वन नियमों को रौंदता एक रेंजर पूरे सिस्टम पर भारी, पीसीसीएफ ने कहा रेंजर के कृत्य से वन अपराधियों को लाभ
संजय बेचैन शिवपुरी के जंगल के लिए अभिशाप वन चुके हैं खुद इसी जंगल महकमे के जिम्मेदार। यहाँ के जंगलों में बाघों को बसाने की कवायद के बीच यहां वन विभाग की लापरवाही से तेंदुआ तक सुरक्षित नहीं है यहां वन्य प्राणियों की जान सांसत में है वहीं लकड़ी की तस्करी बेहद संगठित अंदाज में फारेस्ट के ही कर्ताधर्ताओं द्वारा कराई जा रही है जंगल साफ कराए जा रहे हैं और खैर तस्करोंं को लाभ पंहुचाने के लिए रेंजर से लेकर अन्य स्तर के कतिपय अधिकारियों की भूमिका विभागीय जांच दायरे में आने के बावजूद इनके विरुद्घ *सिवाय पत्राचार के और कोई कार्यवाही संस्थित नहीं किया जाना गम्भीर सवाल खड़े करने वाला बिन्दु है।
वन विभाग में इस कदर अंधेर गर्दी चल रही है कि यहां जंगलों का अस्तित्व संकट में आ गया है साथ ही वन्य प्राणियों की जान पर भी बन आई है। शिवपुरी के जंगलों में पिछले दिनों ग्रामीण क्षेत्र में घुस आए एक तेंदुए के बच्चे को ग्रामीणों ने रेंजर भुवनेश योगी के सुपुर्द कर दिया था किंतु आज दिनांक तक इस बच्चे का कोई पता नहीं है। इसे कहां गायब कर दिया गया? रेंजर अपनी जिम्मेदारी यह कहकर टाल गए कि तेंदुए के बच्चे को जंगल में छोड़ दिया गया था, जबकि इतने छोटे शावक को इस तरह नहीं छोड़ा जा सकता। इसके साथ ही शिवपुरी के जंगल में खैर की तस्करी बड़े पैमाने पर की जा रही है। जिसे लेकर प्रधान मुख्य वन संरक्षक कार्यालय तक को जानकारी है। वन परीक्षेत्र अधिकारी भुवनेश योगी पर वन अपराधियों को लाभ पहुंचाने जैसे संगीन आरोप होने के साथ.साथ जंगलों का सफ ाया और अवैध उत्खनन में सहभागिता जैसे आरोप विभागीय स्तर पर अब जांच के दायरे में हैं, बावजूद इसके इस तरह के विवादित अधिकारियों की यहां किस बिनाह पर पोस्टिंग बनाए रखी गई है यह अपने आप में समझ से परे है। जाहिर सी बात है कि सबकुछ टॉप टू बॉटम मिलीभगत के तहत चल रहा है। कुछ प्रकरणों पर गौर करें-
जंगलों का सफाया प्रमाणित कार्यवाही फि र भी नहीं
शिवपुरी के जंगल में रेंजर भुवनेश योगी के परिक्षेत्र की बीट सुनरिया के कक्ष क्रमांक पी 981 में गत वर्ष मई माह में उडऩदस्ता द्वारा निरीक्षण किया गया जिसमें 85 खैर के पेड़ एवं 7 सतरुखा के पेड़ इस प्रकार कुल 92 नग ठूंठ पाए गए। जिनका पीओआर क्रमांक 960/20 दिनांक 10 मई 2020 को जारी किया गया। इतना ही नहीं यहां 8522 रुपए की 22 खैर लकड़ी मौके पर जप्त की गई जिसे बीट गार्ड की सुपुर्दगी में दिया गया। इस प्रकार 85 ठूंठों की पूरी एक गर्थ कम करने पर कुल हानि विभाग को 25650 जिसमें से जप्त की गई लकड़ी की कीमत 6160 रुपए पर घटाने पर शुद्ध हानि 19490 की हुई। इसी परिक्षेत्र की बीट मोहनगढ़ के कक्ष क्रमांक पी 988 दिनांक 28 मई 2020 को डीएफ ओ के उडऩदस्ता द्वारा निरीक्षण किया गया, निरीक्षण के दौरान 65 ठूंठ खैर के पाए गए एवं 1/2 हेक्टेयर में ताजी जुताई कर अतिक्रमण होना पाया गया 65 ठूठों में से बीट गार्ड द्वारा 20 ठूंठ एवं 1/2 हेक्टेयर वन भूमि पर अतिक्रमण का प्रकरण क्रमांक 399 / 25 दिनांक 23 मई 2020 जारी किया जाना बताया गया। शेष 45 ठूंठों पर उडऩदस्ता दल वन मंडल शिवपुरी द्वारा अपराध क्रमांक 960 /24 दिनांक 28 मई 2020 कायम किया गया। मौके पर मिली नग 6 खैर की लकड़ी को बीटगार्ड की सुपुर्दगी में दिया गया। इस प्रकार 45 ठूठों की एक गर्थ कम करने पर शुद्ध हानि 21910 रु जिसमें जब्त की गई लकड़ी की कीमत 9680 घटाने पर सुधानी शुद्घ हानि 2230 रुपए हुई। वन परिक्षेत्र शिवपुरी की बीट बिची सुनारिया मोहनगढ़ जिनमें कक्ष क्रमांक एमपी 996 पी 981 एवं पी 988 में 274. 