सुप्रीम द्वारा लगभग एक वर्ष पहले लंबित आपराधिक मामलों के निस्तारण के लिए रास्ता साफ किए जाने के बावजूद अब तक किसी भी हाईकोर्ट में तदर्थ (एड-हॉक) न्यायाधीशों की नियुक्ति नहीं हो सकी है, क्योंकि हाईकोर्ट ने इस दिशा में कोई विशेष रुचि नहीं दिखाई है सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के जजों की नियुक्ति की प्रक्रिया से अवगत लोगों के अनुसार, 25 हाईकोर्ट में से किसी ने भी एड-हॉक जज के तौर पर नियुक्ति के लिए नामों की सिफारिश नहीं की है।
केंद्रीय कानून मंत्रालय को जजों की नियुक्ति की नहीं मिली सिफारिश
सुप्रीम कोर्ट ने 18 लाख से अधिक आपराधिक मामलों के लंबित होने पर चिंता व्यक्त करते हुए पिछले साल जनवरी में हाईकोर्ट को एड-हॉक न्यायाधीशों की नियुक्ति करने की अनुमति दी थी, जिनकी संख्या न्यायालय की कुल स्वीकृत संख्या के 10 प्रतिशत से अधिक नहीं होनी चाहिए।
केंद्रीय कानून मंत्रालय को अभी तक किसी भी हाईकोर्ट कॉलेजियम से सेवानिवृत्त जजों को एड-हॉक आधार पर नियुक्त करने के लिए कोई सिफारिश नहीं मिली है संविधान का अनुच्छेद 224ए हाईकोर्ट में मामलों के बैकलॉग को मैनेज करने में मदद के लिए सेवानिवृत्त जजों को एड-हॉक जज के तौर पर नियुक्त करने की अनुमति देता है।
निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार संबंधित हाईकोर्ट के कॉलेजियम विधि मंत्रालय के न्याय विभाग को हाईकोर्ट के न्यायाधीशों के रूप में नियुक्त किए जाने वाले उम्मीदवारों के नाम या सिफारिशें भेजते हैं इसके बाद विभाग उम्मीदवारों के बारे में जानकारी और विवरण जोड़ता है और फिर उन्हें उच्चतम न्यायालय कॉलेजियम को भेज देता है।
इसके बाद सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम अंतिम निर्णय लेता है और सरकार को चयनित व्यक्तियों को न्यायाधीश के रूप में नियुक्त करने की सिफारिश करता है राष्ट्रपति नवनियुक्त न्यायाधीश के ‘नियुक्ति पत्र’ पर हस्ताक्षर करते हैं।
एड हॉक न्यायाधीशों की नियुक्ति की प्रक्रिया स्थायी जैसी ही रहेगी, सिवाय इसके कि राष्ट्रपति नियुक्ति पत्र पर हस्ताक्षर नहीं करेंगे तदर्थ न्यायाधीशों की नियुक्ति के लिए राष्ट्रपति की सहमति प्राप्त की जाएगी अधिकारियों ने बताया कि एक मामले को छोड़कर रिटायर न्यायाधीशों को तदर्थ हाईकोर्ट न्यायाधीश के रूप में नियुक्त करने का कोई पूर्व उदाहरण नहीं है।
हाईकोर्ट में तदर्थ न्यायाधीशों की नियुक्ति पर 20 अप्रैल, 2021 को दिए गए फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने कुछ शर्तें लगाई थीं हालांकि, बाद में तत्कालीन प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) संजीव खन्ना और न्यायमूर्ति बीआर गवई (एक अन्य पूर्व प्रधान न्यायाधीश) और सूर्यकांत (वर्तमान प्रधान न्यायाधीश) की विशेष पीठ ने कुछ शर्तों में ढील दी और कुछ को स्थगित रखा।