शुक्रवार को देव दीपावली के साथ कार्तिक स्नान, वृत उपवास का समापन

कोलारस - शुक्रवार की दोपहर तक कार्तिक पूर्णिमा है उसके बाद तिथि बदल जायेगी पंचांग के अनुसार सूर्य उदय के समय पूर्णिमा होने के कारण शुक्रवार को कार्तिक पूर्णिमा का पर्व मनाया जायेगा इस दिन एक माह से स्नान एवं वृत उपवास करने वाले भक्तों के पर्व के साथ अन्नकूट का भी समापन होगा कार्तिक पूर्णिमा के साथ वैष्णव सम्प्रदाय में त्यौहार करीब 55 दिनों के लिये रूक जायेगे उसके बाद मकर संक्रांति का पर्व मनाया जायेगा शुक्रवार 19 नवम्बर को कार्तिक पूर्णिमा के दिन जहां देव लोक में भगवान श्री हरि विष्णु जी के जागने एवं स्वयं के वैकुंठ लोक में लौटने के बाद देवगण दीपावली मनाते है उसी परम्परा को हमारे देश में मां गंगा के घाटों पर संतगण मां गंगा की आरती के साथ देव दीपावली का उत्सव मनाते है देव लोक से लेकर पृथ्वी लोक सभी जगह कार्तिक पूर्णिमा का दिन बड़ा ही पवित्र माना गया है। 

देव दीपावली नाम से ही पता चलता है कि यह देवताओं की दिवाली है. यह कार्तिक पूर्णिमा के लिए मनाया जाने वाला त्योहार है जो मुख्य रूप से वाराणसी में मनाया जाता है. यह रोशनी के त्योहार दीपावली के पंद्रह दिनों के बाद आता है।

देव दीपावली का महत्व

देव दीपावली को त्रिपुरोत्सव या त्रिपुरारी पूर्णिमा स्नान के रूप में भी जाना जाता है. यह त्योहार असुर त्रिपुरासुर पर भगवान शिव की जीत की खुशी में मनाया जाता है पृथ्वी पर गंगा स्नान करने आते हैं देवता ऐसी मान्यता है कि देव दीपावली के दिन देवतागण वाराणसी में गंगा घाटों पर पवित्र गंगा नदी में स्नान करने के लिए पृथ्वी पर अवतरित होते हैं. इसलिए इस दिन गंगा नदी में मिट्टी के दीपक जलाए जाते हैं. दीप जलाने की इस परंपरा की शुरुआत 1985 में पंचगंगा घाट से हुई थी।

गंगा के तट पर जलाए जाते हैं लाखों दीपक

इस दिन के उल्लास में लोग प्रत्येक साल देव दीपावली के दिन पवित्र गंगा नदी के तट पर सभी घाटों की सीढ़ियों पर लाखों मिट्टी के दीपक जलाते हैं. इस दिन पवित्र गंगा आरती 21 ब्राह्मण पुजारियों और 24 महिलाओं द्वारा की जाती है. इस समय हजारों की संख्या में भक्त और पर्यटक यहां मौजूद होते हैं. इस दिन घाटों की रोशनी और तैरते हुए दीये आकर्षक होते हैं. इस दिन यहां को दृश्य मनमोहक होता है।

देव दीपावली 2021 रोचक फैक्ट्स

5 दिवसीय उत्सव देवोत्थान एकादशी से शुरू होता है और कार्तिक पूर्णिमा के दिन समाप्त होता है, कार्तिक पूर्णिमा के दिन लोग कार्तिक स्नान करते हैं, खासतौर पर भक्त पवित्र गंगा नदी में स्नान करने देश के कोने-कोने से पहुंचते हैं, इस दिन शाम को तेल से दीप जलाकर गंगा नदी में प्रवाहित किया जाता है, शाम को दशमेश्वर घाट पर भव्य गंगा आरती की होती है इस वक्त हजारों की संख्या में श्रद्धालु उपस्थित होते हैं, गंगा आरती के दौरान भजन-कीर्तन, लयबद्ध ढोल-नगाड़ा, शंख बजाये जाते हैं, 580 साल बाद लगेगा ऐसा चंद्र ग्रहण।


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