मध्यप्रदेश में भाजपा नेता ज्यातिरादित्य सिंधिया समर्थक पूर्व मंत्री एवं विधायकों को भाजपा की सदस्ता दिलवादी गई। जिनकी संख्या 22 थी। पूर्व मंत्री एवं पूर्व विधायक तो अपने नाम के आगे भाजपा नेता लिखने लगे किन्तु सिंधिया समर्थक ऐसे सैंकड़ों नेता है। जोकि सदस्ता ना हो पाने के कारण अभी तक अपने नाम के आगे पार्टी का नाम नहीं लिख पा रहे है। ऐसे सैंकड़ों नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया से लेकर भाजपा संगठन एवं प्रदेश सरकार की ओर निगाह टिकाये हुये है। कि हमारा भविष्य कब तक तय होगा। सिंधिया समर्थक पूर्व मंत्री मंत्री मंडल में शामिल होने का इंतजार कर रहे है। तो विधायक टिकिट एवं मंत्री बनने की उम्मीद पाले हुये है। तो कई नेता निगम एवं संगठन में शामिल होने का इंतजार किये हुये है। किन्तु ज्योतिरादित्य सिंधिया, भाजपा संगठन एवं प्रदेश की सरकार कोरोना एवं दबाब के चलते निर्णय लेने में विलम्ब कर रही है। जिसके चलते सिंधिया समर्थक नेताओं के होंसले धीरे-धीरे पस्त हो रहे है। पूर्व विधायक जो मंत्री बनने की उम्मीद पाले हुये थे। उन्हें संगठन चुनाव हारने का डर दिखाकर उम्मीदवार बदलने की बात अंदर खाने से कर रहा है। जिसके चलते सिंधिया समर्थक पूर्व विधायक एवं मंत्रियों से लेकर अन्य समर्थकों के सामने चुनाव लडने, मंत्री बनने, संगठन में शामिल होने, निगम मंडल में शामिल होने की जो उम्मीद पाले हुये थे। उस पर संकट के बादल मंडराते हुये नजर आ रहे है।
सिंधिया समर्थक नेताओं की उपेक्षा हुई तो चुनाव के समय बन सकती है नई पार्टी
सिंधिया समर्थक सैंकड़ों मंत्री, विधायक, संगठन पदाधिकारी सिंधिया के कांग्रेस छोडते ही कांग्रेस का दामन छोड गये। किन्तु कोरोना एवं सिंधिया समर्थक नेताओं के दबाब के चलते अभी तक मंत्री मंडल विस्तार, निगम-मंडल अध्यक्षों की नियुक्ति से लेकर भाजपा संगठन का विस्तार दो माह के करीब बीतने के बाद भी नहीं हो सका। जिसके चलते सिंधिया समर्थक पूर्व मंत्री, पूर्व विधायक एवं संगठन से जुड़े लोगो के दिमाग में कई तरह के सबाल गुंज रहे है। कि जो पद कांग्रेस में रहते हुये मिले थे। यदि वह पद भाजपा में आने के बाद नहीं मिले तो विधानसभा चुनाव के ठीक पहले सिंधिया समर्थक कई नेता प्रेम चन्द गुडडु की तरह भाजपा को छोडकर नई पार्टी भी बना सकते है। सिंधिया समर्थक नेताओं में से कुछ नेताओं का कहना है। कि हम लोग मंत्री मंडल एवं निगम मंडल विस्तार से लेकर संगठन विस्तार तथा विधानसभा के चुनाव में टिकिट तक का इंतजार कर रहे है। यदि हमें कांगे्रस की तरह जगह और सम्मान नहीं मिला तो चुनाव के समय हम निर्णय लेने के लिये स्वतंत्र हो जायेगें।
सिंधिया समर्थक पूर्व विधायकों को जनता विरोध के चलते दिखाया जा रहा है हार का डर
मध्यप्रदेश में 24 विधानसभा सीटों पर आगामी 2-3 माह के अंदर विधानसभा के उप चुनाव होना है। ऐसे में सिंधिया समर्थक 22 विधायकों को भी चुनाव मैंदान में जाना है। सिंधिया समर्थक विधायकों को सर्वे रिपोर्ट दिखाकर उन्हें हार का डर बताया जा रहा है। और सिंधिया समर्थक ऐसे नेताओं को हार से बचाने के लिये निगम एवं संगठन में शामिल करने की जानकारी मिल रही है। किन्तु सिंधिया समर्थक पूर्व विधायक एवं मंत्री टिकिट के साथ मंत्री मंडल की उम्मीद लगाये बैठे है। इसी के चलते मंत्री मंडल विस्तार एवं निगम मंडल की प्रक्रिया