कोलारस-समूचे देश भर में लॉक डाउन के चलते बाजार बंद है। इतना ही नहीं किसानों की फसल खरीदने के लिये निर्धारित की गई संस्थाओं से लेकर मण्डी एवं निगम भी बाजार बंद के चलते किसानों की फसल नहीं खरीद रहीं है।जिसका लाभ कोलारस,बदरवास,खतौरा,लुकवास,रन्नौद,खरई के व्यपारी गांव-गांव जाकर तथा अपनी दुकानों एवं घरों के बाहर बैठकर किसानों की फसल लॉक डाउन के बीच कम भाव तथा अधिक तौल करके किसानों को डबल रूप में चूना लगा रहे है। किसान जिसको मजदूरों से लेकर थ्रेसिंग तथा खाद्य सामग्री खरीदने के लिये पैसों की आवश्यकता है। जिसके चलते किसान अपने परचित के व्यपारियों के यह फसल बैचने के लिये पहुंचे उसके पहले ही रास्ते में बैठे फर्जी दल्ला व्यपारी किसान को दो तहर से लूट रहे है। अवैध रूप से किसान की फसल खरीदने वाले व्यापारी एक तरफ तो सरसों, चना, मसूर, धनिया को निर्धारित भाव से 300-500 सौ रूपया प्रति कुन्टल कम भाव में खरीद रहे है। इसके साथ साथ इलेक्ट्रोंनिंक तौल काटे में प्रति कुन्टल 2 से लेकर 5 किलो अधिक तौल कर किसान
के साथ-साथ शासन की टैक्स चोरी को भी खुली चुनोती प्रशासन की नाक के नीचे दे रहे है।
कोलारस,बदरवास,लुकवासा,खतौरा में छोटे किसान या जिन्हें मजदूरों से लेकर खाद्य सामग्री के लिये पैसों की आवश्यकता है। ऐसे किसान प्रति दिन करीब 1 हजार से लेकर 2 हजार वोरी अनाज बेचने के लिये मजबूर है। ऐसे ही किसानों को घर एवं दुकान के सामने बैठे दल्ला व्यापारी किसान के साथ डबल अटैक कर रहे है। हम बात करे कोलारस की तो कोलारस में मोहरा रोड़,राई रोड़, भडौता रोड़, मानीपुरा एवं एवी रोड़ पर लॉक डाउन के बीच व्यापारी अपनी दुकानों, मकान एवं गोदामों पर किसी भी समय फसल खरीदते हुये दिखाई दे जायेगे। सुबह के समय जब कुछ घण्टों के लिये बाजार खुलता है। तो उसी का लाभ यह दल्ला व्यापारी उठाते है। सूत्र यहां तक बता रहे है। कि दल्ला व्यापारी गांव-गांव जाकर किसानों की फसल का ठेका कर उसे निर्धारित भाव से कम भाव में खरीद रहे है। साथ ही स्वयं के अधिक बजन तौलने वाले इलेक्ट्रोंनिंक काटो से किसानों को चूना लगा रहे है। बिचारा किसान साहुकारों से लेकर डीजल,खाद्य सामग्री एवं मजदूरों को पैसा देने के लिये दल्ला व्यापारियों को फसल बेचने के लिये मजबूर है। कोलारस की तरह बदरवास,लुकवासा, खतौरा में भी मुख्य मार्ग यानि की पुरानी एवी रोड़ से लेकर व्यापारियों के गोदाम,दुकान एवं मकानों पर किसानों की फसल खरीदने में दल्ला व्यापारी जुटे हुये है। लॉक डाउन खुलने तथा संस्थाओं द्वारा फसल खरीदने से लेकर अनाज मण्ड़ी के चालू होने तक दल्ला व्यापारी छोटे एवं अत्याधिक मजबूर किसानों की 25 प्रतिशत फसल को कम भाव तथा अधिक तौल के साथ-साथ मण्डी बोर्ड को करोड़ो का टैक्स के रूप में चूना लगा चुके है। मजबूर किसान लॉक डाउन के बीच अपने आपको ठगा महसूस करने के बाद भी आवश्यकता की पूर्ति के लिये फसल घाटे के साथ बेचने को मजबूर है।
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