कर्मचारी हित में एनपीएस को बंद कर पुरानी पेंशन लागू की जाए:अवस्थी

 सम्मानजनक जीवन के लिए रिटायरमेंट के बाद कर्मचारी का हक है पुरानी पेंशन 

बदरवास  -  वर्ष 2004 के बाद नियुक्त सरकारी कर्मचारियों के लिए पुरानी पेंशन योजना के स्थान पर नई पेंशन योजना लागू की गई है यह योजना कर्मचारी के हितों पर कुठाराघात होकर उसके लिए  शेष जीवन जीने में बड़ी बाधा है। नई पेंशन योजना एक शेयर बाजार पर आधारित प्रणाली है, जिसमें किसी भी प्रकार की न्यूनतम गारंटी नहीं है। सरकार को इस नई पेंशन योजना के स्थान पर  दोबारा से पुरानी पेंशन योजना लागू करना चाहिए जिससे कर्मचारी को अपना जीवन गुजारने के लिए सम्मानजनक पेंशन मिल सके। उक्त बात प्रांतीय शिक्षक संघ के प्रदेश उपाध्यक्ष एवं पुरानी पेंशन बहाली संगठन के प्रांतीय सचिव गोविन्द अवस्थी ने अपने बक्तव्य में कही।

 अवस्थी ने बताया कि वर्ष 2004 से कर्मचारियों को मिलने बाली पुरानी पेंशन को बंद कर नई पेंशन योजना(एनपीएस) लागू कर दी गई । नई पेंशन योजना सरकारी कर्मचारियों के हितों पर कुठाराघात है। इस योजना ने सरकारी कर्मचारी से बुढ़ापे की लाठी छीनकर   नई पेंशन योजना के नाम पर उसके साथ  छलावा किया है। इस नई पेंशन योजना में शामिल कर्मचारी को रिटायरमेंट के बाद मामूली मासिक पेंशन मिलती है जो कि जीवनयापन के लिए अपर्याप्त है। जबकि पुरानी पेंशन योजना में इतनी ही सेवा के बदले अच्छी मासिक पेंशन मिलती है। नई पेंशन योजना में कर्मचारियों का पेंशन के नाम पर जमा पैसा सरकार शेयर मार्केट में लगाती है। सेवानिवृत्ति के समय जो बाजार भाव रहेगा  उसके अनुसार कर्मचारी को मुश्किल से दो से चार हजार रुपये पेंशन के रूप में मिलेगा। अत: यह नितान्त आवश्यक है कि सरकारी कर्मचारियों के हित में सामाजिक व आर्थिक सुरक्षा प्रदान करने वाली पुरानी पेंशन व्यवस्था को तुरंत बहाल किया जाए, ताकि सेवानिवृत्ति के बाद व्यक्ति स्वाभिमान और सम्मानजनक जीवन जी सके।

अवस्थी ने बताया कि नई पेंशन योजना कर्मचारी हित में न होकर उपयोगी भी नहीं है।सरकारी कर्मचारी अपना पूरा जीवन शासकीय सेवा में गुजार देता है और इसके बदले में अब उसे एनपीएस के नाम पर प्रताड़ित किया जा रहा है। पुरानी पेंशन कर्मचारी का हक है इसलिए सरकारी कर्मचारियों को सेवानिवृत्त पश्चात न्यूनतम पेंशन की गारंटी सरकार द्वारा मिलनी ही चाहिए, जिससे वह अपने बचे जीवन को बिना किसी परेशानी परिवार के भरणपोषण में व्यतीत कर सके। नई पेंशन योजना में इस तरह की गारंटी नहीं है। इससे कर्मचारी को गंभीर संकट का सामना करना पड़ रहा है।

जब विधायिका में अच्छा वेतन ले रहे लोगों के लिए पेंशन का प्रावधान है, तो फिर कर्मचारियों पर नई पेंशन योजना थोपना उचित नहीं है। आजकल एनपीएस के तहत रिटायर हो रहे अधिकांश सरकारी कर्मचारियों को मिल रही पेंशन से उनका सामाजिक जीवन और प्रतिष्ठा दांव पर लगी हुई है।

 नई पेंशन स्कीम न केवल अन्यायपूर्ण है, अपितु कर्मचारियों को वृद्धावस्था के दौरान सामाजिक सुरक्षा के कानूनी अधिकार से भी वंचित करती है। इससे एकमात्र फायदा बीमा और शेयर बाजार को हुआ है। कर्मचारियों की कमाई मार्केट रिस्क के अधीन हो जाती है। नई पेंशन में सरकारों को भी आर्थिक नुकसान हुआ है क्योंकि सारी राशि शेयर मार्केट में लगी रहती है। जो कर्मचारी असमय मौत के मुंह में समा गए, उनके परिवार नई पेंशन योजना के कारण आर्थिक समस्याओं का सामना कर रहे हैं। यदि सरकारों को लोक कल्याणकारी नीति का अनुसरण करना है, तो तत्काल पुरानी पेंशन योजना लागू करनी चाहिए।

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