गुरूवार को श्री महालक्ष्मी जी का पूजन समय के अनुरूप करने से मिलता है लाभ

कोलारस - गुरूवार को श्री महालक्ष्मी जी के साथ भगवान श्री गणेश एवं माता सरस्वती जी के साथ भगवान श्री हरिनारायण एवं कुवेर जी के साथ भगवान धनवंत्री जी की पूजा यदि की जाये तो विशेष फल की प्राप्ती होती है वैसे ज्यादातर लोग माता लक्ष्मी जी के साथ गणेश जी एवं माता सरस्वती जी की पूजा ही करते है जिस प्रकार बिना माता के देव पूजा स्वीकार नहीं होती उसी प्रकार यदि मना जाये तो नारायण भगवान के अयोध्या लौटने पर अयोध्या से लेकर समूचे देश भर में दीपक जलाये गये थे उसी दिन से दिपोत्सव का पर्व मनाना प्रारम्भ हुआ है दीपावली लक्ष्मी पूजन के मर्हुत के साथ साथ नारायण एवं धन के देवता कुवेर के साथ निरोगी काया के देव धनवंत्री जी की पूजा की जाये तो एक वर्ष तक लोगो को धन, स्वास्थ्य के साथ - साथ अन्य विकारो से भी छुटकारा मिलेगा। 

गुरूवार को श्री महालक्ष्मी जी की पूजा इस मर्हुत में करना के विशेष फल 

श्री महालक्ष्मी जी पूजा दीपोत्सव दिनांक 04 नवम्बर 2021ई. को दिवस वेला पर प्रालेपन गादी स्थापना स्याही भरना कलम दवात संवारने हेतु प्रातः स्टैडर्ड रेलवे  घडी समयानुसार प्रातः 06/15 से 08/53 तक शुभवेलि दिवा 10/59 से 12/21 तक चंचल वेला दिवा 11/59 से 12/43 तक अभिजित वेला दिवा 04/28 से 05/50 तक शुभ वेला समगगतिक मान्य लक्ष्मी पूजन सायं  दैनिक लग्न विगणना मान्यता अनुसार सायं गोधूली प्रदोष वेला का समय मानक सायं सूर्यास्त समय 05/50 से 08/27 रात्रि तक तथा स्थिर संग्यक बृषभ लग्न वेला सायं समय मानक 06/30 से 08/26 रात्रि तक अर्धरात्रि में स्थिर  संग्यक सिंह लग्न वेला मध्यरात्रि 12/57 से 03/13 तक इस सिंह लग्न में श्रीसूक्त एवं कनकधारा स्त्रोत का  पठन पाठन विशेष श्रीकार है 04/11/2021 शाम को 05/50 से 08/27 तक स्थिर बृषभ लग्न एवं प्रदोष वेला शुभ है अर्धरात्रि मे 12/57 से  03/13 तक सिंह लग्न शुभ है आप सभी को दीपावली की अनंत शुभकामनाएं एवं हार्दिक बधाई। 


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