प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया SCO के 20वें शिखर सम्मेलन को संबोधित

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया SCO के 20वें शिखर सम्मेलन को संबोधित

कहा- भारत का शांति, सुरक्षा और समृद्धि पर दृढ़ विश्वास है

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को शंघाई सहयोग संगठन  20वें शिखर सम्मेलन की वर्चुअल बैठक में शामिल हुए। इस बैठक की अध्यक्षता रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने की। वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम प्रधानमंत्री ने कहा पीएम मोदी ने अपने संबोधन में कहा एससीओ के कुशल नेतृत्व के लिए और कोरोना की मुश्किल परिस्थितियों के बावजूद यह बैठक बुलाने के लिए राष्ट्रपति पुतिन को बधाई देता हूं। एससीओ में भारत के लिए यह एक महत्वपूर्ण वर्ष है। हम एक महत्वपूर्ण बैठक का आयोजन करने जा रहे हैं। इस बैठक के लिए एक व्यापक एजेंडा तैयार किया गया है। जिसमें आर्थिक मुद्दों पर विशेष ध्यान दिया गया है। आत्मनिर्भर भारत को लेकर उन्होंने कहा कि हम महामारी के बाद के विश्व में आत्मनिर्भर भारत की दृष्टि के साथ आगे बढ़ रहे हैं। मुझे विश्वास है कि आत्मनिर्भर भारत वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए एक फोर्स मल्टीप्लायर साबित होगा और एससीओ क्षेत्र को आर्थिक गति प्रदान करेगा। पीएम मोदी ने कहा कि एससीओ क्षेत्र से भारत का घनिष्ठ सांस्कृतिक और ऐतिहासिक संबंध रहा है। हमारे पूर्वजो ने इस ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत को निरंतर सम्पर्को से जिवंत रखा। भारत का मानना है कि कनेक्टिविटी को और अधिक गहरा करने के लिए एक यह आवशयक है यह आवशयक है कि दूसरे की संप्रुभता की मूल सिद्धांतो  के साथ आगे बढ़ा जाए। पीएम मोदी ने कहा कि यूनाइटेड नेशन ने अपने 75 साल पूरे किए हैं। लेकिन अनेक सफलताओ के बाद भी संयुक्त राष्ट्र का मूल उद्देश्य अभी अधूरा है। महामारी की आर्थिक और सामाजिक पीड़ा से जूझ रहे विश्व की अपेक्षा है कि यूएन की व्यवस्था में आमूलचूल परिवर्तन जाए। हमारे यहां शास्त्रों में कहा गया है कि परिवर्तन ही एकमात्र स्थिरता है। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत का शांति, सुरक्षा और समृद्धि पर दृढ़ विश्वास है। हमने हमेशा आतंकवाद, अवैध हथियारों की तस्करी, ड्रग्स और धनशोधन (मनी लॉन्ड्रिंग) के विरोध में आवाज उठाई है। भारत एससीओ चार्टर में निर्धारित सिद्धांतों के अनुसार एससीओ के तहत काम करने की अपनी प्रतिबद्धता में हमेशा दृढ़ रहा है।  इस मंच में समय-समय पर द्विपक्षीय मुद्दों को लाने की कोशिश की जाती है जो SCO फोरम के मूल्यों और बुनियादी बातों के खिलाफ है। हमने चीनी और रूसी भाषाओं में भारत के दस साहित्य का अनुवाद किया है। कई योग कार्यक्रमों में भाग लिया। इस कार्यक्रम के आयोजन के लिए रूसी राष्ट्रपति का धन्यवाद।

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