में विलम्ब हो रहा है। सिंधिया समर्थक नेता पुन: टिकिट पा कर चुनाव मैंदान में जाने से पूर्व मंत्री मंडल में शामिल होना चाहेते है। किन्तु भाजपा संगठन द्वारा रास्ता तय न कर पाने के कारण सारी प्रक्रिया में विलम्ब हो रहा है। जिसके चलते सिंधिया समर्थक पूर्व कांग्रेसी मंत्री, विधायक, संगठन से जुडे हुये लोग भाजपा सरकार एवं संगठन से नाराज होते हुये भी शांत बैठे हुये है। विधानसभा के उपचुनाव एवं मंत्री मंडल से लेकर निगम मंडल के विस्तार के बाद नाराज कई। सिंधिया समर्थक नेता चुन सकते है। नया रास्ता तो कुछ लोग विधानसभा चुनाव के समय नई पार्टी सिंधिया समर्थक नेताओं के दबाब में बनाने तक की चर्चाये कर रहे है।
सिंधिया समर्थक नेताओं की उपेक्षा हुई तो चुनाव के समय बन सकती है नई पार्टी
सिंधिया समर्थक सैंकड़ों मंत्री, विधायक, संगठन पदाधिकारी सिंधिया के कांग्रेस छोडते ही कांग्रेस का दामन छोड गये। किन्तु कोरोना एवं सिंधिया समर्थक नेताओं के दबाब के चलते अभी तक मंत्री मंडल विस्तार, निगम-मंडल अध्यक्षों की नियुक्ति से लेकर भाजपा संगठन का विस्तार दो माह के करीब बीतने के बाद भी नहीं हो सका। जिसके चलते सिंधिया समर्थक पूर्व मंत्री, पूर्व विधायक एवं संगठन से जुड़े लोगो के दिमाग में कई तरह के सबाल गुंज रहे है। कि जो पद कांग्रेस में रहते हुये मिले थे। यदि वह पद भाजपा में आने के बाद नहीं मिले तो विधानसभा चुनाव के ठीक पहले सिंधिया समर्थक कई नेता प्रेम चन्द गुडडु की तरह भाजपा को छोडकर नई पार्टी भी बना सकते है। सिंधिया समर्थक नेताओं में से कुछ नेताओं का कहना है। कि हम लोग मंत्री मंडल एवं निगम मंडल विस्तार से लेकर संगठन विस्तार तथा विधानसभा के चुनाव में टिकिट तक का इंतजार कर रहे है। यदि हमें कांगे्रस की तरह जगह और सम्मान नहीं मिला तो चुनाव के समय हम निर्णय लेने के लिये स्वतंत्र हो जायेगें।
सिंधिया समर्थक पूर्व विधायकों को जनता विरोध के चलते दिखाया जा रहा है हार का डर
मध्यप्रदेश में 24 विधानसभा सीटों पर आगामी 2-3 माह के अंदर विधानसभा के उप चुनाव होना है। ऐसे में सिंधिया समर्थक 22 विधायकों को भी चुनाव मैंदान में जाना है। सिंधिया समर्थक विधायकों को सर्वे रिपोर्ट दिखाकर उन्हें हार का डर बताया जा रहा है। और सिंधिया समर्थक ऐसे नेताओं को हार से बचाने के लिये निगम एवं संगठन में शामिल करने की जानकारी मिल रही है। किन्तु सिंधिया समर्थक पूर्व विधायक एवं मंत्री टिकिट के साथ मंत्री मंडल की उम्मीद लगाये बैठे है। इसी के चलते मंत्री मंडल विस्तार एवं निगम मंडल की प्रक्रिया में विलम्ब हो रहा है। सिंधिया समर्थक नेता पुन: टिकिट पा कर चुनाव मैंदान में जाने से पूर्व मंत्री मंडल में शामिल होना चाहेते है। किन्तु भाजपा संगठन द्वारा रास्ता तय न कर पाने के कारण सारी प्रक्रिया में विलम्ब हो रहा है। जिसके चलते सिंधिया समर्थक पूर्व कांग्रेसी मंत्री, विधायक, संगठन से जुडे हुये लोग भाजपा सरकार एवं संगठन से नाराज होते हुये भी शांत बैठे हुये है। विधानसभा के उपचुनाव एवं मंत्री मंडल से लेकर निगम मंडल के विस्तार के बाद नाराज कई। सिंधिया समर्थक नेता चुन सकते है। नया रास्ता तो कुछ लोग विधानसभा चुनाव के समय नई पार्टी सिंधिया समर्थक नेताओं के दबाब में बनाने तक की चर्चाये कर रहे है।
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