जितना सिंधिया का कद बढ़ता जा रहा है उतनी ही उनकी टीम मे मतभेद भी गहराते जा रहे है- विवेक व्यास
विवेक व्यास कोलारस - वर्तमान मे सिंधिया के बढ़ते कद को देखकर सभी उनकी और अधिक नजदीकियां पाने को आतुर है चाहे इसके लिए एक दूसरे की कितनी ही चुगली क्यों न करना पड़े सिंधिया की हार के बाद जो अवसरवादी नेता भूमिगत हो गए थे जो महाराज से दूरी बनाने लगे थे वही आज उनके गुणगान मैं लगे है सिंधिया जिस तेजी से आगे बढ़ रहे है उतनी तेजी से उनके समर्थक शिवपुरी जिले मे एक दूसरे से दूरी बनाने लगे है। हालात ये है कि सिंधिया के निकट के युवा नेता अनेक राजनेतिक संग्राम से जूझ रहे है लेकिन अन्य सिंधिया समर्थक उसके मजे ले रहे है। जो संघठन की दृष्टि से उचित नही है। सिंधिया ब्रिगेड का यही हाल रहा तो ये भाजपा संगठन की रीति नीति को अपनाने मैं कही से कहि तक सफल नही होने वाले।। बरन आगे ये भाजपा संगठन के लिए भी घातक हो सकते है। यदि ऐसा हुआ तो उक्त कृत्य सिंधिया की विचारधारा को तार तार करने वाला होगा। यदि सही मायने मैं को कांग्रेस से आयातित नेता व्यक्तिवादी राजनीति से उठकर संगठन की सोच परिपक्व नहीं करना सीखते तो महाराज की कृपा से मिले संगठन के पद केवल एक सोभा की बस्तु बन कर रह जाएंगे। ये उनके लिए अवसर है कि उनको जो पद मिले है उनका उपयोग भाजपा मैं रहते हुए जनसेवा करना सीखें।। सिंधिया खुद संगठन को साधने और समझने मैं भरसक प्रयास कर रहे है फिर उनके शिवपुरी के नेता इसमें पीछे क्यों हालही मैं जो प्रदेश सदस्य के पद दिए है उनको लेकर सिंधिया को अपने नेताओं को जनसमस्याओं के समाधान का दायित्व देने की जरूरत है समय समय पर इन नेताओं ने क्या झंडे गाड़े इसकी जांच हो ये कितने जनता के मददगार हुए इसकी जांच आगामी समय मैं हो अन्यथा आँखे बंद कर भरोसा करने का स्वाद श्रीमंत चख चुके है हालही मैं जनता की समस्याओं के प्रति तो किसी का रूख कोई खास नही है परफॉर्मेंस काफी कमजोर है अब देखना ये है कि गांव गांव जाकर ये किस तरह महारज के नाम पर लोगों की मदद कर किस तरह सिंधिया जी को पुनः उनके इस प्रिय क्षेत्र मे स्थापित करते है और कौन अधिक सफल होता है ये आगमी समय मैं देखने योग्य रहेगा।
