सोयावीन तेल का भाव पहुंचा 138 तक, कोलारस में अभी भी बिक रहा है 160 के भाव
कोलारस - लाॅक डाउन के दौरान खादय तेल यानि की सोयावीन, सरसों, मुंगफली, तिली, सूराज मुखी के खादय तेलों का भाव 170 से 200 से ऊपर तक जा पहुंचा था जबकि फसलों के भाव में इतनी बड़ौत्तरी नहीं हुई थी किन्तु तेल की मांग बड़ने के कारण बड़े व्यापारियों ने खादय तेलों के भाव दोगुने तक कर दिये थे कोलारस परगने में बीते एक सप्ताह के दौरान खाद्य तेल जिसमें सोयावीन का तेल प्रमुख रूप से शामिल है जिसका भाव 50 रूपया प्रति किलो तक नीचे आया है जहां लाॅक डाउन के दौरान सोयावीन तेल कोलारस परगने में 170-180 रूपया प्रति किलो तक पहुंच गया था वहीं वर्तमान में सोयावीन का तेल गुरूवार को 138 तक आ पहुंचा किन्तु किराना के व्यापारी अभी भी पुराने दामों में सोयावीन का मीठा तेल बेच रहे है गुरूवार को कोलारस के एबी रोड़ स्थित थोक व्यापारी के पास जब एक ग्राहक पहुंचा तो 138 रूपये प्रति किलो बिकने वाला मीठा तेल 160 रूपया प्रति किलो के भाव दिया गया जिससे यह स्पष्ट होता है कि केन्द्र सरकार के इसारे पर तेल के बड़े व्यापारियों ने केन्द्र सरकार को देने वाले चंदे की पूर्ति तेल के भाव बड़ाकर कर ली है किन्तु कोलारस के किराना व्यापारी लाॅक डाउन में हुये घाटे की पूर्ति तेल के भाव बड़ाकर करने पर उतारू है प्रशासन को ऐसे टेक्स चोर ब्लेक मार्केटिंग करने वाले दुकानदारों की दुकाने सील्ड करने की कार्यवाही करके ऐसे चोरों को सबक सिखाने की आवश्यकता है।
चुनावी खर्च की पूर्ति करने के लिये तेल के थोक व्यापारियों ने जनता का निकाला तेल
कोलारस - मेहगाई, किसान आंदोलन, पेट्रोलियम पदार्थो की बड़ती कीमतों के चलते पश्चिम बंगाल में भाजपा को पूरी तागत लगाने के बाद भी सत्ता हाथ नहीं लगी पेट्रोलियम पदार्थ के बड़ते दामों से हर क्षेत्र में मेहगाई बड़ रही है केन्द्र सरकार को डर है कि कहीं ऐसा ना हो अगले वर्ष उत्तर प्रदेश सहित कई अन्य राज्यों में होने वाले केन्द्र सरकार के टेस्ट में बंगाल की तरह मात न मिल जाये इसके चलते केन्द्र सरकार ने डीएपी के भाव बड़ाने के बाद छूट देकर यथावत कर दिये है वहीं सोयावीन एवं सरसों सहित अन्य खाने वाले तेलों के भाव बड़े व्यापारियों से अगले वर्ष होने वाले चुनावों का खर्च निकाल कर अब तेलों के भाव घटाना प्रारम्भ कर दिये है वर्तमान में जहां सोयावीन यानि मीठे तेल का भाव 138 रूपये प्रति किलो तक पहुंच गया है जिसके आने वाले कुछ समय में 100 से नीचे तक पहुंचने का अनुमान लगाया जा रहा है क्योंकि केन्द्र सरकार को डर है कि कहीं किसान आंदोलन, पेट्रोलियम पदार्थो के बड़ते दामों से बड़ती मेहगाई, खादय तेलों के बड़ते दाम एवं कोरोना की दूसरी लहर में सरकार की लाचारी कहीं उत्तर प्रदेश सहित अन्य राज्यों में भाजपा का बंगाल की तरह सूपड़ा साफ जनता न कर दे इसको लेकर सरकार खादय तेलों के बाद अन्य क्षेत्रोें में भी राहत देकर जनता को खुश करने का अंतिम प्रयास करेंगी।