कोलारस,बदरवास,रन्नौद नगर परिषद चुनावों में खण्ड - खण्ड भाजपा एवं कमजोर पड़ी कांग्रेस प्रत्याशियों के बीच होगा मुकावला
हरीश भार्गव, शीलकुमार यादव, विशोक व्यास, जयकुमार झा, ध्रुव यादव, रोहित वैष्णव, अंकेश कुशवाह कोलारस - नगर परिषद एवं पंचायतों के लिये नाम बड़ाने एवं हटाने की प्रक्रिया सोमवार 15 फरवरी को सम्पन्न हो चुकी है। तीन मार्च को नगर परिषदों से लेकर पंचायतों की अनंतिम यानि की फायनल सूची जारी होने के साथ ही प्रदेश सरकार से हरी झंडी मिलने पर राज्य निर्वाचन आयोग नगर परिषद यानि की नगर निकाय एवं पंचायतों के चुनावों की घोषणा कर सकता है। हो सकता है। दोनो चुनाव एक साथ हो जायें अथवा पहलें नगर परिषद के उसके बाद पंचातयों के चुनाव हो सकते है। कुल मिलाकर परीक्षाओं को देखते हुये लगता है। कि नगर परिषदों के चुनाव मार्च के अंतिम सप्ताह या अप्रैल माह में मतदान किसी भी तारीक को राज्य निर्वाचन आयोग करा सकता है। इसी बीच हम बात कर रहे है। कोलारस परगने के अंतर्गत आने वाले कोलारस एवं बदरवास के साथ-साथ पहली बार रन्नौद नगर परिषद समिति के लिये भी इस बार चुनाव होना है। तीनों ही स्थानों पर राजनैतिक दलों की वर्तमान में क्या स्थिति है। उसकों लेकर जनता की राय के अनुसार जो बातें निकलकर सामने आई है। वह इस प्रकार है।
नगर परिषद कोलारस
कोलारस नगर परिषद अध्यक्ष इस बार सामान्य महिला के लिये आरक्षित है। यहां भाजपा से टिकिट मांगने वालों की लम्बी सूची है। किन्तु कांग्रेस में अभी उम्मीदवारों की कमी अवश्य है। किन्तु मतदान होने तक कोलारस नगर परिषद का चुनाव रोचक होगा उसके कई कारण है। क्योंकि कोलारस नगर से लेकर विधानसभा क्षेत्र में भाजपा की संख्या अधिक अवश्य है। किन्तु गुटवाजी इतनी है। कि मुख्यमंत्री को छोड़कर भाजपा का कितना भी बड़ा नेता क्यों ना आ जायें। भाजपा के वरिष्ठ एवं जूनियर कार्यकर्ता एक मंच के नीचे दिखाई कभी नहीं दे सकते है। मतलब साफ है ।कि भाजपा में गुटवाजी चरम सीमा पर है और भाजपा का प्रत्याशी तय होने के बाद अन्य गुटों के भाजपाई भितरघात करके कमजोर पड़ी कांग्रेस के प्रत्याशी को बली की तरह बल शाली बनाने का कार्य करेंगे यह तय है। वहीं कांग्रेस की हम बात करें तो सिंधिया गुट के भाजपा में शामिल हो जाने के बाद कांग्रेस कम जोर अवश्य हुई है। किन्तु एक सामाज विशेष का बड़ा वोट बैंक कांग्रेस को एक जुट बनाने में जुटा हुआ है और कमजोर पड़ी कांग्रेस को टक्कर में लाने के लिये कोलारस नगर परिषद के चुनावों में कुशवाह प्रत्याशी का नाम आगे करके एन समय पर भाजपा से टिकिट न मिलने पर भाजपा से नाराज कार्यकर्ता को कांग्रेस अपना उम्मीदवार बना सकती है। उसकी तैयारियां कांग्रेस के खाने से निकलकर सामने आ रही है।
नगर परिषद बदरवास
बदरवास नगर परिषद पर कई वर्षो से एजवारा परिवार का कब्जा बना हुआ है। इस बार एजवारा कम्पनी भाजपा का दामन थाम चुकी है। भाजपा के कई बड़े नेता यह प्रयास कर रहे है। कि एजवारा कम्पनी के उम्मीदवार को इस बार टिकिट मिलने से रोका जा सकें। चूंकी कोलारस की तरह बदरवास में कांग्रेस भी कमजोर हालत में भले ही अभी दिखाई दे रही हो किन्तु प्रत्याशी चयन होने के बाद बदरवास नगर परिषद का फायनल मैच प्रारम्भ होगा अभी बदरवास के बारे में कुछ भी कहना जल्दवाजी होगा किन्तु इनता अवश्य तय है। कि एजवारा कम्पनी की बदरवास नगर में जो पकड़ है। उसको यदि भाजपा भुना पाने में कामयाव नहीं हो पाई तो बदरवास में कांग्रेस भाजपा के ऊपर हावी हो सकती है। क्योंकि एक समाज विशेष के साथ भाजपा की गुटवाजी एवं एजवारा कम्पनी का सहयोग यदि कांग्रेस के पक्ष में गया तो जिस प्रकार कोलारस में कांग्रेस कमजोर दिखाई भले ही दे रही हो किन्तु चुनाव होने तक करैरा की तरह एक अलग ही नाराज मतदाता का परिणाम कांग्रेस के लिये संजीवनी का कार्य भी कर सकता है।
नगर परिषद रन्नौद
नगर परिषद रन्नौद के लिये इस बार पहली बार चुनाव होगा जिसमें रन्नौद सहित करीब आधा दर्जन गांवों के मतदाता इस बार सरपंच की जगह पार्षद एवं अध्यक्ष के लिये मतदान करेंगे। नवीन नगर परिषदों में शामिल रन्नौद नगर परिषद पिछड़ा वर्ग के लिये आरक्षित है। यहां पिछड़ा वर्ग समाज में कुशवाह एवं धाकड़ समाज का वोट सर्वाधिक दिखाई देता है। यहां से कांग्रेस पिछड़ा वर्ग से केवट को अपना उम्मीदवार बना सकती है। जब कि बसपा से अभी कोई चेहरा तय नहीं है। भाजपा से कुशवाह, यादव, जाट, धाकड़ समाज के उम्मीदवार टिकिट की आस लगाये वैठे है। देखना है कि पहली बार रन्नौद नगर परिषद अध्यक्ष के लिये भले ही भाजपा मजबूत दिखाई दे रही हो किन्तु राजनिति के चाणक्य कहे जाने वाले केवट मंडी की तरह कहीं भाजपा के बागी कार्यकर्ताओं को अपनी नाव में बैठालकर कहीं नगर परिषद अध्यक्ष की कुर्सी तक न पहुंच जायें। इसके लिये भाजपा को अपने ही कार्यकर्ताओं से लेकर पार्टी से जुड़े वोट बैंक को साधने की भी चुनोती होगी बरना कोलारस परगने में एक मात्र सुरक्षित नगर परिषद रन्नौद में भाजपा की नाव को कांग्रेस के केवट गुटवाजी के सहारे डुवों न दें।
