द्र लोधी, नरेन्द्र लोधी, प्रदीप लोधी, जीतेन्द्र लोधी, रामप्रताव लोधी, रामगोपालसिंह लोधी, राजेश लोधी, रजनीकांत लोधी, हेमपालसिंह लोधी, दीपक लोधी आदि लोग शामिल रहे एवं सभी ने अपने विचार रखे।
Tags
कोलारस