सेवा में ही सच्ची श्रद्धांजलि
शिवपुरी - मां की स्मृति जब सेवा का रूप ले ले, तो वह केवल पुण्यतिथि नहीं रहती, बल्कि समाज के लिए प्रेरणा बन जाती है राष्ट्रीय मानवाधिकार एसोसिएशन के प्रदेश उपाध्यक्ष जितेन्द्र सिंह रघुवंशी (जीतू) ने अपनी माताजी स्वर्गीय श्रीमती हीरा रघुवंशी जी की छठवीं पुण्यतिथि को इसी भाव के साथ मनाते हुए पूरे दिन सेवा, संवेदना और करुणा के कार्य किए।
स्व. श्रीमती हीरा रघुवंशी की पुण्यतिथि के अवसर पर उनके पुत्र हरेन्द्र रघुवंशी, वीरेन्द्र रघुवंशी, गजेन्द्र रघुवंशी, मुकेश रघुवंशी, जितेन्द्र सिंह रघुवंशी (जीतू) तथा पौत्र सूर्यप्रताप सिंह रघुवंशी (सूरज) एवं रोहित रघुवंशी ने मिलकर यह संदेश दिया कि मां को सच्ची श्रद्धांजलि समाज की सेवा से ही दी जा सकती है।
कार्यक्रम की शुरुआत प्रातः 10 बजे माधव चौक स्थित हनुमान मंदिर से हुई, जहां जरूरतमंद लोगों को भोजन (लंगर) वितरित किया गया इसके पश्चात 11 बजे जिला चिकित्सालय परिसर स्थित कल्याणी धर्मशाला में भर्ती मरीजों के परिजनों को भोजन कराया गया, जिससे उपचार के दौरान जूझ रहे परिवारों को राहत मिली दोपहर में महिला टीम की सदस्यों संगीता वैश्य, त्रिशला गुप्ता, नीलम गुप्ता के द्वारा बाबा गोरखनाथ मंदिर पर भोले बाबा का श्रृंगार किया गया दोपहर 3 बजे सतनवाड़ा से नरवर रोड स्थित आदिवासी बस्ती में महिलाओं को कंबल, बच्चों को टोपी तथा सभी को पूड़ी-सब्जी वितरित की गई इस दौरान बच्चों के चेहरों पर मुस्कान और महिलाओं की आंखों में कृतज्ञता भाव दिखाई दिया।
सेवा कार्यों की कड़ी यहीं नहीं रुकी। शाम 6 बजे बाणगंगा रोड स्थित पशु रक्षक संघ द्वारा संचालित गौशाला में गायों को हरा चारा, गुड़, चुनी, दाने, दलिया एवं गौशाला में मौजूद डॉगी को दूध-ब्रेड प्रदान किया गया।
पूरे दिन चले इन सेवा कार्यों के माध्यम से यह स्पष्ट संदेश दिया गया कि स्व. श्रीमती हीरा रघुवंशी जी की स्मृतियां आज भी मानवता, करुणा और सेवा के रूप में जीवित हैं।
इस पुनीत कार्य में परिवार जनों के साथ इष्ट मित्रों बंटी धाकड़, सुनील जैन, गोपाल शर्मा, सोनू कुशवाह, धर्मेन्द्र सेन, संगीता वैश्य, त्रिशला गुप्ता, नीलम गुप्ता, टिंकल झा, राहुल केवट, विकास भार्गव, ऋषि सेन, ललित गर्ग,सन्तोष गोस्वामी आदि ने भी अपना सहयोग प्रदान किया ।
इस अवसर पर उपस्थित लोगों ने कहा कि रघुवंशी परिवार द्वारा किया गया यह सेवा-संकल्प समाज के लिए अनुकरणीय है। माताजी की पुण्यतिथि को इस प्रकार जरूरतमंदों, मरीजों, आदिवासी परिवारों और निराश्रित पशुओं की सेवा में समर्पित करना वास्तव में मां के संस्कारों की जीवंत तस्वीर है।
