डीज़ल के दामों में गिरावट होने के बाद नहीं घटाई स्कूल बसों की फ़ीस
स्कूल बस की फ़ीस 600 रुपये से बढ़ाकर की 1250 रुपये प्रतिमाह
के.के.दुबे शिवपुरी - 1 सितंबर से प्रदेश सरकार पर हड़ताल का दबाव बनाकर स्कूल संचालकों ने स्कूल खुलवा लिए और बसों का संचालन भी चालू कर दिया और इनकी तालिवानी हुक़ूमत के सामने प्रशासन भी नतमस्तक है,जब तक कोरोना नहीं था तब इन्ही के द्वारा प्रति माह बस का प्रति छात्र का 600 रुपये लिया जाता है उसके बाद जब कोरोना के बाद स्कूल खोलें गए तो सभी स्कूल संचालकों ने डीज़ल की बढ़ी हुई कीमतों के हवाला देते हुए प्रति माह प्रति छात्र 1250 रुपये बस की फ़ीस वसूलना प्रारंभ कर दिया।
डीज़ल के दामों में गिरावट के बाद भी नहीं कम की बसों की फ़ीस
वही जब डीज़ल के दाम 100 रुपये से भी अधिक थे तब स्कूल बसों की फ़ीस डीज़ल की अधिक क़ीमत का हवाला देकर बड़ाई गई थी,और अब जब डीज़ल के दाम 92 रुपये के आसपास है तब इनके द्वारा बसों की फ़ीस में कोई कमी नहीं की गई है।
ज़िला प्रशासन की ओर इनको मौन सहमति
वहीं जिला प्रशासन भी पालकों के जेब पर डालते डाके के ख़िलाफ़ कोई कार्यवाही नहीं करता है और इन स्कूल संचालकों की तालिवानी हुक़ूमत को मौन स्वकृति दे रहा है,अब देखना यह होगा कि प्रशासन पालकों की पीड़ा पर कोई कार्यवाही करता है या नहीं, या तालिवानी हुक़ूमत को बढ़ावा देने में अपना सहयोग प्रदान करेगा।