कोलारस - विधानसभा सीट की हम बात कर रहे है यह विधानसभा राजनैतिक लिहाज से लेकर जातिगत आंकड़ों एवं महल के प्रभाव वाली विधानसभा मानी जाती रही है इस विधानसभा से लगातार एक पार्टी एवं एक उम्मीदबार लगातार चुनाव जीतने में सफल नहीं हो पाया है जिस प्रकार राजस्थान में प्रत्येक चुनाव में सरकारें जनता बदलती है उसी प्रकार कोलारस की जनता भी प्रत्याशी अथवा पार्टी को हर 05 वर्ष में बदलने का इतिहास कोलारस विधानसभा का रहा है कोलारस विधानसभा में जातिगत आंकड़ों के साथ - साथ महल का भी काफी प्रभाव है इन सब के बाद भी कार्यकर्ता जिसे प्रत्येक पार्टी सबसे ऊपर मानकर चलती है कोलारस विधानसभा में सत्ताधारी दल भाजपा के करीब एक सैंकड़ा से भी अधिक कार्यकर्ता जिनकी संख्या छोटे से लेकर पोलिंग एवं सैक्टर जिताने वाले कार्यकर्ताओं की बात करें तो संख्या काफी अधिक हो जाती है ऐसे कार्यकर्ता भाजपा से नाराज चल रहे है जिसके पीछे एक नहीं अनेक कारण है जिसके चलते यह कार्यकर्ता भाजपा प्रत्याशी को आगामी विधानसभा चुनाव में अभिमन्यू की तरह घेरने की तैयारियों में हाथों में बका एवं प्रत्याशी के लिये मुंह से गाली देते हुये भाजपाई कोलारस विधानसभा में देखे जा सकते है।
सिंधिया गुट के कार्यकर्ताओं के भाजपा में बिलय से भाजपा कोलारस में बटी गुटों में
कोलारस विधानसभा की हम बात कर रहे है तो भले ही यहां कांग्रेस कमजोर नजर आ रही हो किन्तु कमजोर कांग्रेस में कम से कम गुटबाजी नहीं है और कई गुटों में बटी भाजपा प्रत्याशी एलान के बाद जब भाजपा के गुट बिभिषण के रूप में कांग्रेस में मिलेंगें तो कमजोर कांग्रेस भाजपा को आगामी विधानसभा चुनाव में आसान नजर आने वाली कड़ी टक्कर देते हुये नजर आयेगी भाजपा की यह स्थिति है कि मुख्यमंत्री को छोड़कर भाजपा का कितना ही बड़ा नेता या जनप्रतिनिधि कोई कार्यक्रम या सभा करे उस क्षेत्र या सम्पूर्ण विधानसभा के कार्यकर्ता उस कार्यक्रम में आज तक सिंधिया गुट के बिलय के बाद नजर नहीं आये और आगामी 01 वर्ष के अंदर होने वाले विधानसभा के चुनाव में क्या भाजपा अपने सभी गुटों को एक जुट एवं चक्रव्यू बनाये बैठे कार्यकर्ताओं को मनाने में कामयाब हो पाती है तो भाजपा पुनः बापसी कर सकती है बरना परिणाम क्या होगा आप सब समझते है।