करीला का राई नृत्य देश की सांस्कृतिक विरासत में शामिल मिलेगा बुंदेली नृत्यांगनाओं को सम्मान


करीला का राई नृत्य                                             देश की सांस्कृतिक विरासत में शामिल
मिलेगा बुंदेली नृत्यांगनाओं को सम्मान

अशोकनगर जिले का करीला मंदिर स्थित मां जानकी के दरबार में होने  वाला बुंदेली राई नृत्य, देश की सांस्कृतिक विरासत में शामिल होने से अब बुंदेली राई नृत्यांगनाओं को सम्मान मिलेगा एवं इस कला को प्रोत्साहन भी मिलेगा।
भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय में इस नृत्य को सांस्कृतिक विरासत में शामिल कर लिया गया है।
भारतीय जनता पार्टी के जिला मीडिया प्रभारी देवेन्द्र ताम्रकार का कहना है कि इस बुंदेली राई नृत्य को सांस्कृतिक विरासत में शामिल कराने के लिए सांसद डॉ. केपी यादव काफी समय से प्रयासरत थे। केन्द्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री प्रहलाद पटेल द्वारा इसे सांस्कृतिक विरासत में शामिल करने पर सांसद श्री यादव द्वारा उनका आभार व्यक्त किया गया है। 
इस संबंध में सांसद श्री यादव का कहना है कि करीला मंदिर में होने वाले बुंदेली राई नृत्य के सांस्कृतिक विरासत में शामिल होने से अब निश्चित तौर पर इस कला को बढ़ावा मिलने के साथ नृत्यांगनाओं को सम्मान मिलेगा। जैसा कि रामायण में भी उल्लेख है कि लव-कुश के जन्म के समय बधाई नृत्य करने अप्सरायें आईं थीं, मान्यता अनुसार तब से ही महर्षि बाल्मिकी आश्रम करीला मंदिर में नृत्यांगनायें इस मान्यता का निवार्हन करती चली आ रहीं हैं। 

बुजुर्ग नृत्यांगनाओं को मिलेगी पेंशन:
बुंदेली राई नृत्यांगनाओं को सांस्कृतिक विरासत में शामिल करने से जहां उनकी कला के लिए देशभर में प्रोत्साहन और सम्मान मिलेगा वहीं बुजुर्ग नृत्यांगनाओं को पेंशन मिलने का लाभ भी मिलेगा। 

करीला महोत्सव भी मनेगा 
सांसद डॉ.केपी यादव ने कहा है कि उनके संसदीय क्षेत्र में संस्कृति और पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए काफी प्रयास किए जा रहे हैं। इसी के तहत पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए ओरछा महोत्सव की तर्ज पर करीला महोत्सव मनाने के लिए भी केन्द्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री श्री प्रहलाद पटेल से चर्चा की गई है, इसकी स्वीकृति भी जल्द प्रदान होगी।

एक टिप्पणी भेजें

और नया पुराने

संपर्क फ़ॉर्म