कोलारस - कोलारस महाविद्यालय दुर्दशा का शिकार है यहां पदस्थ दो नियमित प्रोफेसर एवं 19 अतिथि विद्वान एवं अन्य स्टाफ को मिलाकर करीब 25 से अधिक स्टाफ कोलारस महाविद्यालय में पदस्थ है जिनका मासिक वेतन 15 से 20 लाख के करीब बैठता है अन्य खर्च जोड़ दिये जाये तो कोलारस महाविद्यालय पर प्रतिमाह करीब 50 लाख तक खर्च शासन द्वारा किये जा रहे है किन्तु धरातल पर स्थिति इतनी खराब है कि महाविद्यालय में प्राचार्य का अतिरिक्त प्रभार राजीव दुवे के पास है जोकि जुलाई से लेकर जनवरी के बीच कभी कभा ही देवताओ की तरह दर्शन देने आते है जबकि महाविद्यालय में सिनियर प्रोफेसर वाय.के. राय जिनको शासन द्वारा 2 लाख 50 हजार से भी अधिक वेतन शासन द्वारा दिया जाता है इनको शासन द्वारा कोई जिम्मेदारी यहां तक की महाविद्यालय की समिति तक में इन्हे शामिल न करने से यह केवल और केवल हाजरी रजिस्टर की सुरक्षा एवं महाविद्यालय में अपने केविन तक सीमित है।
कोलारस महाविद्यालय की दुर्दशा की हम बात करे तो महाविद्यालय में स्थाई प्राचार्य न होने से वर्तमान प्राचार्य महीना में कभी कभा ही दर्शन देने आते है महाविद्यालय में क्लास न लगने से करीब 19 अतिथि विद्वान प्रोफेसर केवल और केवल समय काटने के लिये ही महाविद्यालय में आते है जब शासन छात्रो को अध्ययन कराने के लिये लाखों रूपया केवल एक महाविद्यालय पर खर्च कर रही है और जहां प्राचार्य स्थाई न होने तथा न आने के कारण महाविद्यालय का अध्ययन बंद पड़ा है भला ऐसा महाविद्यालय तो केवल एक दुकान में भी संचालित किया जा सकता है फिर भला इतने अतिथि विद्वानों के होेने न होने का क्या लाभ कोलारस महाविद्यालय में बनाई गई क्रेय समिति में भी प्रोफेसरो को बजट बटवारे के चक्कर में दूर रखा गया यदि कोलारस महाविद्यालय में जुलाई से लेकर आज दिनांक तक महाविद्यालय स्टाफ की उपस्थिति का भौतिक सत्यापन करा लिया जाये तो वस्तु स्थिति समझ में आ जायेगी इतना ही नहीं कोलारस महाविद्यालय के लिये आवंटित करीब 50 बीघा भूमि के सीमा चिन्ह यानि की बांड्री बॉल न होने से 20 बीघा भूमि दूसरे खातो में आवंटित हो चुकी है शेष बची करीब 30 बीघा भूमि में से आधे से अधिक भूमि पर देख रेख के अभाव में कब्जाधारी कब्जा किये हुये है इतना ही नहीं और भी कई सबाल कोलारस महाविद्यालय के छात्र नेता अपनी आपवीति में लगाते हुये दिखाई दिये।
