कार्यकर्ताओं से लेकर सहायिका कर रही कोलारस में निवास
कोलारस - एक तरफ जहां प्रदेश की भाजपा सरकार गरीब तबके से लेकर आदिवासी समाज के बच्चों को आंगनवाड़ी केंद्रों के माध्यम से पोषण आहार से लेकर अन्य जन कल्याणकारी योजनाओं के माध्यम से भरपूर लाभ देने का प्रयास कर रही है तो वहीं दूसरी ओर कोलारस महिला बाल विकास कार्यालय के अंतर्गत आने वाले ग्रामीण अंचलों में अधिकांश आंगनवाड़ी केंद्र सुने सुने नजर आते हैं क्योंकि इन केंद्रों में तैनात कार्यकर्ताओं से लेकर सहायिका कोलारस में निवासरत हैं और इनके आंगनवाड़ी केंद्र सुने सुने नजर आते हैं क्यों कि इन में पदस्थ कार्यकर्ताओं से लेकर सहायिका कोलारस में निवासरत हैं इसके चलते महिला बाल विकास विभाग द्वारा आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से दिया जा रहा लाभ जरूरतमंद बच्चों से लेकर गर्भवती माताओं को नहीं मिल पा रहा है और वह जनकल्याणकारी योजनाओं के लाभ से वंचित दिखाई दे रहे हैं आंगनवाड़ी केंद्रों में तैनात सुपरवाइजर मैडम भी आंगनवाड़ी केंद्रों का निरीक्षण नहीं करती और फर्जी तरीके से प्रतिमाह रिपोर्ट बनाकर भेज देती है कोलारस महिला बाल विकास विभाग के अंतर्गत आने वाले ग्राम कनाबदा राजगढ़ चंदैनी किलाबनी खेरोना कोटानाका बेरसिया टीला से लेकर अधिकांश आंगनवाड़ी केंद्रों में तैनात कार्यकर्ताओं से लेकर सहायिका अधिकांश समय केंद्रों स नदारद रहती हैं इन आंगनबाड़ी केंद्रों पर पोषण आहार तक नहीं बांटा जाता मासूम बच्चों को और सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं से भी गर्भवती माताओं से लेकर मासूम बच्चे वंचित होते हुए दिखाई दे रहे हैं।
आदिवासी बाहुल गांव में तक नहीं खुलते आंगनवाड़ी केंद्र समय पर
कोलारस महिला बाल विकास विभाग के अंतर्गत आने वाले अधिकांश आदिवासी बाहुल्य गांवों में तक आंगनवाड़ी केंद्र समय पर नहीं खोलें जाते हैं जिसके चलते कुपोषित बच्चों की संख्या में इजाफा होता हुआ दिखाई दे रहा है बीते माह कोलारस के ग्राम में आदिवासी बच्चा कुपोषित था और शिवपुरी इलाज कराने उसके परिजन लेकर गए तब उसकी मौत हो गई थी उसकी मौत की खबर जब मीडिया ने प्रमुखता के साथ प्रकाशित की तो महिला बाल विकास विभाग में हड़कंप की स्थिति निर्मित हो गई थी और कोलारस का महिला बाल विकास विभाग स्वास्थ्य विभाग इस मामले में लीपापोती करने में जुट गया था यदि कोलारस महिला बाल विकास विभाग के अंतर्गत आने वाले आदिवासी बाहुल्य ग्रामों में जाकर निरीक्षण किया जाए तो अधिकांश आदिवासी मासूम बच्चे कुपोषित निकल कर सबके सामने आ सकते है कोलारस महिला बाल विकास के अंतर्गत आने वाले आदिवासी बाहुल्य ग्राम बेरारी राजगढ़ कनाबदा गुड़ा कुंभराउआ कॉलोनी बेरसिया बेरखेड़ी कोटा नाका शंकरगढ़ सहित अधिकांश ग्रामों में निवासरत आदिवासी बाहुल गांव में आंगनवाड़ी केंद्र ना तो समय पर खुल रहे हैं और ना ही सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ इन आदिवासी बाहुल्य ग्रामों के बच्चों से लेकर गर्भवती माताओं को तक नहीं मिल पा रहा है इन ग्रामों में आंगनवाड़ी केंद्र तो मौजूद है परंतु इन में तैनात कार्यकर्ताओं से लेकर सहायिकाऔ के समय पर ना आने के चलते योजनाओं का लाभ कागजों में फर्जीवाड़ा कर दिया जा रहा है अधिकांश आदिवासी मासूम बच्चे इन ग्रामों में कुपोषित नजर आ रहे हैं।
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