सकारात्मक सोच और नियमित अध्ययन का लक्ष्य रखें विद्यार्थी - Badarwas

शिक्षक गोविन्द अवस्थी ने विद्यार्थियों को दिए सफलता के मंत्र

बदरवास - परीक्षा और विद्यार्थी का संबंध एक दूसरे से बहुत निकट का है और परीक्षा ही वो शब्द है जो विद्यार्थियों के हृदय की धडकनों को बड़ा देता है विद्यार्थियों को अपने जीवन संवारने और उज्ज्वल भविष्य के लिए परीक्षा तो देनी ही पड़ती है बोर्ड परीक्षाएं निकट हैं और परीक्षार्थी अपनी तैयारियों और उधेड़बुन में व्यस्त हैं तथा अपनी आंखों में सफलता के सपने सजाए हुए हैं। 

विद्यार्थी परीक्षाओं की तैयारी और मानसिक तैयार कैसे हों जिससे तनाव रहित परीक्षाओं का दौर निकल सके इसके लिए शिक्षा क्षेत्र से जुड़े शासकीय कन्या उमावि बदरवास के वरिष्ठ शिक्षक गोविन्द अवस्थी ने विद्यार्थियों को कुछ उपयोगी जानकारी और टिप्स दी हैं जो उन्हें परीक्षाओं के दौर में सही दिशा और सकारात्मक सोच देने हेतु सहायक सिद्ध होंगे जिससे बच्चे बेहतर प्रदर्शन कर सकें।

शिक्षक गोविन्द अवस्थी ने परीक्षाओं की दृष्टि से विद्यार्थियों का मार्गदर्शन और तनावरहित वातावरण बनाने पर जोर देते हुए कहा है कि बोर्ड परीक्षाएं नजदीक होने से स्वाभाविक रूप से विद्यार्थी तनाव और चिंताग्रस्त हो जाते हैं तथा अज्ञात भय उन्हें सताने लगता है। 

इसी चिंता, शंका,आशंका,भय तथा अवसाद से बच्चों को दूर करना पालकों और शिक्षकों की बड़ी जिम्मेदारी है ऐसे समय पर बच्चों का उचित मार्गदर्शन और स्नेहपूर्ण वातावरण प्रदान करना बहुत आवश्यक हो जाता है इसी को ध्यान में रखते हुए विद्यार्थियों के मार्गदर्शन एवं मनोबल बढ़ाने के उद्देश्य से छात्रों को परीक्षा की बेहतर तैयारी,समय प्रबंधन, मानसिक मजबूती और आत्मविश्वास से जुड़े महत्वपूर्ण सुझाव दिए हैं।

पढ़ाई नियमित और योजनाबद्ध हो

बोर्ड परीक्षाएं एकदम नजदीक हैं ऐसी स्थिति में पढ़ाई का शेड्यूल निश्चित और नियमित हो कोर्स को टुकड़ों में बांटकर नियमित रूप से मन लगाकर एकाग्रचित होकर पढ़ाई करें। कठिन चैप्टर,विषय पर विशेष ध्यान दें। समय सारिणी बनाकर रोज पढ़ाई के घंटे निश्चित करें और इस समय अन्य कोई काम न करें। साथ में पिछला रिवीजन भी करते जाएं जिससे आगे की तैयारी के साथ साथ पिछला कोर्स भी याद बना रहे और लिख लिखकर अभ्यास करें।गत वर्षों के प्रश्नपत्रों को देखें और उन्हें हल करें।

ध्यान भटकाने वाली चीजों से दूर रहें

विद्यार्थियों के लिए अभी बहुत महत्वपूर्ण और भविष्य निर्धारक समय है इसलिए इस समय बच्चे मन को भटकाने वाले साधन जैसे मोबाइल, टीवी, कंप्यूटर, मित्र, रिश्तेदारों, सोशल मीडिया और मिलने जुलने बालों से दूरी बनाकर रखें जिससे उनका मन पढ़ाई के अलावा अन्य जगह न जाए और पढ़ने का जो क्रम बना हुआ है वो न बिगड़े आपको खुद अपने साथ सख्ती बरतनी होगी क्योंकि आपके भविष्य से जुड़ा सवाल है।

खानपान और स्वास्थ्य का ख्याल रखें

इस समय विद्यार्थी अधिक से अधिक समय पढ़ाई में गुजारने का प्रयास करते हैं ऐसी स्थिति में उनका ध्यान अपने स्वास्थ्य और खानपान पर नहीं रह पाता है।दिमागी मेहनत अधिक होने से शरीर और दिमाग को भी आराम की जरूरत होती है इसलिए अच्छी पढ़ाई और निर्विघ्न अध्ययन के लिए कम से कम सात घंटे पर्याप्त नींद लें और शरीर तथा दिमाग को मज़बूत और तरोताजा रखने के लिए पौष्टिक भोजन लें तथा बीच बीच में दिमाग को रिफ्रेश करने के लिए पारिवारिक सदस्यों के साथ अच्छा माहौल बनाएं जिससे दिमागी थकान दूर हो सके व्यायाम,प्राणायाम,योग,टहलना करें और देर रात तक जागकर पढ़ने की जगह सुबह जल्दी उठकर पढ़ाई और रिवीजन करें।

खुद पर विश्वास रखें, तनाव न लें

विद्यार्थी परीक्षाओं और कोर्स के लोड का तनाव या टेंशन न लें और खुद पर विश्वास रखते हुए अच्छे से अच्छा करने का प्रयास करें। हमेशा सकारात्मक रहें और ये सोचें कि मेहनत और समर्पण के बूते सफलता हासिल कर ही लेंगे। अध्यात्म से जुड़ते हुए नियमित रूप से कुछ समय अपने इष्ट से शक्ति और आत्मविश्वास की प्रार्थना करें।

मन भटके तो आत्मचिंतन करें

पढ़ाई के दौरान अगर आपका मन भटक रहा है या फिर पढ़ाई में मन नहीं लग रहा है तो आत्मचिंतन करें कि हमारा लक्ष्य क्या है? माता पिता के सपने क्या हैं? भविष्य कैसा होगा ये सब विद्यार्थियों को सोचना पड़ेगा क्योंकि अभी की मेहनत और प्रयास आपका भविष्य निर्धारित करेंगे।

परीक्षा एक पड़ाव और सफलता का प्रवेश द्वार है

परीक्षाओं के दौर में विद्यार्थियों को हमेशा सकारात्मक सोच रखते हुए खुद पर विश्वास और ऊर्जा से तरोताजा रहना चाहिए। मेहनत और अधिक करेंगे तथा अपेक्षित सफलता हासिल करेंगे ऐसा सोचें और करें। अगर पर्याप्त तैयारी नहीं भी है तो हताश या निराश कतई न हों और न ही कोई नकारात्मक विचार अपने मन मस्तिष्क में लाएं क्योंकि इससे आपको जो भी याद होगा या जो भी तैयारी होगी वो कोई मतलब की नहीं रहेगी। परीक्षा कोई भी हो जीवन का एक छोटा सा पड़ाव और सफलता का दरवाजा होता है जो जीवन में आगे भी मिलेंगे।इसलिए धैर्य,आत्मविश्वास,मेहनत और बड़ों के आशीर्वाद एवं शुभकामनाओं की बदौलत बुलंद हौसले रखें और गीता के उपदेश "कर्म करो, फल की चिंता मत करो" का मनन करते हुए  और "मैं सफल होऊंगा" ऐसा संकल्प और भाव मन में रखकर चलें तो सफलता निश्चित मिलेगी।

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