दुकानों, ढाबों, कारखानों किसी भी नियोजन में बाल श्रमिक न हों - कलेक्टर एवं जिला मजिस्ट्रेट - Shivpuri

श्रम निरीक्षक को दिए कार्यवाही के निर्देश

शिवपुरी - कलेक्टर एवं जिला मजिस्ट्रेट अर्पित वर्मा ने निर्देश दिए हैं कि दुकानों, ढाबों, कारखानों किसी भी नियोजन में बाल श्रमिक न हों, श्रम निरीक्षक यह जांच करें और कार्यवाही करें बाल श्रम एक अपराध है और यह बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ है इसलिए विभाग द्वारा संबंधित विभागों और सामाजिक संस्थाओं के साथ मिलकर प्रभारी कार्यवाही की जानी चाहिए।

जिला स्तरीय समिति की बैठक में कलेक्टर अर्पित वर्मा ने जिले में बाल श्रम और बंधक श्रम प्रथा के उन्मूलन को लेकर कड़े कदम उठाने के निर्देश दिए हैं उन्होंने बैठक में बाल एवं कुमार श्रम (प्रतिषेध एवं विनियमन) अधिनियम 1986 के नियमों के तहत की जा रही कार्यवाही की समीक्षा करते हुए पूर्व में किए गए रेस्क्यू अभियानों की समीक्षा की।

श्रम निरीक्षक ने बताया कि 14 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को सभी प्रकार के व्यवसायों और प्रक्रियाओं में काम करने पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया गया है 14 वर्ष से18 वर्ष के किशोरों के लिए वर्ष 2016 के संशोधन के बाद अधिनियम में किशोर (14 से 18 वर्ष की आयु वाले) की श्रेणी जोड़ी गई जिसके तहत किशोरों को किसी भी खतरनाक व्यवसाय या प्रक्रिया में काम करने की अनुमति नहीं है।

इस अधिनियम के तहत नियम उल्लंघन पर नियोजकों को 2 वर्ष तक की कैद और 50,000 रुपए तक का जुर्माना हो सकता है।

एक टिप्पणी भेजें

और नया पुराने

संपर्क फ़ॉर्म