85 एवं 45 खैर वृक्ष के टूट पाए गए। इस प्रकार कुल हानि 63280 रुपए की हुई। विभाग ने संबंधित परीक्षेत्र अधिकारी भुवनेश योगी को कर्तव्य में लापरवाही का दोषी पाया इनके कृत्य से शासन को लगातार हानि हुई। विभाग ने माना कि संबंधित रेंजर द्वारा कर्तव्य में लापरवाही बरती गई जो मध्य प्रदेश सिविल सेवा आचरण नियम 1965 के नियम 3 (1),(2)एवं मध्य प्रदेश सिविल सेवा वर्गीकरण नियम 1996 के प्रावधानों के तहत अनुशासनात्मक कार्यवाही के लिए पर्याप्त आधार हैं।
खैर के जंगल कटवा कर लगाए ठिकाने
यहां किस कदर जंगलों का दोहन किया जा रहा है जिसकी कोई सीमा नजर नहीं आ रही। वन विभाग के अधिकारी कर्मचारी ही जंगलों का सफाया करा रहे है। वन परिक्षेत्र शिवपुरी में बीट बिची के भीतर पिछले समय विभागीय अधिकारियों ने जब बीट निरीक्षण किया तो वे हैरत में आ गए क्योंकि यहां खैर वृक्ष के 274 ठंूठ अकेले एक बीट में मौके पर पाए गए थे। इनका परिवहन चालान द्वारा केंद्रीय कारागार डिपो शिवपुरी में कराया जाना था किंतु इस लकड़ी को बिना चालान के परिवहन करते हुए अनाधिकृत रूप से अनुमति देकर राम चरण केवट वनरक्षक के सुपर्द कर उसके बताए प्रायवेट ठिकाने पर रखवा कर खुर्दबुर्द कराने का प्रयास किया। इसी में से तमाम लकड़ी अपने रिश्तेदार के घर पर डालने की अनुमति रेंजर भुवनेश योगी द्वारा मातहत को दे डाली गई जो अपने आप में अधिकारियों की निरंकुशता का परिचायक है। इस लकड़ी में से भी तमाम सारी लकड़ी खुर्द बुर्द कर दी गई।
रेंजर ने खैर तस्कर को दिला दी जमानत
हद तो तब हो गई खैर तस्करी के संगठित अपराध में गिरफ्तार गिरोह के सरगना की जमानत माननीय उच्च न्यायालय खंडपीठ ग्वालियर द्वारा निरस्त कर दी थी। इस प्रकरण में अपराधी को लाभ पहुंचाए जाने की नियत से रेंजर भुवनेश योगी ने समय अवधि में परिवाद ही प्रस्तुत नहीं किया जिसके चलते 30 मार्च 2020 को इस सरगना को जमानत दे दी गई। जमानत मिली तो विभाग में ऊपर तक हंगामा खड़ा हो गया। इस पूरे मामले में प्रधान मुख्य वन संरक्षक कार्यवाही हेतु पत्र लिखा है, संबंधित दोषी अधिकारी के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्यवाही करने की टीप भी देना पड़ी। बड़ा सवाल यह उठता है कि विभाग में ही रहकर वनों का विनाश करने पर आमादा इस तरह के अधिकारियों को विभाग किस लालच के वशीभूत झेल रहा है। यदि शिवपुरी अन्य विभाग में शिवपुरी वन परिक्षेत्र का मौका मुआयना किया जाए तो यहां बड़े पैमाने पर जंगल क्षेत्र में खदानों का अवैध संचालन भी फ ॉरेस्ट की देखरेख में कराया जा रहा है डिफ ॉरेस्टेशन की गतिविधियों से अब शिवपुरी के जंगल संकट में आ गए हैं।
गांव वालों ने बांधा तेंदुए का बच्चा*रेंजर ने नियमों की अनदेखी कर किया गायब
वन्य जीवों की सुरक्षा को लेकर वन विभाग के अधिकारी और कर्मचारी किस हद तक संजीदा हैं यह एक उदाहरण से समझा जा सकता है। अब से करीब 8 माह पूर्व एक तेंदुए का बच्चा गांव चुर में ग्रामीणों की पकड़ में क्या आया उन्होंने इसे गले में रस्सी डालकर बांध लिया।
Tags
शिवपुरी