शिवराज सरकार का फैसला, बढ़ाया जिला, जनपद और पंचायत सदस्यों-अध्यक्षों का कार्यकाल

शिवराज सरकार का फैसला, बढ़ाया जिला, जनपद और पंचायत सदस्यों-अध्यक्षों का कार्यकाल

हाइलाइट्स
  • पूर्व पंचायत मंत्री गोपाल भार्गव ने भोपाल में सीएम शिवराज से मुलाकात की
  • जिला, जनपद और पंचायत प्रतिनिधियों के कार्यकाल बढ़ाने को लेकर बात की
  • सीएम ने अगले चुनाव तक सभी का कार्यकाल बढ़ाने का किया फैसला
  • कहा- कोरोना से जंग में महत्वपूर्ण हैं इनकी भूमिका

भोपाल।
मध्यप्रदेश में जिला, जनपद और पंचायत सदस्यों का कार्यकाल खत्म हो रहा है। कोरोना की वजह से अभी चुनाव संभव नहीं है। इनका कार्यकाल बढ़ाने के लिए पूर्व पंचायत मंत्री गोपाल भार्गव ने भोपाल में सीएम शिवराज सिंह चौहान से मुलाकात की। दोनों नेताओं के बीच इसे लेकर बात हुई। उसके बाद सीएम शिवराज सिंह चौहान ने उनका कार्यकाल बढ़ाने का फैसला किया है।

कोरोना संकट के बीच शिवराज सरकार ने बड़ा फैसला किया है| जिला पंचायत और जनपद पंचायतों के अध्यक्षों का कार्यकाल सरकार ने बढ़ा दिया है| इनका कार्यकाल ख़त्म होने पर हालही में प्रशासकों की नियुक्ति गई थी| अब सरकार ने अपने ही आदेश को पलट दिया है| जब तक चुनाव नहीं होते तब तक अध्यक्ष अपने पद पर बने रहेंगे|
दरअसल, जिला पंचायत और जनपद पंचायतों के अध्यक्षों के कार्यकाल को बढ़ाने को लेकर शुक्रवार को मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के निवास पर अहम् बैठक हुई| जिला और जनपद अध्यक्षों का प्रतिनिधि मंडल सीएम से मिलने पहुंचा| इस दौरान उन्होंने अध्यक्षों का कार्यकाल बढ़ाने की मांग की| क्यूंकि वर्तमान में चुनाव की स्तिथि नहीं है| इस बैठक में पूर्व पंचायत मंत्री गोपाल भार्गव भी मौजूद रहे|
प्रतिनिधिमंडल की मांग पर सीएम शिवराज ने फैसला किया है कि जब तक चुनाव नहीं होते तब तक जिला पंचायत और जनपद पंचायतों के अध्यक्षों का कार्यकाल बढ़ाया जा रहा है| उन्होंने कहा कोरोना संकट में ग्रामीण प्रतिनिधि महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं| गोपाल भार्गव ने कहा अध्यक्षों का कार्यकाल बढ़ने से कोरोना के खिलाफ लड़ाई लड़ने में ग्रामीण क्षेत्रों में मदद मिलेगी| सभी जनप्रतिनिधि युद्धस्तर पर काम करेंगे|
सरकार ने 13 अप्रैल को जिला और जनपद पंचायतों के कार्यकाल समाप्त होने पर मध्यप्रदेश पंचायत राज एवं ग्राम स्वराज अधिनियम 1993 के प्रावधानों के तहत प्रशासक नियुक्त किये थे| अब सरकार प्रशासकों से अधिकार वापस लेते हुए अध्यक्षों को फिर से जिम्मेदारी सौंप दी है|

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